” ग्राम पंचायत सदस्यनामा ” के लोकार्पण कार्यक्रम में बोले गिरिराज सिंह…

संतोष कुमार सिंह

 

नई दिल्ली: केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री गिरिराज सिंह ने इस बात पर दुख जताया कि पंचायती राज संबंधी 1993 का संशोधन सभी राज्यों में लागू नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि पंचायतों की मजबूती के लिहाज से संवाद बहुत ही आवश्यक है। उन्होंने ​विगत 16 मई को तीसरी सरकार अभियान के संयोजक डॉ चंद्रशेखर प्राण की पुस्तक “ग्राम पंचायत सदस्यनामा “ के लोकार्पण कार्यक्रम में देश के अलग—अलग हिस्सों से आए पंचायत प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए ये बातें रखी। पुस्तक लोकार्पण समारोह का आयोजन इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में किया गया। लोकार्पण एवं संगोष्ठी- आयोजन की अध्यक्षता राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर राय ने की।

एसडीजी लक्ष्य को पूरा करने में पंचायतों की भूमिका अहम

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने डॉ प्राण द्वारा लिखित पुस्तक की महत्ता को रखांकित करते हुए कहा कि “ग्राम पंचायत सदस्यनामा “ जैसी पुस्तक और तीसरी सरकार जैसे अभियान आने वाले समय में पंचायती राज्य व्यवस्था को सुदृद्ध करने में विशेष भूमिका रखने वाले हैं। यह पुस्तक पंचायतों के लिए मार्गदर्शिका की काम करेंगी। इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में प्रधानमंत्री के विशेष ध्यान और उनके द्वारा की जा रही पहल को विस्तार से पंचायत प्रतिनिधियों के समक्ष रखा। साथ ही उन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ के सतत विकास लक्ष्य को पूरा करने के लिए पंचायत की भूमिका की प्रासंगिकता का भी उल्लेख किया। उन्होंने बदलते समय के मुताबिक, पंचायतों को तकनीक अपनाने एवं विकास प्रक्रिया से लगातार जुड़े रहने को कहा। इस दौरान केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने जम्मू कश्मीर में पंचायतों बहुत सारे अधिकार मिलने और उसके संरक्षक की भूमिका निभाने के लिए वहां के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा की प्रशंसा भी की।

पंचायतों को मजबूत करना ही गांधी को सच्ची श्रद्धांजलि
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कला केंद्र के अध्यक्ष व वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय ने मंत्री की इस बात से असहमति जताई कि पंचायतों को आगे बढ़ाने के लिए कोई कैप्सूल की तरह उपाय नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके पास एक कैप्सूल है और वह ये है कि पंचायतों को देश के 715 जिलाधिकारियों से मुक्त कर दिया जाय। उन्होंने ‘तीसरी सरकार अभियान एवं इंडिया पंचायत फाउंडेशन के आयोजन को पंचायत समवेत कहा। साथ ही कहा कि ग्राम पंचायतों को सुदृढ़ करना महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देना है क्यों कि वे पंचायतों को ही सत्ता का केंद्र बनाने के पक्षधर थे। ऐसा करना हजारीबाग के बुजुर्ग वरुण साहू को श्रद्धा सुमन अर्पित करने की तरह है, जिन्होंने अपने निधन के पहले पंचायत चुनाव में वोट डालने की इच्छा जताई और मतदान के आधे घंटे बाद ही वे चल बसे।

क्या कहते हैं डॉ प्राण

पुस्तक की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए  “ग्राम पंचायत सदस्यनामा ” के लेखक और तीसरी सरकार अभियान के संयोजक डॉ चंद्रशेखर प्राण ने कहा कि ‘ग्राम पंचायत सदस्यनामा’ जो एक तरह से उत्तर प्रदेश के ग्राम पंचायत सदस्यों के लिए मैनुअल के रूप में प्रस्तुत है, उसकी आवश्यकता तथा प्रासंगिकता कई अर्थों में महत्वपूर्ण है। पंचायतों के संस्थागत विकास के लक्ष्य को लेकर विगत सात वर्षों से संचालित ‘तीसरी सरकार अभियान’ की यात्रा में कई ऐसे पड़ाव आए जब ग्राम पंचायतों को सशक्त एवं गतिशील बनाने के लिए उसके सदस्यों की निष्क्रियता, अरुचि तथा हतोत्साह सबसे बड़े गतिरोध के रूप में दिखाई पड़े। इन सब के पीछे का सबसे बड़ा कारण पंचायती राज व्यवस्था के बारे में जानकारी और समझ का अभाव था। इसका सीधा प्रभाव यह पड़ा कि सदस्य पद के प्रति लोकमानस में बहुत बड़े पैमाने पर उदासीनता और उपेक्षा दिखाई पड़ी। इस पद के लिए प्रत्याशियों की बड़े पैमाने पर कमी के चलते अधिकांश पदों पर जबरन निष्क्रिय और प्रभावहीन लोगों की एक लम्बी फौज इस व्यवस्था के हिस्से में नाम मात्र के लिए जुड़ गई। जिसके कारण ग्राम पंचायतों का संस्थागत विकास ठहर सा गया। इस ठहराव के पीछे के कारण तो कई हैं लेकिन उसमें से जिस कारण को अभियान ने अपने हिस्से में सबसे अधिक समझा वह जागरूकता और अभिरुचि के अभाव के रूप में आया। इसी नाते इस मैनुअल को अपनी प्राथमिकता में शामिल करते हुए तैयार किया गया है।

उन्नीसवीं और बीसवीं सदी में मेरा गांव ‘इसरायण कलां’

इस पुस्तक में 10 चैप्टर हैं जिनमें पंचायती राज व्यवस्था के इतिहास के साथ ही उनसे जुड़े अलग—अलग पहलुओं को रेखांकित​ किया गया है। डॉ प्राण ने उम्मीद जताई कि यह पुस्तक पंचायती राज व्यवस्था और उससे जुड़े प्रतिनिधियों के लिए बहुत ही उपयोगी होगी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ग्राम पंचायत सदस्यों की समझ और कार्य की दृष्टि से कितनी उपयोगी होगी, यह तो उन्हें ही तय करना होगा। यदि इससे उनकी जानकारी व समझ में कुछ बढ़ोत्तरी होती है तथा उनके द्वारा अपने वार्ड तथा गाँव में रचनात्मक प्रयास शुरू किया जाता है तो वह इस पुस्तक की सबसे बड़ी सार्थकता होगी।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि व एकात्म मानव दर्शन अनुसंधान एवं विकास संस्थान के अध्यक्ष एवं राज्यसभा के पूर्व सदस्य डॉ. महेशचंद्र शर्मा ने अभी तक ग्राम पंचायतों के सही मायने में धरती पर नहीं होने की तरफ ध्यान आकृष्ट किया।
इंदिरा गांधी कला केंद्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने चंद्रशेखर प्राण की पुस्तक को पंचायतों के लिए श्रीमद्भगवद्गीता की तरह बताया।

इंडिया पंचायत फाउंडेशन के ट्रस्टी रामचंद्र राव, वरिष्ठ पत्रकार अरुण तिवारी एवं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र शैक्षणिक इकाई के प्रो. अरुण भारद्वाज ने भी आयोजन को संबोधित किया।

“पंचायत के संस्थागत विकास में ग्राम पंचायत सदस्यों की भूमिका”
कार्यक्रम के दूसरे व अति महत्वपूर्ण सत्र में “पंचायत के संस्थागत विकास में ग्राम पंचायत सदस्यों की भूमिका” को लेकर व्यापक विमर्श हुआ और एक परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस सत्र की अध्यक्षता भारतीय प्रशासनिक सेवा की वरिष्ठ अधिकारी डॉ रश्मि सिंह द्वारा किया गया तथा कार्यक्रम का संचालन पत्रकार श्री अरूण तिवारी ने किया।

 कथनी और करनी के बीच कोई न हो कोई अंतर
पंचायत प्रतिनिधियों से रूबरू डॉ रश्मि सिंह ने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं के जरिए निर्वाचित हुए प्रतिनिधियों के लिए नैतिक आचरण और नैतिक मूल्यों के उच्च मानकों पर खड़ा उतरना सभी सदस्यों के लिए आवश्यक है ताकि कथनी और करनी के बीच कोई अंतर न हो। उन्होंने पंचायती राज संस्थाओं के बेहतर परिचालन के लिए इस बात पर भी बल दिया कि लोगों के साथ निरंतर जुड़ाव, अच्छे संचार और विभिन्न एजेंसियों के साथ बेहतर सहयोग व समन्वय की आवश्यकता है। साथ ही विभिन्न स्तरों पर चैंपियन की पहचान और परिवर्तन के वाहन बने चैंपियन्स को मान्यता दिया जाना भी जरूरी है। ​विभिन्न स्तर पर सरकार की योजनाओं को जमीनी स्तर पर बेहतर कार्यान्यवयन के जरिए अपनी खास पहचान रखने वाली भारतीय प्रशासनिक सेवा की वरिष्ठ अधिकारी डॉ रश्मि सिंह ने कहा कि अच्छी प्रथाओं से सीखना और ऐसी प्रथाओं को बड़े पैमाने पर ले जाना भी महत्वपूर्ण है, ताकि जमीनी स्तर पर बदलाव हो सके।

प्रवासियों का गांव इसरायण कलां

परिचर्चा के दौरान पैनलिस्ट के रूप में 6 राज्यों के ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों ने शिरकत की। जिसमें बिहार से शांति देवी, गुजरात से सुनीता बेन, उत्तर प्रदेश से अंजना, मध्यप्रदेश से हरगोविंद विश्वकर्मा, सोनभद्र से राम चन्दर सिंह और उत्तर प्रदेश कुलदीप पाल ने अपने—अपने पंचायतों में किए जा रहे कार्यो और उससे प्राप्त अनुभवों को विस्तार से रखा। इस कार्यक्रम में देश के अलग-अलग हिस्सों से आये लगभग 200 पंचायत प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं व जेपी सेनानियों ने शिरकत की।

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