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उन्नीसवीं और बीसवीं सदी में मेरा गांव ‘इसरायण कलां’

गूगल पर मेरे गांव 'इसरायण कलां' को सर्च करेंगे तो वह बतायेगा कि यह बिहार के मधेपुरा जिला मुख्यालय से पैंतीस किलोमीटर दूर है...

गांव उखई से जुड़ी यादें मंजिल पर पहुंचने में सदैव रही हैं मददगार

मेरे गांव का नाम उखई पश्चिम पट्टी है, जो सिवान जिला मुख्यालय से 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस गांव में पहले 22 टोला हुआ...

गांधी का गंगौर: मैय्यो के लिए विनोबा…बिनो बाबाजी थे, तो गांधी जी…गन्धी महतमा

साठ साल पहले ओलापुर-गंगौर की चोहद्दी बड़ी दिलचस्प हुआ करती थी। बल खाती बूढ़ी गंडक के किनारे गांव लम्बा बसा हुआ था। गांव के...

जातीय विविधता के लिहाज से खास पहचान रखता है पैतृक गांव पिपलाज

  सार्वजनिक नल ने प्यास बुझाने के जतन शुरू किये ही थे कि पिताश्री के रिटायरमेंट और तीन सौ किलोमीटर दूर अपने पैतृक गांव पिपलाज...

अजमेर के पीपलाज और झुंझुनू के मोहनवाड़ी गांव से जुड़ी हुई है स्मृतियां

सौभाग्यशाली हूं क्योंकि मेरे एक नहीं,दो-दो गांव हैं। पहला-पिपलाज। जहां जन्म हुआ। दूसरा-मोहनवाड़ी। जहां,बचपन बीता। पांचवीं-छठी तक पढ़ाई की। पिपलाज राजस्थान के अजमेर जिले...

एकौना गांव के रग-रग में बसा हुआ है रामचरित मानस

बक्सर जिले के सुदूर उत्तर में गंगा नदी बहती है। गंगा नदी से करीब 5 किलोमीटर पहले एकौना गांव है। गांव की चौहद्दी की...

सहसराम का नया टोला हमारा गांव कुम्हउ

कुम्हउ. यही नाम है मेरे गांव का. बिहार के मशहूर शहर सासाराम से अगर बनारस की ओर जीटी रोड पकड़कर बढ़ें, तो बाईपास पर...

संस्मरण: ऐसे ही एक दिन गाँव मर कर शहर हो जायेगा

  मेरे गाँव का नाम कटसारी है जो सुलतानपुर जिले के कादीपुर तहसील में है। गांव के दक्षिण गोमती नदी बहती है, पश्चिम ग्राम राई बीगो,...
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