Bihar Panchayat Election बिहार में पंचायत चुनाव का सूरते हाल..प्रत्याशी तैयार,विभाग पर है दारोमदार

मंगरूआ
पटना: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव अदालती शह मात के खेल से बाहर आते हुए संभवत: निर्णायक दौर में पहुंच गया है, हालांकि Bihar Panchayat ​बिहार में पंचायत चुनाव को लेकर असमंजस बरकरार है और देरी होना तय माना जा रहा है। हालांकि पंचायत चुनाव के संभावित प्रत्याशी जोर आजमाईश में लगे हुए हैं। अपना बाजार भाव तौल रहे हैं और टटोलने के कवायद में गांव—गंवई के लोगों से लगातार संबंध बनाए हुए हैं कि भले देर से ही जब बिहार पंचायत चुनाव की तिथी की घोषणा हो तो उनकी दावेदरी पुख्ता हो।
कहां फंसा हैं पेंच’
वैसे तो विभागीय स्तर ​पर Bihar Panchayat ​बिहार में पंचायत चुनाव की तैयारी तेजी से चल रही है लेकिन ईवीएम खरीदगी को लेकर ऐसा पेंच फंसा हुआ है कि पंचायत चुनाव को लेकर तैयारी कर रहे प्रत्याशी​ दिन गिनने में लगे हुए हैं कि कब सुदिन आये और वे मैदान में उतर कर आम मतदाताओं के भरोसे पर अपना भरोसा बढ़ाने लगा हुआ है।

पारदर्शिता से चुनाव करा लेने की चाहत में फंसा हुआ है पेंच 
Bihar Panchayat ​बिहार में पंचायत चुनाव के मद्देनजर यदि पेंच की बात करें तो पेंच पारदर्शिता से चुनाव करा लेने की चाहत में फंसा हुआ है। अभी तक बिहार में पंचायत चुनाव बैलेट पेपर से होता था। लेकिन सरकार ने तय किया इस बार पंचायत चुनाव बैलेट से नहीं ईवीएम मशीन से होगा। ऐसे में स्वाभाविक है कि जब कोई नयी व्यवस्था शुरू होगी तो समस्यायें आएंगी। राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव की तैयारी कोरोना के आपाधापी के बावजूद समय पर शुरू कर दी थी। लेकिन ईवीएम के इस्तेमाल, उसकी खरीदगी,मल्टीपोस्ट ईवीएम की खरीदगी, प्रशिक्षण आदि के वजह से असमंजस की स्थिती बनी रही और देर होती गई। इस बीच मामला अदालत में भी आया। इस वजह से पंचायत चुनाव का निर्धारित समय पर होना अब असंभव होता जा रहा है।

अदालती जद्दोजहद
Bihar Panchayat ​बिहार में पंचायत चुनाव को लेकर यदि अदालती जद्दोजहद की बात की जाये तो राज्य चुनाव आयोग ने ईवीएम की खरीद के लिए ईवीएम निर्माता कंपनी को प्रस्ताव दे दिया लेकिन ईवीएम की आपूर्ति को लेकर भारत निर्वाचन आयोग से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट जारी नहीं हो पाया। ऐसे में ईवीएम की आपूर्ती को लेकर तनातनी बनी रही और मामला अदालत के चौखटे तक पहुंच गया। इसकी अगली सुनवाई 6 अप्रैल को होनी है। इससे पहले हाईकोर्ट ने राज्य और भारत निवार्चन आयोग को आपसी सहमति से फैसला लेने की सलाह दी थी, लेकिन इस दिशा में बात बढ़ती हुई नहीं दिखी। यदि 6 अप्रैल को अदालत की तरफ से कोई निर्देश आता भी है तो ईवीएम की खरीदगी,जांच,मतदान कर्मियों के प्रशिक्षण में कम से कम एक माह का वक्त लगेगा। हालांकि विभागीय सूत्रों का दावा है कि एक बार फैसला हो जाये उसके बाद 10 अप्रैल के बाद 10 चरणों में होने वाली पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी की जा सकती है।

क्या है ताजा सूरतेहाल
Bihar Panchayat ​बिहार में पंचायत चुनाव का ताजा सूरतेहाल ये है कि भले ही जमीन पर पंचायत चुनाव में अपनी किस्मत आजमाने वाले प्रत्याशी भुजिया,गुजिया और विकास के दावे के साथ गंवई मतदाताओं से मेल मिलाप बढ़ाने में दिन रात एक किये हुए हों, दोस्त तो दोस्त दुश्मनों के दर पर भी दस्तक देने की तैयारी में हों, चुनावी तैयारियों के मद्देनजर सोशल मीडिया माध्यमों और स्थानीय स्तर पर चलाये जाने वाले यू ट्यूब चैनलों पर मुखिया जी और संभावित मुखिया जी की धमक सुनाई देने लगी हो। विकास के तमाम तरह के दावे और प्रतिदावे सामने आ रहे हैं, लेकिन पंचायत चुनाव का टलना तय है और देरी हो गई है। नहीं तो नियत वक्त पर होता या फिर पिछले चुनाव को ही आधार माने तों पिछली बार पंचायत चुनाव की अधिसूचना 25 फरवरी 2016 को ही जारी हो गई थी। इस बार भी ये उम्मीद लगाई जा रही थी कि राज्य निर्वाचन आयोग ने इस महीने की शुरुआत में सभी जिला निर्वाचन अधिकारी को 10 चरणों में चुनाव संपन्न कराए जाने को लेकर एक प्रस्ताव भेजा था। उम्मीद जताई जा रही थी कि 10 मार्च तक पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी हो जाएगी, लेकिन स्थिति यह है कि अब चुनाव की अधिसूचना मध्य अप्रैल तक भी जारी हो जाये तो गनीमत होगी।
उल्लेखनीय है कि इस बार Bihar Panchayat ​बिहार में पंचायत चुनाव के लिए मुखिया, पंच, सरपंच, वार्ड सदस्य, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्यों समेत सभी छह पदों के करीब 2 लाख 58 हजार पदों के लिए 10 चरणों में चुनाव कराए जाने का फैसला लिया गया है। यानी मई तक चुनाव संपन्न हो जाये तो गनीमत होगी, हालांकि इसे हर हाल में जून से पहले संपन्न कराना होगा क्योंकि बिहार में वर्तमान पंचायतीराज संस्थाओं का कार्यकाल जून 2021 को समाप्त होने वाला है।

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