Panchayat Toli

दादी (बापी) के नुस्खे साबित हुए रामबाण… बदल रहा है दंतेवाड़ा का स्वास्थ्य परिदृश्य

दंतेवाड़ा: क्या तुम्हें याद है वो बातें पुरानी, दादी (बापी) के नुस्खे नानी की कहानी। कौन ऐसा होगा जिसका बचपन से लेकर युवावस्था तक दादी के नुस्खे और नानी की सीख के बीच से न गुजरी हो। नानी के नुस्खे दादी के बोल होते थे सीधे प्यारे व सच्चे उसका न कोई तोल…थे बहुत अनमोल …

दादी (बापी) के नुस्खे साबित हुए रामबाण… बदल रहा है दंतेवाड़ा का स्वास्थ्य परिदृश्य Read More »

गांव से नगर बनने की यात्रा में खो गया गांव गजरौला

मेरा गांव गजरौला है जो उत्तर प्रदेश राज्य के अमरोहा ज़िले में स्थित एक नगर व नगर पालिका परिषद है। गजरौला गंगा नदी की पूर्वी ओर राष्ट्रीय राजमार्ग 24 व राष्ट्रीय राजमार्ग ९ पर स्थित है। यह राजमार्ग उसे पश्चिम दिशा में गंगा की दूसरी पार गढ़मुक्तेश्वर से जोड़ता है। बड़ी बात ये है कि …

गांव से नगर बनने की यात्रा में खो गया गांव गजरौला Read More »

सोन नदी के कछार पर बसा मेरा गांव खंडोल

मेरा सौभाग्य है कि मेरा जन्म एक ऐसे गांव खंडोल में हुआ जहां लगभग महिलाएं भोजपुरी बोलती हैं और लगभग पुरुष मगही। इस नाते पुरुषों द्वारा बोली जाने वाली मगही पर भोजपुरी का और स्त्रियों द्वारा बोली जाने वाली भोजपुरी पर मगही का प्रभाव देखा जा सकता है। कुछ पुराने लोगों का मानना है कि यहां …

सोन नदी के कछार पर बसा मेरा गांव खंडोल Read More »

स्कूली बच्चों के लिए लाईब्रेरी संवारते फैसल…

  ये पूछने पर कि आप किस लाइब्रेरी को ज्यादा पसंद करते हैं डिजिटल या फिजिकल फैसल ने हंसते हुए कहा बेशक फिजिकल उसका कोई मुकाबला नहीं इसलिए मैंने हमेशा बच्चों को लाइब्रेरी में आने को प्रेरित किया है, मैं उन बच्चों को भी लाइब्रेरी आने को कहता हूं जो कोई किताब नहीं पढ़ना चाहते, …

स्कूली बच्चों के लिए लाईब्रेरी संवारते फैसल… Read More »

मिट्टी के दीये के साये में हम बनाये रखें अपना अस्तित्व

“छठ में आकाश का सूरज बहुत कम-कम है, मिट्टी के दीये बहुत-बहुत ज्यादा!” इसलिए मेरे मित्र चन्दन श्रीवास्तव कहते हैं कि छठ पंडित के ‘पतरा’ का नहीं ‘अंचरा’ का परब है। यानी “छठ की कथा नहीं हो सकती, उसके गीत हो सकते हैं। गीत ही छठ के मंत्र होते हैं। छठ के गीतों में अपना …

मिट्टी के दीये के साये में हम बनाये रखें अपना अस्तित्व Read More »

कथा बरास्ते विकास शहरीकरण की भेंट चढ़ते गांव की

अपने गांव को याद करने से पहले तो बनता है अपने आप से एक सवाल। क्या दशकों से किसी महानगर में रहते-रहते हमारा गांव हमारे अंदर कहीं बसता भी है या वह कहीं गुम हो चुका है ? तो जवाब तो यही बनता है कि मन के किसी कोने में वह बसता तो है लेकिन …

कथा बरास्ते विकास शहरीकरण की भेंट चढ़ते गांव की Read More »

लोक-गीतों व संस्कृतियों के मौलिक बोध से ही रहने लायक बनेंगे गांव

अमित राजपूत खड़कपुर। यही वह पहला गांव है, जिसका बोध मुझे मेरे जीवन व अनुभव-संसार में पहली बार हुआ। सोलह महा-जनपदों में से एक भगवान बुद्ध की तपोस्थली कौशाम्बी-जनपद (उत्तर प्रदेश) का एक छोटा सा गांव है खड़कपुर, जहाँ औसतन ग़रीब लोधी-राजपूतों की एकमुश्त आबादी है। गांव के निर्वासित-इलाक़े के दक्षिण-पश्चिमी कोने पर एक सम्पन्न …

लोक-गीतों व संस्कृतियों के मौलिक बोध से ही रहने लायक बनेंगे गांव Read More »

प्राकृतिक संपदा से परिपूर्ण गांव तिलईबेलवा…कुआं, तालाब, पोखर का जल आॅडिट

आर्यावर्ती सरोज “आर्या” भारत वर्ष में उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले का तिलईबेलवा गांव का ग्रामीण आंचल अपनी प्राकृतिक संपदा व सौंदर्य से परिपूर्ण व समृद्ध है। यह ग्रामीण अंचल अपनी प्राकृतिक और मनोहारी दृश्य से बरबस ही अपनी ओर आकर्षित करने की क्षमता रखती है। जिले से अधिकतम निकटतम होने पर भी अपने परंपरागत …

प्राकृतिक संपदा से परिपूर्ण गांव तिलईबेलवा…कुआं, तालाब, पोखर का जल आॅडिट Read More »

प्रेमचंद का गांव….”लमही” ढूंढ़े नहीं मिलते होरी.. धनिया.. घिसू और माधव

चंद्रबिंद सिंह कथा सम्राट प्रेमचंद का गांव अर्थात ‘गोदान’ में चित्रित होरी का गांव। यदि किसी व्यक्ति की हिन्दी कथा-साहित्य में थोड़ी भी रुचि होगी तो वह कम से कम प्रेमचंद के कथा साहित्य से परिचित होगा और प्रेमचंद के कथा – संसार के लगभग पात्र ग्रामीण परिवेश से आते हैं। मेरी उन पात्रों के …

प्रेमचंद का गांव….”लमही” ढूंढ़े नहीं मिलते होरी.. धनिया.. घिसू और माधव Read More »

अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है गांव का कुआं

गौतम पांडे,युवा पत्रकार अब दाल पकाने के लिए नही होती है विशेष कुओं की पानी की खोज कुएं का ठंडा पानी पीपल की छांव रे रुक जाओ परदेसी आज मोरे गांव रे भोजपुरी की स्टार गायिका देवी का ये गीत एक समय लोगों के जुबान से नही उतरता था, अब ना तो देवी के भोजपुरी …

अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है गांव का कुआं Read More »