सियासी गुणाभाग और गणतंत्र के पर्व के बीच जारी किसान संगठनों व सरकार के बीच जारी है शह मात का खेल,विपक्ष भी मौके की जुगत में

मंगरूआ

नयी दिल्ली: जैसे-जैसे गणतंत्र का पर्व नजदीक आ रहा है वैसे-वैसे सरकार की बैचैनी बढ़ती जा रही है। सरकार अपनी तरफ से ये पूरी कोशिश कर रही है कि दिल्ली के प्रवेश द्वार पर धरना दे रहे किसान संगठनों को समझा बुझाकर ट्रैक्टर रैली न करने के लिए मनाया जाए और किसान सरकार की बात मानते हुए धरना समाप्त कर दें। उधर किसान संगठन पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। गणतंत्र के अवसर पर न सिर्फ ट्रैक्टर मार्च निकालने को अड़े हुए हैं बल्कि आगामी दिनों में अपने आंदोलन को और तेज करने की बात कह रहे हैं। वे न सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाये कमिटी के सामने जाने को तैयार हैं बल्कि यह कहते हुए पल्ला झाड़ रहे हैं कि हमने तो कमिटी मांगी नहीं थी। इधर कांग्रेस के पूव अध्यक्ष राहुल गांधी जो कि अ​ब तक अपने बयानों से किसानों के समर्थन करने की बात करते हुए नरेंद्र मोदी सरकार पर बरस रहे थे, आज एक बार फिर से उन्होंने प्रेस कांफ्रेस कर मोदी सरकार पर हमला बोला। इधर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर फैसले की जवाबदेही दिल्ली पुलिस पर डाल दी है, ऐसे में दिल्ली और उत्तर प्रदेश की टीम किसान संगठनों से बातचीत करने और हालात का जायजा लेने के लिए धरना स्थलों पर पहुंची।


विस्तार में यदि आज किसान आंदोलन के घटना क्रम को देखें तो पहले से प्रस्तावित किसान संगठनों और सरकार के बीच होने वाली बैठक को एक दिन के लिए टाल दिया गया। अब यह बैठक 19 सितंबर के बजाय 20 सितंबर को होगी। यह वार्ता क्यों टली इसको लेकर विभिन्न तरह के कयास लगाए जा रहे हैं लेकिन जो वास्तुस्थिती है वह यह संकेत देती है कि ज्यादातर किसान नेता सोमवार की रात तक वार्ता स्थगित करने के सरकार से फैसले से बेखबर थे। सरकार की तरफ से कृषि एवं किसान मंत्रालय के सचिव संजय अग्रवाल ने सोमवार को 40 किसान संगठनों के नाम पर पत्र जारी किया। पत्र में लिखा है कि आंदोलनकारी किसान संगठनों के साथ केंद्र सरकार की मंत्री स्तरीय समिति की 19 जनवरी को होने वाली वार्ता बैठक अपरिहार्य कारणों से स्थगित करना आवश्यक हो गया है। अब यह बैठक 20 जनवरी को दोपहर 2 बजे से विज्ञान भवन में होगी। हालांकि कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने देर रात ट्वीट कर वार्ता टलने की जानकारी दी।
सूत्रों का कहना है कि किसानों द्वारा ट्रैक्टर रैली निकाले जाने के मद्देनजर सरकार को यह उम्मीद थी कि सर्वोच्च अदालत इस संबंध में कोई आदेश सोमवार को दे सकता है। इसलिए 18 की सुनवाई के अगले दिन 19 जनवरी को वार्ता तय हुई। 18 को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद अब 19 को सरकार की वार्ता भी टल गई।


सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिती की पहली बैठक

आज वहीं दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट द्वारा कृषि कानून को लेकर बनाई गई ​समिति की आज पहली बैठक हुई। इस बैठक में सुप्रीम कोर्ट के बनाये गए पैनल के तीन सदस्यों अनिल धनवत, अशोक गुलाटी, प्रमोद कुमार जोशी शामिल हुए। ​कमिटी में शामिल अनिल घटवट ने कहा की उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त समिति नए कृषि कानूनों पर किसानों, केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और सभी पक्षकारों के विचार जानेगी। जब अंतिम तौर पर यह रिपोर्ट सवोच्च अदालत को सौंपी जाएगी उसमें उनकी प्राथमिकता हर पहलुओं को समेटना होगा और वे इस दौरान अपनी निजी राय को कृषि कानून से बिल्कुल अलग रखेंगे। उन्होंने कहा कि भले ही किसान संगठन कमिटी के साथ बातचीत करने को राजी नहीं है लेकिन हम इसके लिए अपनी तरफ से पूरी कोशिश करेंगे कि वो वार्ता में शामिल हों।
भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत एक बार फिर दुहराया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति की बैठक में हम नहीं जा रहे हैं। आंदोलन में शामिल किसी ने भी कोर्ट का दरवाजा नहीं खटखटाया। सरकार अध्यादेश के माध्यम से विधेयक लाई, इसे सदन में पेश किया गया। यह वापस भी उसी रास्ते से जाएगा जैसे लाया गया।
राहुल गांधी ने खोला मोर्चा
कांग्रेस मुख्यालय में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने किसानों के मुद्दे पर एक प्रेस कांफ्रेस किया। इस दौरान उन्होंने मोदी सरकार के किसान विरोधी नीतियों से जुड़ी एक बुकलेट लांच की जिसका ​शीर्षक था,’खेती का खून,तीन कृषि कानून. मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा कि “मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नहीं डरता। मैं साफ-सुथरा आदमी हूं। वे मुझे गोली मार सकते हैं, लेकिन छू नहीं सकते। मैं देशभक्त हूं और अपने देश की रक्षा करूंगा। कोई मेरा साथ नहीं देगा तब भी अकेला लड़ता रहूंगा। यह मेरा धर्म है।”


वहीं कृषि कानून की कमियां बताते हुए राहुल गांधी ने कहा​ कि…

  1. एग्रीकल्चर सेक्टर 3-4 क्रोनी कैपिटलिस्ट के हाथों में चला जाएगा
    राहुल ने कहा- नए कृषि कानूनों के चलते पूरा एग्रीकल्चर सेक्टर 3-4 क्रोनी कैपिटलिस्ट के हाथों में चला जाएगा। मैं किसान आंदोलन का समर्थन करता हूं। हर व्यक्ति को उनका सपोर्ट करना चाहिए, क्योंकि वे हमारे लिए लड़ रहे हैं।
  2. सरकार देश को गुमराह करना चाहती है
    कांग्रेस नेता ने कहा- देश में आज त्रासदी घट रही है। सरकार सभी मुद्दों की अनदेखी कर देश को गुमराह करना चाहती है। मैं सिर्फ किसानों की बात नहीं कर रहा। यह मुद्दा तो त्रासदी का एक हिस्सा भर है। यह बात युवाओं के लिए अहम है। यह वर्तमान का नहीं, बल्कि आपके भविष्य का सवाल है।
  3. देश देख रहा है सुप्रीम कोर्ट की हकीकत
    किसानों से बातचीत के लिए सुप्रीम कोर्ट की तरफ से बनाई गई कमेटी पर राहुल ने कहा- मैं सुप्रीम कोर्ट पर कमेंट नहीं करूंगा। देश सुप्रीम कोर्ट की हकीकत देख सकता है।

  4. दिल्ली पुलिस ने जाना बोर्डर का हाल
    किसानों के ट्रैक्टर रैली और गणतंत्र के पर्व के मद्देनजर जब सर्वोच्च अदालत ने जवाबदेही दिल्ली पुलिस पर छोड़ी तो पुलिस के आला अधिकारी आज किसानों संगठनों से बातचीत करने के लिए बोर्डर पर गये। सिंघु बार्डर व मुकरबा चौक के बीच स्थित एक रिसोर्ट में उत्तरी रेंज के संयुक्त पुलिस आयुक्त एसएस यादव ने संयुक्त किसान मोर्चा के डॉ. दर्शन पाल, योगेंद्र यादव, बलबीर सिंह राजेवाल जगजीत सिंह आदि के साथ बैठक की। करीब डेढ घंटे तक चली बैठक में दिल्ली पुलिस ने किसान नेताओं को ट्रैक्टर परेड के रूट के बारे में जानकारी मांगी। ऐसे में किसान नेताओं ने उन्हें बताया कि यह परेड बाहरी रिंग रोड पर निकाली जाएगी और यह सिंघु, टीकरी, ढांसा आदि बार्डर आदि से होकर गुजरेगी। वहीं पुलिस की तरफ से कहा गया कि गणतंत्र दिवस के मौके पर सुरक्षा व्यवस्था बनाये रखना होता और परेड के दौरान अव्यवस्था की स्थिती बन सकती है। ऐसे में किसान नेताओं को दिल्ली से बाहर परेड निकालना चाहिए। इसको लेकर किसान संगठन सहमत नहीं हुए और बैठक बेनतीजा ही रहा। इस संबंध में बुधवार को दोबारा बैठक बुलाई गई है। इस मसले को लेकर सोमवार को कुंडली बार्डर पर दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने किसान नेताओं के साथ बैठक की थी। बैठक में शामिल किसान नेता दर्शनपाल ने कहा कि अभी पुलिस कुछ नहीं बोली है लेकिन हमारी ट्रैक्टर रैली 26 जनवरी को निकलेगी। हालाकि किसान नेता शिव कुमार कक्काजी ने कहा कि आउट रिंग रोड पर ट्रैक्टर मार्च के लिए किसान संगठनों को दिल्ली पुलिस की ओर से मनाही हुई है। दिल्ली पुलिस ने केएमपी और केजीपी का विकल्प दिया। ट्रैक्टर मार्च के रूट को लेकर अभी बना गतिरोध हुआ है। बुधवार को केंद्र सरकार से वार्ता के बाद एक बार फिर दिल्ली पुलिस के अधिकारियों से वार्ता होगी।

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