रिश्तों में गांठ लिए किसान संगठनों और सरकार के बीच खुले मन से वार्ता..नतीजा ढ़ाक के ​तीन पात…

मंगरूआ

नयी दिल्ली: विज्ञान भवन में आज फिर लंगर की थाल सजी, लेकिन पिछली वार्ता की तरह लंच ब्रेक के दौरान किसान नेताओं के साथ लंगर में केन्द्रीय मंत्री नहीं दिखे। फिर एक नयी ​तारीख तय हुई और वो तारीख है 19 तारीख। किसानों और सरकार के बीच वार्ता के लिहाज से ये दो बातें ही महत्वपूर्ण लगती है। बाकी न तो सरकार के ​मंत्रियों के ​साथ 9 वें दौर की वार्ता के लिए जाते किसानों को आज की बैठक से उम्मीद थी और न ही सरकार को और न ही विज्ञान भवन की ओर निगाहें जमाये देश के आम लोगों को। फिर ऐसे में सवाल उठता है कि जब कोई नतीजा ही नहीं निकलना है तो बातचीत क्यों?


जवाब ये है कि तीन ​कृषि बिल को वापस लिये जाने के मांग को लेकन पिछले 50 दिन से ज्यादा वक्त से दिल्ली के बोर्डर को घेर कर बैठे किसानों से दिल्ली और देश को मुक्ति दिलाने का क्या रास्ता है? क्योंकि न तो किसान मानने को तैयार है और न ही सरकार। गति​रोध तो बना ही हुआ है और गणतंत्र भी नजदीक आ रहा है। इसलिए न तो किसान ऐसा दिखाना चाहते हैं कि वे गणतंत्र के पर्व में बाधा चाहते हैं और न ही सरकार ऐसा दिखाना चाहती है वे अन्नदाताओं के खिलाफ है। हालांकि हठधर्मिता दोनों तरफ से है और दोनों में ​से कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं है। किसान न तो बोर्डर खाली करने को तैयार हैं और न ही सरकार किसानों की मांग मानने को। आलम ये है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनायी गयी कमिटी के वार्ताकार भी मैदान छोड़ने लगे हैं क्योंकि किसान संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट पर ही सवाल खड़ा दिया है कि हम तो गये ही नहीं थे तो सुप्रीम कोर्ट के पास। हमारी बातचीत तो सरकार के साथ चल रही है। समस्या सरकार ने पैदा की है तो समाधान भी तो सरकार ही करेगी।


अब देखते हैं कि आज वार्ता की टेबल पर बातें क्या हुईं और जब ये वार्ताकार जिन्हें ​की कोई उम्मीद नहीं थी बावजूद इसके बाहर आये तो क्या कहा? केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि सरकार किसानों के आंदोलन पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत करती है। सरकार सुप्रीम कोर्ट की तरफ से गठित कमेटी के सामने अपने विचारों को रखेगी। हम बातचीत के जरिए मुद्दों के समाधान की कोशिश कर रहे हैं। तोमर ने आगे कहा कि हम बातचीत के जरिए मुद्दों के समाधान की कोशिश कर रहे हैं। किसान यूनियन सरकार से बातचीत करना चाहते हैं, सरकार भी उनसे बातचीत करना चाहती है। तोमर ने कहा कि हम समस्या के सकारात्मक समाधान के लिए आशावान हैं। ज़ल्दी ही कुछ बेहतर नतीजा सामने आयेगा, 19 तारीख को हम फिर बात करेंगे। हमने किसान यूनियन से कहा है कि अपने बीच में अनौपचारिक समूह बना लें, जो लोग ठीक तरह से क़ानूनों पर चर्चा कर एक मसौदा बनाकर सरकार को दें। हम उस पर खुले मन से विचार करने के लिए तैयार हैं।
किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि संसद लेकर आई है और ये वहीं खत्म होंगे। कानून वापस लेने पड़ेंगे और एमएसपी पर कानून लाना पड़ेगा।


राहुल गांधी के निशान पर प्रधानमंत्री
कल जल्लीकट्टू का आनंद लेने तमिलनाडु गये राहुल गांधी आज दिल्ली में थे। वे अपनी बहन प्रियंका गांधी को साथ लिए जंतर-मंतर पहुंचे जहां पंजाब के कांग्रेसी सांसद लगभग एक माह से ज्यादा वक्त से कृषि बिल की वापसी के सवाल पर धरना दे रहे हैं। इस दौरान राहुल गांधी ट्रक पर चढ़ गए और नरेंद मोदी के खिलाफ हमेशा की तरह ही मोर्चा खोला। राहुल गांधी ने कहा कि किसानों को खत्म करने के लिए तीन कानून लाए गए हैं। अगर हम इसे अभी नहीं रोकते हैं, तो यह अन्य क्षेत्रों में भी होता रहेगा। नरेंद्र मोदी किसानों का सम्मान नहीं करते हैं। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी हिन्दुस्तान को नहीं समझ रहे हैं, वो सोचते हैं कि किसानों में शक्ति नहीं है और ये 10-15 दिन में चले जाएंगे क्योंकि नरेंद्र मोदी किसान की इज्जत नहीं करते। राहुल ने कहा कि नरेंद्र मोदी हिन्दुस्तान का किसान नहीं डरेगा, नहीं हटेगा और भागना आपको पड़ेगा।

राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि राहुल गांधी के बयान पर और कृत्य पर कांग्रेस पार्टी सिर्फ हंसती है और उनका मजाक उड़ाती है। कांग्रेस ने 2019 के घोषणापत्र में इन कृषि सुधारों का वादा लिखित में किया था, अगर उन्हें याद नहीं है तो घोषणा पत्र उठाकर दोबारा पढ़ लें।

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