घर आजा परदेशी ” कमला हैरिस”… तेरा गांव बुलाये रे…

आलोक रंजन

तिरूवरूर तमिलनाडु: घर आजा परदेशी तेरा गांव बुलाए रे..इस गांव की अनपढ़ मिट्टी, पढ़ नहीं सकती तेरी चिट्ठी.. ये मिट्टी तू आकर चूमे, तो इस धरती का दिल झूमे.. माना तेरे हैं कुछ सपने, पर हम तो हैं तेरे अपने.. भूलने वाले हमको तेरी याद सताए रे..
हर परदेशी का एक देश होता है और हर देशी का एक गांव जहां उसकी जड़ें गहरी जुड़ी हुई होती हैं। जी हां बात हो रही है कमला हैरिस की, जिन्हें अमेरिका के पहले महिला अश्वेत उपराष्ट्रपति होने का गौरव हासिल हुआ है। लेकिन इस गांव के लोग अनपढ़ नहीं हैं। वे चिट्ठी पढ़ सकते हैं और टीवी से चिपके रहकर उस दृश्य को अपनी आंखों में उतार लेना चाहते हैं जब विश्व के सबसे पुराने लोकतंत्र अमेरिका में उपराष्ट्रपति पद की शपथ लेगी गांव की बेटी।


वैसे तो गांव में जश्न उस वक्त ही शुरू हो गया था जब से जो बाइडेन ने कमला को उपराष्ट्रपति के रूप में नामित किया था।
अमेरिका के उपराष्ट्रपति कमला हैरिस का गांव थुलासेंथिरापुरम। तमिलनाडु में चेन्नई से करीब 320 किमी दक्षिण में थुलेन्द्रपुरम गांव हैं। इसी गांव में कमला हैरिस के नाना का जन्म हुआ था। उसके बाद कमला हैरिस की मां का जन्म भी इसी गांव में हुआ।
वैसे तो जबसे खबर आई तभी से गांव वालों के ​खुशी का ठिकाना नहीं था, और आज जब वो घड़ी आई तो गांव वालों की निगाहें सात समंदर पार उस दृश्य पर टिक गई जिसका इंतजार अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों के आने के बाद से ही था। थुलासेंथिरापुरम गांव का मौसम आज बिल्कुल बदल गया है। चारों तरफ जश्न का माहौल है, लोगों के हाथों में कमला हैरिस के पोस्टर दिखाई दे रहे हैं और ऐसा हो भी क्यों न! उनके गांव की एक महिला आज पहली अश्वेत महिला कमला हैरिस ने उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ लिया है।
पैतृक गांव थुलासेंथिरापुरम पूरी तरह जश्न के माहौल में डूब गया है। गांव में आतिशबाजी की जा रही है, मिठाइयां बांटी जा रही हैं और बच्चे कमला का पोस्टर लिए घूम रहे हैं। त्रिची हवाई अड्डे के कर्मचारी और उसी गांव के रहने वाले एक व्यक्ति ने कहा, “हम लोग इतना गर्व महसूस कर रहे हैं मानो इंडिया ने ओलंपिक गोल्ड मेडल जीत लिया हो। किसी भारतीय का अमेरीकी हो जाना आम है लेकिन किसी भारतीय का अमेरिका का उपराष्ट्रपति बनना बहुत बड़ी बात है।” “उन्होंने हमारे गांव को मशहूर कर दिया है।”
वहीं गांव वाले इस खबर को सुनने के बाद से ही उस परदेशी को अपने गांव बुलाने की कवायद में लग गये हैं, जिसने गांव का मान बढ़ाया है, सात समंदर पार जाकर भी गांव को पहचान दिलाई है। स्थानीय ग्राम प्रधान कहते हैं कि, उनकी जीत पूरे गांव के लिए प्रेरणा है। गांव के घर के बाहर रंगोली बनाई गई और लिखा गया ‘बधाई हो कमला हैरिस’, ‘आप हमारे गांव का गर्व हो’, ‘वनक्कम अमेरिका।’ इसके साथ ही गांव के लोगों ने पटाखे जलाए और मिठाइयां बांटी साथ ही कमला हैरिस को बधाई दी। श्री धर्म सस्था मंदिर में कमला हैरिस के लिए प्रार्थना की। मंदिर के बाहर पटाख़े फोड़े गये और चॉकलेट बाँटे गये। ग्रामवासी व स्थानीय मंदिर के पुजारी जो कि गांव में कमला हैरिस के लिए पूजा पाठ कर रहे हैं कहते हैं कि “हम कमला को उनकी चाची के माध्यम से यहां बुलाने की कोशिश कर रहे हैं।” प्रार्थना के आयोजकों में से एक सुधाकर बताते हैं कि जैसे ही गांव को उनकी जीत की खबर मिली लोगों ने जश्न मनाया था। आज उनके उपराष्ट्रपति पद की शपथ लेने के वक्त भी गांव में पूजा का आयोजन किया गया है।
सुधाकर कहते हैं कि, “तमाम कठिनाइयों के बावजूद कमला हैरिस ने यह चुनाव जीता। हमें गर्व है कि वे हमारे गांव से संबंधित हैं, इस जगह से उनका रिश्ता है और हम उम्मीद करते हैं कि भविष्य में कभी तो वे हमारे गाँव आयें। उनकी इस उपलब्धि ने हमारे गांव की कई महिलाओं को बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित किया है।”
महिलाओं में खासा उत्साह दिख रहा है। गांव की महिलायें कहती हैं कि कमला का अमेरिकी उपराष्ट्रपति बनना केवल उनके लिए ही नहीं बल्कि भारत की सभी महिलाओं के लिए भी बड़ी बात है। ग्रामीणों का मानना है कि उनकी प्रार्थनाओं का जवाब उन्हें कमला हैरिस की उत्साहपूर्ण जीत के तौर पर मिला है।

गांव से रहा है नाता
तमिलनाडु में चेन्नई से करीब 320 किमी दक्षिण में थुलेन्द्रपुरम गांव हैंं करीब 100 साल पहले इसी गांव में कमला हैरिस के नाना का जन्म हुआ था। उसके बाद कमला हैरिस की मां श्यामला गोपालन का जन्म भी इसी गांव में हुआ। हैरिस के नाना पी वी गोपालन थुला शेंद्रापुरम गांव से युवावस्था में ही बाहर चले गये थे। उन्होंने ब्रिटिश सरकारी सेवा में नौकरी कर ली थी। जबकी उनकी नानी पैगनांडु गांव से आती हैं। भले ही इनके पूर्वज वर्षों पहले गांव छोड़ चुके हों लेकिन परिवार के सदस्य अभी भी थुलासेंद्रापुरम के मंदिर के साथ अपना संपर्क रखे हुए हैं। श्यामला गोपालन मात्र 19 साल की उम्र में भारत से अमेरिका चली गई थीं। कमला हैरिस की मां भारतीय और पिता जमैका के रहने वाले थे। दोनों पढ़ने के लिए अमेरिका गए थे, वहीं पर दोनों ने लव मैरिज कर ली। ग्रामीण बताते हैं कि कमला हैरिस 5 साल की उम्र में भारत आई थी। उस दौरान वह अपने नाना के साथ चेन्नई के बीच पर घूमी थी।अब 150 घरों के इस गांव में कमला की जीत का जश्न मनाया जा रहा है।  
दिल्ली में रहने वाले कमला हैरिस के मामा गोपालन बालाचंद्रन मामी  डॉ सरला गोपालन भी बहुत खुश हैं। मामी ने कहा कि हमने हमेशा उसे (कमला हैरिस) एक अच्छे बच्चे के रूप में बड़े होते देखा है। उस जो कुछ भी किया वह बहुत अच्छा था और उसने वह हासिल किया जो वह करना चाहती थी।

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