अडाणी,अंबानी के बाद किसान आंदोलन के निशाने पर रामदेव, बाबा ने कहा हठयोग से कैसे बनेगी बात

मंगरूआ

नयी दिल्ली: एक तरफ दिल्ली के विभिन्न प्रवेश द्वारा पर एक माह से ज्यादा वक्त से डटे किसान संगठनों को सरकार ने बातचीत के लिए बुलाया है वहीं कृषि बिल का विरोध कर रहे कुछ किसानों द्वारा शांतिपूर्ण बातचीत की प्रक्रिया से अलग न सिर्फ कानून को हाथ में लेना शुरू कर अराजकता के रास्ते पर कदम बढ़ा दिया है,बल्कि इन आंदोलनकारियों के निशाने पर अडानी,अंबानी के साथ अब पतंजली के उत्पाद भी ​आ गये है।


किसान संगठनों के निशाने पर मोबाईल टावर
पंजाब में अब तक करीब 1500 टेलीकॉम टावरों को नुकसान पहुंचाया जा चुका है। इनमें ज्यादातर रिलायंस जियो के हैं। इससे मोबाइल सेवा पर असर पड़ा है। रिलायंस जियो ने टावरों की सुरक्षा के लिए पंजाब पुलिस से मदद मांगी है। इन सभी ने काम करना बंद कर दिया है। इतना ही नहीं पंजाब में टावरों के साथ तोड़फोड़, बिजली की गड़बड़ी या जनरेटर की चोरी की घटनायें भी सामने आई हैं। इसके साथ ही रिलायंस के पेट्रोल पंप बद कराने की घटनायें भी सामने आई हैं। किसान संगठनों की घोषणा थी कि अब वो जियो सिम से लेकर रिलायंस के सभी सामानों का बहिष्कार करेंगे। उनका कहना है कि इस दौरान अडानी-अंबानी के पेट्रोल पंप का भी बहिष्कार किया जाएगा और वहां से पेट्रोल नहीं खरीदा जाएगा।
कैप्टन अमरिंदर ने चेताया अराजकता बर्दाश्त नहीं
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने राज्य में मोबाइल टावरों के साथ छेड़छाड़ और दूरसंचार सेवाओं को बाधित करने के खिलाफ आज कड़ी चेतावनी दी और पुलिस से ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई करने को कहा। वह पंजाब में अराजकता या किसी निजी या सार्वजनिक संपत्ति के विनाश को सहन करने की अनुमति नहीं देंगे। इस बात की ओर इशारा करते हुए कि उनकी सरकार ने राज्य में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों पर आपत्ति नहीं जताई या रोका। उन्होंने कहा कि संपत्ति को नुकसान और लोगों को असुविधा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अमरिंदर ने किसानों से कहा कि “इस तरह संचार साधनों को नुकसान पहुंचना छात्रों, खासकर बोर्ड परीक्षा की तैयारी करने वाले और कोविड महामारी के कारण घर से काम करने वाले पेशेवरों के लिए नुकसानदायक होगा। यहां तक कि बैंकिंग सेवाएं भी काफी हद तक ऑनलाइन लेनदेन पर निर्भर हैं, जिससे लोगों का सुविधा हो रही है।


आंदोलन कारियों के निशाने पर रामदेव
अंबानी, अडानी के साथ ही किसान संगठनों की नजर बाबा रामदेव के पतंजलि पर टेढ़ी हो गई है। किसान नेता गुरनाम सिंह ने कहा है कि पतंजलि के उत्पादों का भी बहिष्कार किया जाना चाहिए। गुरनाम सिंह ने कहा कि एक तो बाबा रामदेव, अंबानी और अडाणी के सामानों का बहिष्कार किया जाना चाहिए, लेकिन जबरदस्ती किसी की दुकान या पेट्रोल पंप वगैरह नहीं बंद करानी है। दूसरा ये कि जबतक हमारी मांग नहीं मान ली जाती है जबतक हरियाणा में अनिश्चित काल के लिए सारे टोल फ्री रहेंगे।
बाबा रामदेव मध्यस्थता को तैयार
एक तरफ आंदोलन कारी किसानों के निशाने पर बाबा रामदेव की पतंजली के उत्पाद आ गए हैं वहीं योग गुरु बाबा रामदेव ने एक निजी चैनल से बातचीत में कहा है कि वे मध्यस्थता को तैयार हैं। कृषि बिल के खिलाफ आंदोलन कर र​हे किसानों के मुद्दे पर रामदेव ने कहा कि संवाद और सहयोग से ही समस्याओं का हल निकलता है। हठयोग से कुछ नहीं होता है। सरकार को किसानों की मांगों पर विचार करना चाहिए और जो संशोधन किसान चाहते हैं, उसे करना चाहिए। किसानों को भी बीच का रास्ता खोजना चाहिए। कृषि कानूनों को रद्द करने का हठ भी सही नहीं है। ये हठधर्मिता खत्म होनी चाहिए। अभी दोनों तरफ से हठधर्मिता है।

रामदेव ने कहा कि प्रधानमंत्री किसानोंं का अच्छा चाहते हैं, उनकी नीयत किसान की आय दोगुनी करने की है, लेकिन इस कानून से किसानों को अगर आपत्ति है तो उस पर सरकार को अमल करना चाहिए। फिलहाल बीच का रास्ता यही है। रामदेव ने कहा कि तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने पर सरकार तैयार नहीं होगी, इस कानून में कुछ तो किसानों के लिए अच्छा होगा। मध्यस्थता के सवाल पर रामदेव ने कहा कि मैं भी किसान का बेटा हूं। मैं मध्यस्थ की भूमिका निभाने को तैयार हूं।
अंबानी,अडानी से क्या है नाराजगी
प्रदर्शनकारी किसानों में देश के दो दिग्गज उद्योगपतियों- मुकेश अंबानी और गौतम अडाणी के प्रति काफी रोष देखा जा रहा है। इनका मानना है कि इन दोनों उद्योगपतियों की नजर किसानों की जमीनों पर है क्योंकि वो कृषि उद्योग में अपना धंधा तलाश रहे हैं। दूरसंचार टावरों को नुकसान पहुंचाने के पीछे यह कहानी कही जा रही है कि नये कृषि कानूनों से मुकेश अंबानी और गौतम अडाणी जैसे उद्योगपतियों को लाभ होगा। इस आधार पर पंजाब में विभिन्न स्थानों पर रिलायंस जियो के टावरों को नुकसान पहुंचाया गया है जिससे दूरसंचार संपर्क व्यवस्था पर असर पड़ेगा।
वैसे भी जबसे किसान आंदोलन ने तेजी पकड़ा है उसी वक्त से निशाने पर अंबानी—अडाणी की कंपनियां हैं क्योंकि अडानी समूह की कंपनी अडानी एग्री फ्रेश लिमिटेड की ऑफिशियल वेबसाइट में यह जानकारी दी गई है कि वह हिमाचल प्रदेश में ‘स्टेट ऑफ द आर्ट’ तकनीक से सेव की फार्मिंग का काम करा रही है और वहां वर्ल्डक्लास पैकेजिंग ऑपरेशन और स्टोरेज सुविधा भी उपलब्ध करा रही है। ‘फार्म पिक’ ब्रांडनेम और बिजनेस मॉड्यूल से वहां सेव की फार्मिंग, स्टोरेज और विपणन का कार्य कर रही है।


हालांकि अंबानी और अडाणी से जुड़ी कंपनियां किसानों से अनाज नहीं खरीदती हैं। लेकिन तथ्य यही है कि हरियाणा के कैथल में गेंहू स्टोर करने के लिए अडानी का एक साइलोज है। जिसकी स्टोरेज क्षमता 2 लाख टन है। अडानी ने फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के साथ 20 साल का करार किया हुआ है। जिसमें एफसीआई हर साल अडानी को किराया देता है। करार इस ढ़ंग से किया गया है कि एफसीआई, अडानी के साइलोज में 10 किलो गेंहू स्टोर करे या फिर 10 टन, किराया पूरे 2 लाख टन का देना होगा। इतना ही नहीं आम गोदाम की बात करें तो उसके लिए एफसीआई 50 किलो की एक बोरी स्टोर करने के लिए 5.39 रुपये देती है। यानि एक क्विंटल गेहूं के 10.78 रुपये और एक टन के हुए- 107.8 रूपये। इस तरह से सालाना 1 टन गेहूं साधारण गोदाम में रखने का किराया 1293.6 रुपये हुआ। जबकी अडानी के साइलोज में 1 टन गेहूं रखने का किराया 2033.44 रुपये भुगतान किया जाता है। मतलब हरियाणा सरकार ने एक साल में साइलोज के नाम पर 14 करोड़ 79 लाख 68 हज़ार रुपये ज़्यादा खर्च किए। ये सिर्फ एक साइलोज की बात है।अडाणी के देश में फिलहाल 14 बड़े साइलोज हैं जिनमें गेंहू स्टोर किया गया है। सात साइलोज का 20 साल का करार है और बचे हुए 7 साइलोज का करार 30 साल का है। करार के मुताबिक़ गारंटी स्टोरेज का पैसा देना होगा।


हालांकि अंबानी के कंपनी जिओ द्वारा पिछले दिनों 15 रूपये गेंहू खरीद 50 रूपये बेचे जाने की खबरें सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में रही। जबकी तहकीकात पर पता चला कि ये दावा झूठा है।

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