बोले मनोहर लाल…महासम्मेलन में तोड़फोड़ के जिम्मेवार हैं वामपंथी किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ुनी व कांग्रेस

मंगरूआ

करनाल: एक तरफ दिल्ली के बोर्डर पर धरना दे रहे किसान सरकार से कृषि बिल के मसले पर बातचीत कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ वामपंथी पार्टियों के समर्थक किसान नेता और कांग्रेस पार्टी हर कीमत चाहते हैं किसान और सरकार के बीच गतिरोध बना रहे। इतना ही नहीं वो ​किसानों को इस बात के लिए भी तैयार कर रहे हैं कि भले ही हिंसक प्रदर्शन करना पड़े लेकिन किसी भी कीमत पर नरेंद्र मोदी की सरकार को कृषि बिल वापस लेने के लिए बाध्य करना है। आज हरियाणा के करनाल में भाजपा द्वारा आयोजित किसान महाचौपाल के दौरान जिस तरह से इन संगठनों से जुड़े लोगों ने तोड़फोड़ की उससे साफ जाहिर होता ​है कि किसान आंदोलन अहिंसक होने का दावा सिर्फ और सिर्फ छलावा है।


प्रदेश के मुखिया मनोहर लाल ने भी कुछ इसी तरह का आरोप वामपंथी और कांग्रेस पार्टियों पर लगाया है। आज दिन में जब वामपंथी समर्थित किसान संगठन और कांग्रेसी कार्यकर्ता हरियाणा के कैमला गांव में भाजपा द्वारा आयोजित किसान महासम्मेलन में रैली स्थल पर जमकर तोड़फोड़ किया और मुख्यमंत्री को काले झंडे दिखाए तो शाम को बारी प्रदेश के मुखिया मनोहर लाल की ​थी। उन्होंने देर शाम प्रेस कांफ्रेस कर कृषि कानून के खिलाफ चल रहे आंदोलन को कांग्रेस और कम्युनिस्टों से पोषित बताते हुए कहा की किसानों से बातचीत के लिए रैली का आयोजन किया गया था और इसमें बड़ी संख्या में कैमला गांव और उसके आसपास के गांव के किसान जुटे हुए थे। लेकिन कुछ लोगों ने सहमति का उल्लंघन करते हुए नारेबाजी और विरोध किया। इतना ही नहीं उन्होंने तोड़ फोड़ भी की। इसके बाद सुरक्षा कारणों से मेरा हेलिकॉप्‍टर दूसरी जगह उतारना पड़ा।
मनोहर लाल ने कहा कि देश में लोकतंत्र है और सभी को अपनी बातें रखने का पूरा हक है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि ”आंदोलन करने वाले नेताओं से कल बातचीत हो गई थी और फिर सहमति बनी थी कि वे सांकेतिक विरोध करेंगे, लेकिन कोई विरोध नहीं करेंगे। रैली में पांच हजार लोग उपस्थित थे। हमारे देश में एक मजबूत लोकतंत्र है और सभी को बात करने का अधिकार है। हमने किसान नेताओं के बयानों, आंदोलनों को नहीं रोका। आंदोलन में कई तरह की सरकार ने व्यवस्था भी की है। यह अच्छा नहीं है कि लोकतंत्र में कोई किसी की बात को रोके। किसान का यह स्वाभव नहीं हो सकता है। इस तरह की घटना से उसकी बदनामी हुई है।”


मनोहर लाल आज के महासम्मेलन में तोड़फोड़ के लिए वामपंथी किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ुनी को जिम्मेवार ठहराया। उन्होंने कहा कि अगर मुझे इसके लिए किसी को जिम्मेदार ठहराना है, तो गुरनाम सिंह चढ़ृनी (भारतीय किसान यूनियन प्रमुख) का एक वीडियो कल से घूम रहा है। उन्होंने लोगों को उकसाने का काम किया है। इस आंदोलन के पीछे कांग्रेस, कम्युनिस्टों का बड़ा हाथ है। कांग्रेस के बयान उकसाने वाले आ रहे हैं। जो नेता बातचीत में जाते हैं, वे सभी कम्युनिस्ट विचारधारा वाले हैं। अगर ये सभी सोच रहे हैं कि इसके बल पर पैर जमा लेंगे तो इन्हें भूल जाना चाहिए।
विरोध कर रहे इन दलों को डॉ भीम राव अंबेदकर द्वारा किये गये संवैधानिक प्रावधानों की याद दिलाते हुए मनोहर लाल ने कहा कि हरियाणा में किसान महासम्मेलन में 5000 किसान पहुंचे जो कृषि बिल के समर्थन में थे। उनका भी विरोध किया गया। ये सही नहीं है। हमारे राष्ट्र में एक मजबूत लोकतंत्र है जहां सभी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है। हमने इन कथित किसानों और नेताओं के बयानों को कभी नहीं रोका। मुझे नहीं लगता कि लोग डॉ. बीआर अंबेडकर द्वारा दिए गए प्रावधानों के उल्लंघन को बर्दाश्त करेंगे। कांग्रेस ने 1975 में लोकतंत्र को खत्म करने का प्रयास किया था। उस समय लोगों ने उनके घृणित कार्य की पहचान की और उन्हें सत्ता से बाहर कर दिया।


उल्लेखनीय है कि ‘किसान महापंचायत’ में मुख्यमंत्री मनोहर लाल लोगों को केंद्र के तीन कृषि कानूनों के फायदे बताने वाले थे। इस सम्मेलन में बड़ी संख्या में स्थानीय किसान जुटे हुए थे। वामपंथी किसान संगठन और कांग्रेस समर्थित उपद्रवी कार्यक्रम स्थल तक पहुंच गए और ‘किसान महापंचायत कार्यक्रम’ को बाधित किया। उन्होंने मंच को क्षतिग्रस्त कर दिया, कुर्सियां, मेज और गमले तोड़ दिए। किसानों ने अस्थायी हेलीपेड का नियंत्रण भी अपने हाथ में ले लिया जहां मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर उतरना था। फलस्वरूप इन संगठनों द्वारा खड़ी की गई बाधा के कारण कार्यक्रम बाधित हुआ। पुलिस ने गांव में मुख्यमंत्री की यात्रा के मद्देनजर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। पुलिस ने कैमला गांव की ओर किसानों के मार्च को रोकने लिए उन पर पानी की बौछारें कीं और आंसू गैस के गोले छोड़े।

फेसबुक यूजर और पेशे से इंजीनियर गोविंद नारायण सिंह ने करनाल के हिंसा पर बहुत ही महत्वपूर्ण ​पोस्ट किया है। उन्होंने लिखा है करनाल में जो हो हुआ वो भयावह है। यह लोकतंत्र , संविधान को हासिए पर डालने ,देश को अराजकता के हवाले करने की साज़िश है। निश्चित रूप से यह अन्नदाता का काम नहीं हो सकता , निश्चित रूप से यह वो लोग नहीं हो सकते जो इस देश को अपना मानते हो ।विरोध की भी मर्यादा होनी चाहिए ।जब सीता स्वयंवर में राजाओं से धनुष नहीं उठा या द्रोपदी स्वयंवर में मछली की आंख भेदने में असफल रहे तो भी अराजकता का प्रयास हुआ था।हर हारा ,नाकाम व्यक्ति , समूह , कौम यही करती हैं , आप दुनिया पर नजर डालकर देख सकते हैं।इस आंदोलन के सूत्रधार फिलहाल सरकार को बल-प्रयोग की स्थिति तक विवश करने के एजेंडे पर चल रहे हैं ताकि दुनिया में देश की साख को धूमिल किया जा सके।सरकार की नीतियों से असहमति और विरोध बहुत स्वाभाविक है लेकिन विरोध मर्यादा में हो ,देश नकारे गये निराश हताश लोगों समूहों के हाथ बंधक नहीं बनना चाहिए।

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