बड़ी रकम बकाया होने से धान की सरकारी खरीद में विलंब

अमरनाथ झा

पटना: बिहार में धान की खरीद शुरु होने में इस साल काफी देर हो चुकी है, अभी इसके शुरु होने में एक सप्ताह से अधिक लगने की संभावना है। इस बार साधारण धान के खरीद मूल्य में 53 रुपए प्रति क्विंटल की बढोतरी की गई है। इसे 1868 रुपए प्रति क्वींटल निर्धारित किया गया है। पिछले वर्ष धान की कीमत 1815 रुपए प्रति क्विंटल तय की गई थी।
बिहार में धान की सरकारी खरीद शुरू नहीं होने में एक पेंच है। सरकारी खरीद की जिम्मेवार पैक्सों (प्रारंभिक कृषि सहकारी समिति) ने सरकार पर बकाया रकम का भुगतान नहीं होने पर नई खरीद करने में स्वयं को असमर्थ बता रही है। भुगतान नहीं होने का एक बड़ा कारण विधानसभा चुनाव है। अब जाकर सरकार को इस मद में रकम आवंटित करने की सुध आई है। इसके पैक्सों तक पहुंचने के बाद जाकर खरीद शुरु हो सकेगी।


बिहार सरकार ने धान खरीदने के पैक्सों को 1200 करोड़ रुपए जारी कर दिए हैं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि यह रकम पिछले बकाया के भुगतान के लिए जारी किया गया है या फिर अगली खरीद के लिए अग्रिम रकम के रूप में जारी की गई है। राज्य सरकार ने इस वर्ष तीस लाख टन धान खरीदने का लक्ष्य निर्धारित किया है। अगर इतनी खरीद होती है तो उसकी कीमत 5,500 करोड़ रुपए होंगे। सरकार ने इसका 40 प्रतिशत रकम देना मंजूर कर लिया है। लेकिन पैक्सों को अभी केवल 1220 करोड़ रुपए ही दिए जाएंगे।
सरकारी खरीद के लिए किसानों को निबंधन कराना होता है। अभी तक लगभग 51 हजार किसानों ने निबंधन करा लिया है। निबंधन कराने की प्रक्रिया धान खरीद आरंभ होने के बाद भी चलती रहेगी।
बिहार में धान की सरकारी खरीद आम तौर पर 15 नवंबर तक शुरु हो जाती है। यह अभियान 30 मार्च तक चलता है। इस वर्ष चुनाव के कारण इसमें थोड़ी देर हुई है। हालांकि पुरजोर खरीद हर साल दिसंबर के बाद ही शुरु होती है। उस हिसाब से अभी किसानों को अधिक चिंता करने की जरूरत नहीं है। किसानों को असली परेशानी धान की नमी को लेकर होती है। सरकार 17 प्रतिशत तक नमी वाला धान ही खरीदती है। नमी का यह प्रतिशत बिहार के अधिकतर इलाके में फरवरी के पहले नहीं आता। अभी जिन इलाकों में धान की कटनी हो गई है, वहां नमी 20 प्रतिशत से कम नहीं होगी। राज्य सरकार तकरीबन हर साल नमी में छूट की मांग केन्द्र सरकार से करती है, पर जब तक दो प्रतिशत छूट देने का आदेश केंन्द्र से आता है तब तक धान सूख जाता है और धान की नमी मानक से कम हो गई होती है।


सरकार पिछले कुछ वर्षों से 30 लाख टन धान खरीदने का लक्ष्य निर्धारित करती है। पर लाख कोशिश करने के बादजूद 20 लाख टन के आसपास ही खरीद हो पाती है। सन 2017-18 में तो धान की खरीद घटकर महज करीब 12 लाख टन ही हो पाई। पर पिछले वर्ष 20 लाख टन खरीद हो गई। इस वर्ष भी 30 टन धान खरीदने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह भी तय हुआ है कि जो किसान धान बेचना चाहेंगे उन्हें ना नहीं कहा जाएगा अर्थात लक्ष्य से अधिक खरीद भी हो सकती है। साधारण धान की कीमत 1868 रुपए प्रति क्वींटल तय की गई है। ए ग्रेड के धान की खरीद 1888 रुपए प्रति क्वींटल की दर से होगी। खरीद की जिम्मेवारी व्यापार मंडलों और पैक्सों को दी गई है।
किसान सेना के प्रदेश अध्यक्ष सुदामा पांडे ने कहा है कि धान की खेती में बढ़ती लागत को देखते हुए सरकारी खरीद की कीमत में महज 53 रुपए प्रति टन की बढ़ोतरी तो बहुत कम है, पर इतना संतोष जरूर है कि कुछ तो बढ़ोतरी हुई।
पैक्सों का बकाया होने के समाचार कई जिलों से है। सुपौल जिले में भारतीय खाद्य निगम पर करोड़ों रुपए बकाया होने से आठ पैक्सों ने इस साल धान खरीदने से महा कर दिया है। सहरसा जिले में 23 डिफाल्टर पैक्सों के तो खरीद करने की अनुमति ही नहीं दी गई है। अररिया जिले में खाद्य निगम ने पिछले दो साल के बकाया राशि का भुगतान नहीं किया है। इस जिले के 180 पैक्सों की राशि एसएफसी के पास बकाया है।


कैमूर जिले की पैक्स समितियों का 46.77 करोड़ रुपया सरकार पर बकाया है। पैक्स संघ के जिला अध्यक्ष ददन द्विवेदी ने बताया कि जिला सहकारी बैंक पर 34.77 करोड़ और एसएफसी पर 12 करोड़ रुपया बकाया है। औरंगाबाद के पैक्स अध्यक्षों ने बताया कि पहले चावल धान खरीद के साथ ही अन्य खर्च की रकम भी उन्हें मिल जाती थी। पिछले वर्ष के धान की कीमत मिली। अन्य खर्च की राशि एसएफसी से मिलनी है। यह बकाया है। जहानाबाद के किसानों के खलिहान में धान की ढेर रखा हुआ है और वे इसे बेचना भी चाहते हैं। लेकिन सरकारी स्तर पर धान खरीद के लिए अभी तक कार्य योजना ही नहीं बनी है।
असल समस्या धान के परिवहन में हुए खर्च की रकम का बकाया रहना है। केन्द्र सरकार ने इस साल इसकी दर ही तय नहीं किया है। इसमें एक सप्ताह लगने की संभावना है। उसके बाद ही परिवहन भत्ता का भुगतान हो सकता है। अभी राज्य के पैक्सों को 38 रुपए 51 पैसे प्रति क्विंटल की दर से परिवहन भत्ता मिलता है। बीते साल लगभग 20 लाख टन धान की खरीद हुई। इसके परिवहन भत्ता के रूप में 7.70 करोड़ रुपया पैक्सों को मिलना है। यह राशि पुरानी दर पर है। यह रकम केन्द्र सरकार देती है। लेकिन पैक्सों ने पिछले वर्ष ही इसमें सुधार की मांग की है। सरकार ने भी इसकी जरूरत को स्वीकार किया। पर नई दर का निर्धारण नहीं होने से इसका भुगतान नहीं हो सका। इसके अलावा बोरे की कीमत भी पैक्सों को मिलना है।

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