किसान और सरकार के बीच गतिरोध बरकरार, न कानून वापसी पर बनी सहमति,न एमएसपी पर बनी बात

संतोष कुमार सिंह

नयी दिल्ली: दो कदम तुम भी चलो, दो कदम हम भी चलें। लेकिन न तो सरकार दो कदम पीछे हटने को तैयार है और न ही किसान दो कदम आगे बढ़ने को तैयार है। सहमति की ताली बजे तो कैसे उसके लिए दोनों को हाथ बढ़ाना पड़ेगा। कुछ इसी पड़ाव पर आज विज्ञान भवन में किसानों और सरकार के बीच चलने वाली वार्ता खत्म हुई। न तो तीन कानूनों के वापसी के सवाल पर सरकार पीछे हटी और न ही किसान सरकार के इच्छानुसार संशोधन को तैयार हुए।


किसान और सरकार के बैठक में पिछले दौर की वार्ता में जब कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर और किसान संगठनों के प्रतिनिधी बाहर आये थे तो कहा था कि 50 फीसदी सहमती बन गई है। लेकिन आज 4 जनवरी को जब किसान और सरकार के प्रतिनिधि बैठे तो बैठक भी हुई और लंच ब्रेक भी लेकिन सहमती किसी बिंदु पर नहीं बनी। हम यह भी कह सकते हैं कि जहां से चले थे वहीं आकर खड़े हो गए। सरकार पहले से ही कहती रही है कि तीन कृषि कानून वापस नहीं होगा, वहीं किसान संगठनों की मांग रही है कि तीनों कृषि कानून वापस लो। लेकिन आज की बातचीत में सरकार चाहती थी कि किसान संगठन एमएसपी को कानूनी जामा पहनाने के मसले पर अपनी बात रखें। वहीं किसान संगठनों ने कह दिया कि तीन कृषि कानून कैसे वापस लिया जाएगा, उसकी क्या प्रक्रिया होगी इस पर सरकार अपनी बात रखे। बीच में लंच ब्रेक भी हुआ। लंबा चला लेकिन ​आज किसान की थाली में मंत्री जी का हिस्सा नहीं था। उन्हें अपनी थाली अलग ही सजानी पड़ी।


हालांकी जब फिर से बातचीत शुरू हुई तो गतिरोध बना रहा। किसान चाहते थे कानून वापसी प्रक्रिया पर बात हो। लेकिन सरकार तैयार नहीं थी। सरकार एमएसपी पर बात करना चाहती थी। बैठक समाप्त हुआ। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर जब बाहर आये तो उन्होंने कहा कि बातचीत सकारात्मक थी, लेकिन बिल वापसी के सवाल पर वे अड़े रहे। अगली बैठक 8 तारीख को होगी। यह पूछे जाने पर कि किसान कह रहे हैं उन्हें सरकार पर भरोसा नहीं है। कृषि मंत्री ने कहा ​यदि भरोसा नहीं रहती और बातचीत सकारात्मक नहीं होती तो फिर दोनों पक्ष 8 तारीख को अगली बैठक के लिए क्यों तैयार होते। सरकार को कई पक्ष सोचना पड़ता है। सरकार केवल आंदोलन कारी किसानों के प्रति ही नहीं बल्कि देश के सभी किसानों के प्रति प्रतिबद्ध है। विषय सिर्फ दो ही हैं। एक एमएसपी और दूसरा कानून। चर्चा होती है तो कभी आगे भी बढ़ती है तो कभी गतिरोध भी होता है। किसान के प्रति भारत सरकार पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। हम चाहते हैं कि आंदोलनकारी किसान उन विषयों पर चर्चा करें जिन पर उनको आपत्ती है। उन्होंने कहा कि अगली तारीख किसानों के सहमती से ही तय होती है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि चर्चा होती है तो तालियां दोनों तरफ से बजती है।

अब तक आठ दौर की हो चुकी है वार्ता
पहला दौरः 14 अक्टूबर
…क्या हुआः मीटिंग में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की जगह कृषि सचिव आए। किसान संगठनों ने मीटिंग का बायकॉट कर दिया। वो कृषि मंत्री से ही बात करना चाहते थे।

दूसरा दौरः 13 नवंबर
…क्या हुआः कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और रेल मंत्री पीयूष गोयल ने किसान संगठनों के साथ मीटिंग की। 7 घंटे तक बातचीत चली, लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला।

तीसरा दौरः 1 दिसंबर
..क्या हुआः तीन घंटे बात हुई। सरकार ने एक्सपर्ट कमेटी बनाने का सुझाव दिया, लेकिन किसान संगठन तीनों कानून रद्द करने की मांग पर ही अड़े रहे।

चौथा दौरः 3 दिसंबर
.क्या हुआः साढ़े 7 घंटे तक बातचीत चली। सरकार ने वादा किया कि MSP से कोई छेड़छाड़ नहीं होगी। किसानों का कहना था सरकार MSP पर गारंटी देने के साथ-साथ तीनों कानून भी रद्द करे।

5वां दौरः 5 दिसंबर
…क्या हुआः सरकार MSP पर लिखित गारंटी देने को तैयार हुई, लेकिन किसानों ने साफ कहा कि कानून रद्द करने पर सरकार हां या न में जवाब दे।

6वां दौरः 8 दिसंबर
… भारत बंद के दिन ही गृह मंत्री अमित शाह ने बैठक की। अगले दिन सरकार ने 22 पेज का प्रस्ताव दिया, लेकिन किसान संगठनों ने इसे ठुकरा दिया।

7वां दौर: 30 दिसंबर
… नरेंद्र सिंह तोमर और पीयूष गोयल ने किसान संगठनों के 40 प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। दो मुद्दों पर मतभेद कायम, लेकिन दो पर रजामंदी बनी।
8 वां दौर: 4 जनवरी
आज की बैठक में किसान संगठनों ने तीन कृषि कानून वापस लेने की प्रक्रिया बताने को कहा। तो वहीं सरकार और किसान संगठनों ने अगले दौर की वार्ता की सहमति बनी जो 8 जनवरी को होगी।

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