सुविधाएं बढ़ेगी, पर टैक्स भी बढ़ेंगे

अमरनाथ झा

पटना: बिहार में पंचायत चुनाव प्रमंडलवार कराने का प्रस्ताव है। इसके कई फायदे गिनाए जा रहे हैं। राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग जल्द ही इसपर फैसला करने वाला है। इसके अलावा भी इसबार पंचायत चुनाव में कई परिवर्तन दिखेंगे। नए नगर निकायों के गठन, विस्तार और प्रोन्नति की वजह से ग्राम-पंचायतों की संख्या घट जाएगी। साथ ही प्रत्येक सात सौ मतदाता पर मतदान केन्द्र बनाए जाएंगे।


पंचायत चुनाव अप्रैल-मई में होने हैं। अभी मतदाता-सूची का वार्डवार और मतदान-केन्द्रवार विखंडन का काम चल रहा है। इसे लेकर राज्य निर्वाचन आयुक्त दीपक प्रसाद विडियो कांफ्रेंसिग के माध्यम से जिलाधिकारियों को निर्देश दे चुके हैं। प्रमंडलवार चुनावों के बारे में प्रचायती राज विभाग का मानना है कि इससे किसी जिले में लगातार अधिक दिनों तक आदर्श आचार-संहिता लागू नहीं रहेगी। जिससे संबंधित विकास कार्य बाधित नहीं होंगे। हर जिले में कई कई चरणों में मतदान होने से काफी देनों तक आचार संहिता लागू रहता है। सुरक्षा के लिहाज से भी प्रमंडलवार चुनाव कराना अधिक सुविधाजनक होगा।
इसबार पंचायत चुनाव ईवीएम मशीन से कराने की तैयारी है। इसके लिए नए ईवीएम मशीनों की खरीद करनी होगी। लगभग 90 हजार बैलेट यूनिट औऱ 15 हजार कंट्रोल यूनिट की जरूरत होगी। हर बैलेट यूनिट में अलग-अलग पदों के लिए वोट डाले जाएगे। ग्राम पंचायत और ग्राम कचहरी में छह पद होते हैं। सभी छह यूनिट कंट्रोल यूनिट से जुड़ा होगा जो मतदान कर्मी के पास रहेगा। मतदान के बाद हर मशीन से कार्ड निकाल लिया जाएगा जिसमें वोट दर्ज होते हैं।
इसबीच राज्य सरकार ने 111 नए नगर निकायों का गठन कर दिया है। कुछ निकायों का दर्जा बढ़ाकर प्रोन्नत किया गया है। इससे अनेक ग्राम पंचायतों का विलोप हो गया है और कुछ का क्षेत्र घट जाने वाला है। परिसीमन का काम अभी चल रहा है। साथ ही मतदाता-सूची के वार्डवार और मतदान केन्द्र वार विखंडन का काम चल रहा है। इसके लिए राज्य निर्वाचन आयुक्त दीपक प्रसाद ने विडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जिलाधिकारियों को जरूरी निर्देश दे दिया है।
सरकार ने छह नगर परिषदों को प्रोन्नत करके नगर निगम का दर्जा दे दिया है। अब बिहार में 18 नगरनिगम होंगे। पहले 12 नगरनिगम थे। नए नगर निगमों के आसपास के कुछ नगर परिषदों को शामिल किया गया है और कुछ ग्राम पंचायतों के इलाके भी अब नगर निगम में शामिल होंगे। नवगठित नगर निगमों में बेतिया, मोतिहारी, सासाराम, मधुबनी, सुपौल और सीतामढ़ी शामिल हैं।
राज्य की 237 ग्राम पंचायतें पूरीतरह नगर निकायों में शामिल हो गई हैं अर्थात उन पंचायतों का अब विलोप हो जाएगा। कुछ पंचायतों के कुछ इलाके नगर निकाय में शामिल किए गए हैं, ऐसे ग्राम-पंचायतों की संख्या 194 है। इन पंचायतों का नए सिरे से गठन किया जाएगा। अभी राज्य में 8386 ग्राम पंचायतें थी, अब करीब 300 कम हो जाएगी। लेकिन परिसीमन के पहले पक्के तौर पर कुछ नहीं कहा जाएगा क्योंकि जिन पंचायतों का कुछ इलाका नगर निकायों में गया है, उनमें अगर बचे इलाके में चार हजार से अधिक आबादी होगी, तब तो ग्राम-पंचायत का दर्जा बरकरार रहेगा अन्यथा उन्हें दूसरे पंचायत में मिला दिया जाएगा।


बडी संख्या में नगर निकायों के गठन के पीछे यह तर्क है कि बिहार में शहरी आबादी देश के दूसरे राज्यों के मुकाबले काफी कम है। 2011 की जनगणना के अनुसार बिहार की शहरी आबादी करीब 11 प्रतिशत है जबकि राष्ट्रीय औसत 33 प्रतिशत से अधिक है। नए नगर निकायों के गठन के बाद यह आबादी लगभग 20 प्रतिशत हो जाएगी। उल्लेखनीय है कि पहले बिहार में किसी बस्ती की 75 प्रतिशत आबादी की आजीविका खेती के बजाए दूसरे रोजगारों पर निर्भर होने पर उस इलाके को शहरी माना जाता था। इस साल इस मानक में बदलाव कर 50 प्रतिशत के अधिक आबादी के गैर कृषिकार्यों पर निर्भर होने पर शहरी मानने का मानक बनाया गया। इसतरह अनेक नगर-पंचायत और नगर परिषदों के गठन का रास्ता साफ हुआ। साथ ही 40 हजार की आबादी पर नगर पंचायत, 40 हजार से दो लाख की आबादी पर नगर परिषद और दो लाख से अधिक आबादी होने पर नगर निगम के गठन का कायदा है। इसलिए आबादी बढ़ने की वजह से नगर निकायों के उन्नयन का रास्ता साफ हुआ है। नगर निकायों में आने या निकायों का उन्नयन होने से शहरी सुविधाओं में बढ़ोतरी होगी, वहीं मकान टैक्स आदि में बढ़ोतरी होने के भी आसार हैं।
नगर निकायों के नए परिसीमन के बाद पटना जिले में नगर परिषदों की संख्या दस हो जाएगी। नगर पंचायत छह होंगे। नगर निकायों के क्षेत्र विस्तार की वजह से पटना जिले की ही 13 पंचायतों को नए सिरे से गठित करना होगा। पटना में अभी 302 ग्राम पंचायतें हैं, नए परिसीमन के बाद 309 पंचायतें रह जाएगी।

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