भारत माता के वीर सपूत-स्व. डुमर सिंह

कमलेश कुमार सिंह
रोविंग एडिटर,पंचायत खबर

हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के लिए जीवन, परिवार, संबंध और भावनाओं से भी ज्यादा महत्वपूर्ण था हमारे देश की आजादी। इस पूरी लड़ाई में कई व्यक्तित्व उभरे, कई घटनाएं हुई, इस अद्भुत क्रांति में असंख्य लोग शहीद हुए, घायल हुए। अपने सम्मान और गरिमा के लिए हर कोई अपने देश के लिए मौत को गले लगाने का फैसला नहीं कर सकता है! आइये एक ऐसे ही अमर बलिदानी डुमर प्रसाद सिंह के बारे में जानें।


पटना जिला के बख्तिायरपुर का करनौती गांव। इसी गांव में सन् 1887 में स्वर्गीय डुमर प्रसाद सिंह की जन्म हुई थी। पांच बहनों के इकलौते भाई। आप सहज अनुमान लगा सकते हैं कि इनका बचपन कितना लाड़-प्यार में गुजरा होगा। लेकिन युवावस्था में ही देश प्रेम की ऐसी लगन लगी कि आजादी की लड़ाई में कूद पड़े। अंग्रेजी हूकुमत ने पहले सन् 1932 में चार महीने के लिए जेल की सजा दी। लेकिन उनके देश प्रेम का जुनून को कम न कर सकी। वह लगातार आजादी के आंदोलन में बढ-चढ कर हिस्सा लेते रहे। नतीजा सन् 1936 में फिर से 5 महीने जेल की यात्रा करनी पड़ी। इन सबके बीच डुमर सिंह ने पारिवारिक दायित्वों का भी निर्वहन किया। जैसा मेरी दादी डुमर सिंह की बहन ने बताया था, ‘हम पांच बहनों की शादी भईया ने सारण जिले के नौडिहां गांव के आस-पास करवाई। इकलौते भाई होने की वजह से उनका मानना था कि एक ही बार निकलेंगे तो सभी बहनों का कुशलक्षेम पूछना हो जाएगा। इनके तीन पुत्र और दो पुत्रियां का भरा-पूरा परिवार है। सन् 1942 – 43 भारत छोङो आंदोलन के दौरान इस महान स्वतंत्रता सेनानी को 3 वर्ष के लिए जेल की सलाखों में कैद कर दिया गया। जेल में दी गई यातना के कारण लीवर में संक्रमण के चलते 04 दिसंबर 1946 को स्वर्ग सिधार गये।

वर्तमान में आदर्श ग्राम करनौती के महान स्वतंत्रता सेनानी स्व. डुमर सिंह फिर से चर्चा के केंद्र में हैं। दरअसल, उनकी आदमकद प्रतिमा गणेश हाई स्कूल, बख्तियारपुर में स्थापित की जा रही है। यह वही हाई स्कूल है, जहां बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पढ़ाई की थी। नीतीश कुमार ने हाल ही में इस स्कूल का भ्रमण किया था। करनौती के ग्रामिण स्कूल का नाम अमर स्वतंत्रता सेनानी स्व. डुमर सिंह के नाम पर करने की मांग कर रहे है। ग्रामिण व प्रखंड पंचायत समिति सदस्य चंद्र प्रकाश सिंह कहते हैं यह गांव के लिए सम्मान की बात है। उनकी बातों का अन्य ग्रामिण भी समर्थन करते हैं। श्री गणेश उच्च विद्यालय के पूर्व प्रधानाचार्य जगत नारायण सिंह, योगेन्द्र प्रसाद सिंह, रामखेलावन सिंह, किशोर सिंह, पौत्र नवीन सिंह भी सरकार के इस फैसले से बहुत प्रसन्न हैं और कहते हैं कि इस एतिहासिक गांव को सरकार ने महत्व दिया है इसके लिए ग्रामीण आभारी हैं।
डुमर प्रसाद सिंह जी की जीवन गाथा-
ग्राम- करनौती, बख्तियारपुर (पटना)
जन्मतिथि-1887
मृत्युतिथि-04-12-1946
पुत्र- स्व.धर्मनाथ सिंह
स्व.रामचंद्र सिंह
स्व.रामलखन सिंह
पुत्री-राजमणि देवी
हीरामणी देवी
जेल यात्रा-
1932 – 4 महीने के लिए
1936 – 5 महीने के लिए
1942 – 43 भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान – 3 वर्ष के लिए
जेल में दी गई यातना के कारण लीवर में संक्रमण के चलते मृत्यु..
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर पटना के बख्तियारपुर प्रखंड मुख्यालय में 5 महान स्वतंत्रता सेनानियों की आदमकद प्रतिमा स्थापित की जा रही है। आगामी 17 जनवरी को प्रतिमा लोकार्पण कार्यक्रम में राज्यपाल फागू चौहान, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी सहित अन्य ग्रामीण भी उपस्थित रहेंगे।
जिन महान स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमा स्थापित की जा रही है उनका विवरण निम्नवत है-
1/स्वतंत्रता सेनानी स्व कविराज राम लखन सिंह वैद्य जी- इनकी प्रतिमा जिला परिषद डाक बंगला बख्तियारपुर में।

2/स्वतंत्रता सेनानी स्व शीलभद्र याजी जी-इनकी प्रतिमा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बख्तियारपुर में।

3/स्वतंत्रता सेनानी स्व मोगल सिंह जी- प्रतिमा प्रखंड कार्यालय परिसर बख्तियारपुर में।

4/स्वतंत्रता सेनानी स्व नाथुन सिंह यादव जी- प्रतिमा हाट पर बख्तियारपुर
5/स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय डुमर सिंह जी- प्रतिमा श्री गणेश उच्च विद्यालय बख्तियारपुर में।

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