सरकारी चौपाल में समर्थन… किसान चौपाल में विरोध के बीच..बैक चैनल कृषि बिल पर सहमति का फार्मूला तय

मंगरूआ

नयी दिल्ली: ठंड बढ़ते जा रही है। साथ ही किसानों का सड़कों पर संग्राम भी। अब तो देश को अन्न के मामले में आत्मनिर्भर बनाने वाला खुद ही भूखे पेट आंदोलन करने का मन बना चुका है। उसे तीन कृषि कानूनों के वापसी से कम कुछ भी मंजूर नहीं। लेकिन बावजूद इसके सियासत के रूख में कोई नरमी हो ऐसा संकेत नहीं मिलता हालांकि दावा बातचीत के जरिए मुद्दे का हल तलाशने का है। लेकिन आमने-सामने बातचीत होता हुआ नहीं दिख रहा और न ही समाधान का कोई बिंदू।


राजस्थान से किसानों का दिल्ली कूच
सिंघू और टीकरी बॉर्डर पर पिछले 18 दिन से चल रहे प्रदर्शनों में पंजाब और अन्य राज्यों से और किसानों का आना जारी है। इस बीच बड़ी संख्या में किसान राजस्थान से दिल्ली की ओर बढ़ा। दिल्ली जाने वाले हजारों किसान, हरियाणा की रेवाड़ी सीमा पर पहुंच गए, जहां पुलिस ने उन्हें राज्य में प्रवेश करने से रोकने के लिए दिल्ली-जयपुर राजमार्ग के दोनों किनारों पर रोक दिया। हरियाणा पुलिस द्वारा उन्हें रोकने के लिये बैरीकेड लगाए जाने के बाद दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक तरफ धरने के लिये बैठ गए किसान नेता शिव कुमार कक्का ने कहा, ‘सरकारी एजेसियां किसानों को दिल्ली पहुंचने से रोक रही हैं, लेकिन जब तक उनकी मांगे नहीं मान ली जातीं तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा।’ उन्होंने कहा, ‘हमारा रुख स्पष्ट है, हम चाहते हैं कि तीनों कृषि कानूनों को निरस्त किया जाए।
रविशंकर प्रसाद की किसान चौपाल
केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद और बिहार बीजेपी के अध्यक्ष डॉ संजय जायसवाल ने बख्तियारपुर के टेकाविगहा में किसान चौपाल लगाकर किसानों को नए कृषि कानून से जुड़ी बातों की जानकारी दी। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि किसान आंदोलन को टुकड़े-टुकड़े गैंग ने हाईजैक कर लिया है। प्रसाद ने कहा, ‘‘ वे (कृषि कानून का विरोध करने वाले) कह रहे हैं कि जब तक कानून वापस नहीं लिये जाते, तब तक वे अपना आंदोलन वापस नहीं लेंगे। हम कहना चाहेंगे कि नरेंद्र मोदी सरकार किसानों का सम्मान करती है लेकिन हम स्पष्ट करना चाहेंगे कि किसानों के आंदोलन का फायदा उठा रहे ‘टुकड़े टुकड़े गैंग’ के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”


उत्तराखंड के किसानों का समर्थन
40 प्रदर्शनकारी किसान संघों के साथ कृषि बिल को लेकर बातचीत कर रहे कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को आज उत्तराखंड के किसानों का समर्थन कृषि बिल पर मिला। उत्तराखंड के 100 से अधिक किसानों के प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करते हुए केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने विपक्षी दलों पर नए कृषि कानूनों के बारे में दुष्प्रचार करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ‘कुछ समय के लिये परेशानियां हो सकती हैं’, लेकिन लंबे समय में ये किसानों के लिये फायदेमंद साबित होंगे। कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी और उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे भी बैठक में मौजूद थे।
किसान आंदोलन में भी बिखराव
कृषि कानून 2020 की वापसी की मांग को लेकर किसान अभी जिद पर अड़े हैं। अलग-अलग किसान संगठनों के प्रदर्शन के बीच आंदोलन में दरार पड़ती नजर आ रही है। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय संयोजक सरदार वीएम सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि बाकी किसान संगठन सरकार से बातचीत करें या ना करें पर हम बातचीत के लिए तैयार हैं।हमारी मुख्य मांग एमएसपी गारंटी कानून है। अन्य मुद्दों पर सरकार के साथ बातचीत में चर्चा की जाएगी। वहीं भानु गुट ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से बातचीत के बाद अपना धरणा समाप्त कर दिया था और चिल्ला बोर्डर को खोल दिया था। हालांकि ऑल इंडिया किसान संघर्ष कमेटी ने कहा है कि किसान विरोधी सरकार की आंदोलन को बांटने और कमजोर करने की कोशिश का शिकार ना बनें। उनकी मांग कायम है कि 3 कृषि कानून वापस लिए बिना और एमएसपी की गारंटी के ऐलान के बिना सरकार से बातचीत नहीं की जाएगी।
बैक चैनल से हो रही है बातचीत
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह लगातार किसान प्रतिनिधियों के संपर्क में है। सूत्रों की माने तो किसानों और केंद्र के बीच पांचवें दौर की वार्ता असफल हो जाने के बाद भी इन दोनों नेताओं ने किसानों के अलग-अलग गुटों से बातचीत जारी रखी। इस दौरान इन नेताओं ने किसानों को सरकार का पक्ष समझाया और उनकी शंकाओं का निवारण किया। इस प्रयास के परिणाम भी सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है और सूत्र ये दावा कर रहे हैं कि केंद्र सरकार और किसान नेता समझौते के एक फॉर्मूले पर काम कर रहे हैं। इसके मुताबिक किसान नेता तीनों कृषि कानूनों को पूरी तरह खत्म करने की अपनी मांग से पीछे हट सकते हैं। वहीं, केंद्र सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य और एपीएमसी मंडियों को कभी खत्म न किए जाने का लिखित प्रावधान करेगी। कुछ अन्य मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच विचार-विमर्श चल रहा है जिसका शीघ्र समाधान हो सकता है। अगले दो-तीन दिन आंदोलन के लिए बहुत अहम बताए जा रहे हैं।


इन बिंदूओं पर बन सकती है सहमती
केंद्र सरकार ने किसानों को यह आश्वासन दिया है कि वह उनकी सभी प्रमुख मांगों को स्वीकार करेगी। न्यूनतम समर्थन मूल्य और एपीएमसी मंडियों को कभी खत्म न किए जाने का लिखित प्रावधान किया जाएगा। वह बिजली की वर्तमान व्यवस्था को बरकरार रखने का लिखित आश्वासन भी देगी। खुले बाजारों में किसानों से व्यापार करने के लिए उचित नियम-कानून बनाए जाएंगे जिससे दोनों प्रकार की मंडियों में प्रतिस्पर्धा के बीच फसलों की खरीद-बिक्री हो सकेगी। इसके बदले किसानों को तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने और विवादित नेताओं को रिहा करने की मांग को छोड़ना होगा।
सुलह को तैयार हो सकते हैं किसान संगठन
सरकार से जुड़े सूत्रों का दावा है कि किसान नेताओं के बीच भी केंद्र सरकार के प्रस्तावों पर सहमति बनने लगी है। पंजाब से जुड़े दो किसान संगठन, उत्तर प्रदेश से जुड़े दो किसान संगठनों के साथ कुछ अन्य किसान संगठन भी केंद्र सरकार के प्रस्ताव पर सहमती जता रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार ज्यादातर मांगों को पूरा करने के लिए तैयार हो गई है, ऐसे में अब सुलह की राह तैयार की जा सकती है।

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