चाय पर चर्चा बीच जलेबी और लंगर के प्रस्ताव के बावजूद बातचीत रही बेनतीजा..

पंचायत खबर टोली

नयी दिल्ली: कृषि बिलों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसान नेताओं के साथ दिल्ली के विज्ञान भवन में सरकार की लगभग तीन घंटे चली बैठक आखिरकार बेनतीजा रही। चाय भी आफर हुआ और लंगर और जलेबी का न्योता भी मिला लेकिन बात नहीं बनी। क्योंकि सरकार ये कहती रही ​कृषि कानून किसानों के हित में और किसानों का कहना है कि ये बिल किसानों के लिए डेथ वारंट है। इस बीच नरेंद्र तोमर ने कहा कि तीसरे दौर की बातचीत हुई। 3 तारीख को चौथे दौर की बातचीत होती है। सरकार सबसे मिलकर बातचीत करेगी। हम चाहते हैं कि आंदोलन समाप्त हो और वार्ता के लिए आयें, लेकिन ये फैसला किसान यूनियनों को तय करना है।


विज्ञान भवन में आयोजित इस बैठक में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर,वाणिज्य मंत्री सोम प्रकाश और रेल मंत्री पीयूष गोयल मौजूद हैं। सभी आमंत्रित 35 किसान नेता सरकार के साथ राउंड टेबल में बातचीत के लिए बैठे हुए हैं। उम्मीद की जा सकती है कि सरकार के साथ बातचीत के बाद रास्ता निकलेगा और पिछले 6 दिनों से दिल्ली के सभी प्रवेश द्वारों पर जमे हुए हैं और इन सभी मार्गों को बंद कर दिया है।

इस बैठक में शामिल सभी किसान नेताओं को मंत्री समूह व अधिकारियों की तरफ से सरकार की ओर से किसान नेताओं को न्यूनतम समर्थन मूल्य और एपीएमसी ऐक्ट को लेकर विस्तृत प्रजेंटेशन दिया गया। इस प्रजेन्टेशन के जरिए किसानों को यह बताने की कोशिश की गई कि नया कृषि कानून किसानों के हित में हैं। प्रजेन्टेशन देखने के बाद किसान प्रतिनिधियों से उनकी राय जानने का मौका था लेकिन इस बीच हाई टी का समय हो गया था। निमंत्रण मिला तो एक किसान प्रतिनिधी ने कहा आईये बोर्डर पर जलेबी खिलाते हैं। वहां लंगर भी चल रहा है शामिल होईए। खैर टी ब्रेक के किसान प्रतिनिधियों से बारी—बारी से उनकी राय जानी गई। ज्यादातर किसान प्रतिनिधियों ने कहा कि सरकार को इन तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने की बात कही। उन्होंने कहा कि य​ह कानून देश में खेती किसानी के लिए आत्मघाती है। साथ ही एमएसपी को कानूनी रूप से बाध्यकारी बनाने की बातें कही गई।

सरकार ने इस बीच ए​क​ समिति बनाने की बात कही। जिसमें सरकार के नुमाईंदे,किसान प्रतिनि​धी और कृषि विशेषज्ञ शामिल होंगे। य​ह समिति कृषि कानून पर व्यापक विमर्श कर आगे का राह निकालेगी। इस बाबत सरकार ने किसान प्रतिनिधियों 5 नाम मांगे थे। लेकिन सरकार के इस प्रस्ताव को किसान नेताओं ने ठुकरा दिया। उन्होंने कहा कि सरकार समिति बनाना चाहती है, विशेषज्ञों से बातचीत करना चाहती है, तो बनाले। उससे हमें कोई इंकार नहीं है। किसानों का कहना था कि हम खुद विशेषज्ञ हैं और हमारी आशंका है कि नये कृषि कानूनों से एमएसपी की व्यवस्था खत्म हो जाएगी और यह कानून कॉरपोरेट के हित में और किसानों के खिलाफ है। नये कानून के तहत मंडी सिस्टम खत्म हो जाएगी और किसान बर्बाद हो जायेगा। लगे हाथों किसान प्रतिनिधियों ने यह भी साफ कर दिया कि जबतक समिति नतीजे पर नहीं पहुंच जाती,उनकी मांगे नहीं मानी जाएगी उनका प्रदर्शन जारी रहेगा।


क्या कहा किसान नेताओं ने
किसान नेता चंदा सिंह ने कहा कि किसी भी तरह की समिति नहीं बनेगी। सरकार केवल बातचीत करना चाहती है नतीजे पर नहीं पहुंचना चाहती। इस ​बीच किसान नेता शिवकुमार कक्का ने कहा बातचीत सकारात्मक हुई है। छोटे समिति बनाने की बात सरकार ने कहा है, उसमें हमारी कोई आपत्ति नहीं है।
वामपंथी किसान संगठन के हन्नान मौला ने कहा कि सरकार ने पूछा कि कानून कैसे रद्द हो सकता है। तो हमने कहा कि अध्यादेश जारी कर ​इसका कार्यान्यवयन रोका जा सकता है। उसके बाद उस कानून में जो कमियां होंगी उसको दूर किया जाएगा।
हालांकि पंजाब से आये ज्यादातर किसान नेताओं ने तल्ख लहजे में कहा कि परसों बातचीत होगी लेकिन बातचीत बेनतीजा ही रही है। सरकार समिति बनाना चाहती है 11 सदस्यीय जिसमें 5 लोग सरकार के तरफ से होंगे और 6 किसानों के प्रतिनिधी होंगे। इन किसान प्रतिनिधियों का कहना था केवल बातचीत का दिखावा कर रही है सरकार, समस्या का समाधान नहीं चाहती है।

हालांकि किसान प्रतिनिधी सरकार से विज्ञान भवन में बातचीत कर रहे थे लेकिन इस बीच दिल्ली के सभी प्रवेश द्वारों चाहे सिंघु बोर्डर हो,टिकरी बोर्डर हो या यूपी गेट यहां तक की बुराड़ी में बड़ी संख्या में जमे किसानों की निगाहें विज्ञान भवन की तरफ ही लगी रही। कृषि कानून के खिलाफ नारे लगाये जाते रहे लेकिन आशंका बातचीत के बेनतीजा रहने की भी बनी रही।
इस बीच किसान अपने मुद्दों पर लड़ रहे हैं। बार—बार यह कहा भी जा रहा है यह किसानों का आंदोलन है। लेकिन राजनीतिक दल इस मसले पर खुद को किसानों के साथ खड़ा दिखने का हर जुगत रहे हैं। किसान के समर्थन में और मोदी सरकार के खिलाफ लगातार हमले विपक्षी दलों के ​तरफ से किया जा रहा है। यहां तक की शाहिन बाग वाली बिलकिस दादी भी खुद को किसान बताते हुए सिंघु बोर्डर पहुंच गईं। बिलकिस दादी ने कहा- हम किसानों की बेटियां हैं, हम आज किसानों के प्रोटेस्ट का समर्थन करने जाएंगे। हम अपनी आवाज उठाएंगे, सरकार को हमारी बात सुननी चाहिए। इधर भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद और जजपा सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव भी दिल्ली-गाजियाबाद के गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों के प्रोटेस्ट में शामिल हुए।

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