किसानों के प्रदर्शन बीच अमरिंदर की नसीहत… राष्ट्रीय सुरक्षा को है खतरा

पंचायत खबर टोली

नयी दिल्ली:कृषि कानूनों और किसान आंदोलन के पृष्टभूमि के ​बीच पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह आज केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात किया। वहां से निकलकर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने जो बातें कहीं वो काफी अहम है। कैप्टन अमरिंदर ने कहा कि आंदोलन से देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान हो रहा है और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा है। इन बातों के मायने काफी व्यापक हैं और इसी के परिप्रेक्ष्य में किसान आंदोलन को समझे जाने की जरूरत है। इस बीच कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर पर किसानों के आंदोलन के आठवें दिन 40 किसानों नेताओं की सरकार के साथ विज्ञान भवन में बातचीत चल रही है। सरकार की तरफ से कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर अध्यक्षता कर रहे हैं। बैठक में रेल मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री सोम प्रकाश भी मौजूद हैं। इस बैठक से पहले भले ही सरकार के प्रतिनि​धी ये उम्मीद जता रहे हैं कि बातचीत का सकारात्मक परिणाम निकलेगा ​लेकिन किसान संगठनों का रूख देखकर ऐसा लगता है कि बातचीत बेनतीजा रहेगी।


अमित शाह के घर हुई लंबी बैठक
कृषि कानूनों पर गुरुवार को होने वाली चर्चा को लेकर किसान संगठनों व केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों के बीच बैठकों का दौर चलता रहा है। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, रेल मंत्री पीयूष गोयल बुधवार दोपहर गृह मंत्री अमित शाह के घर पर बैठक के लिए गए। दोनों केंद्रीय मंत्रियो ने नए कृषि कानूनों को लेकर आंदोलनरत किसानों की मांग व विरोध के बारे अमित शाह को बताया। वहां से निकलकर विज्ञान भवन में बैठक के लिए पहुंचने के दौरान कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि किसानों से चर्चा का सकारात्मक नतीजा निकलेगा। वहीं वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री सोम प्रकाश ने कहा है कि बातचीत से ऐसा समाधान निकलने की उम्मीद है, जो किसानों और सरकार को भी मंजूर हो। सरकार कह चुकी है कि एमएसपी की व्यवस्था जारी रहेगी और यह बात लिखित में देने को भी राजी है। सोम प्रकाश ने कहा कि किसानों से एक-एक बिंदू पर बात की जाएगी। देशहित में किसानों से खुले दिल से चर्चा की जाएगी।
उधर, गृह मंत्री अमित शाह और पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की मीटिंग अमित शाह के घर पर हुई। उम्मीद की जा रही है कैप्टन अमरिंदर ने शाह को वो सुझाव दिए हैं जिससे गतिरोध खत्म हो।

उल्लेखनीय है कि एक दिसंबर को सरकार ने पंजाब और उत्तर प्रदेश के किसानों से अलग-अलग बात की थी। सरकार के साथ हुई तीसरे दौर की बातचीत में सरकार ने किसानों से कहा था कि उन्हें कृषि बिल में किन बिंदूओं पर आपत्ति है उसका नोट तैयार कर अगली बैठक में आएं। यह बैठक बेनतीजा रही थी। किसान नेता आरोप लगा रहे हैं कि सरकार समाधान की जगह साजिश रच रही है। वह किसानों से अलग-अलग बैठक कर उन्हें बांटना चाहती है। किसानों ने कहा कि सरकार से अब अलग-अलग नहीं, एक साथ बात करेंगे।

किसान नेता

हालांकि पिछले दौर की बैठक में कृषि मंत्री के कहे मुताबिक कृषि बिल पर आपत्तियों को लेकर किसानों ने 10 पेज का डॉक्यूमेंट तैयार किया है। किसान नेताओं से बातचीत में जो बातें निकल कर सामने आई वो ये हैं। ज्यादातर किसान नेता ये कह रहे हैं कि केंद्रीय कृषि कानूनों को तुरंत रद्द किया जाए। केंद्र की कमेटी की पेशकश मंजूर नहीं की जाएगी। एमएसएपी हमेशा लागू रहे। 21 फसलों को इसका फायदा मिले। अभी तक किसानों को गेहूं, धान और कपास पर ही MSP मिलती है। खुदकुशी करने वाले किसानों के परिवारों को केंद्र से आर्थिक मदद मिले।


बंटी हुई है किसान नेताओं की राय
एक तरफ किसान संगठन सरकार पर यह आरोप लगा रहे हैं कि सरकार किसान संगठनों में फूट डालना चाहती है। वहीं किसान संगठन के ज्यादातर नेताओं के सुर अलग—अलग हैं। उत्तर प्रदेश के किसान नेता राकेश टिकैत ने से यह पूछे जाने पर कि आप कानून रद्द करवाना चाहते हैं या उनमें संशोधन… भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि आज बात बनेगी। सभी काम होंगे, आज कानून वापसी होगी और किसान भी अपने घर जाएगा। अभी चलकर सरकार से बात करेंगे। वहीं क्रांतिकारी किसान यूनियन के अध्यक्ष दर्शन पाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि सरकार कानूनों को खत्म करने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाए। उन्होंने कहा कि 5 दिसंबर को देशभर में प्रदर्शन किए जाएंगे। किसान मजदूर संघर्ष समिति, पंजाब के जॉइंट सेक्रेटरी एस एस सुभरन का कहना है कि केंद्र किसानों में फूट डालने की कोशिश कर रहा है। जब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सभी 507 किसान संगठनों के साथ मीटिंग नहीं करते, तब तक हम किसी और मीटिंग में हिस्सा नहीं लेंगे। जबकी बुराड़ी के निरंकारी समागम ग्राउंड में प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि उन्हें सरकार से बातचीत में कोई हल निकलने की उम्मीद नहीं है।
हालांकि किसान संगठनों ने आगे की भी तैयारी कर रखी है। नए कृषि कानूनों को निरस्त करने के लिए केंद्र सरकार को संसद का विशेष सत्र आहूत करना चाहिए और अगर मांगें नहीं मानी गयीं तो राष्ट्रीय राजधानी की और सड़कों को अवरुद्ध किया जाएगा। सारा दारोमदार आज किसान और सरकार के बीच हो रही बातचीत पर निर्भर है। इस बीच भविष्य की आशंकायें भी दस्तक दे रही हैं जैसा कि कैप्टन अमरिंदर ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आवास से निकलने के बाद जताई। निश्चित रूप से ऐसी आशंकाएं सरकार को भी है और आंदोलन स्थल से भी समय—समय पर अलग—अलग सुर उठते रहे हैं।

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