खामोशी ओढे सियासत देख, समझ… तौल रही है सड़क की हलचल

मंगरूआ

नयी दिल्ली:कभी डाॅ लोहिया ने कहा था कि जब सड़के सूनी हो तो संसद आवारा हो जाती है। लेकिन आज सड़के सूनी नहीं है। ठंड से ठिठुरती देश की सड़कें किसान आंदोलन के नारों से गुलजार है। हालांकि संसद मौन है सरकार बोल रही है। मनुहार कर रही है,पुचकार रही है,प्रधानमंत्री से लेकर सत्तासीन दल के मंत्री नेता तक किसानों को समझाने में लगे हैं कि भरी पूरी संसद ने बहुमत से जो फैसला लिया था और जिसे कृषि कानून के रूप में देश के जनता पर लागू किया गया वो किसानों के हित में है। इससे कृषि क्षेत्र में आमूल चूल परिवर्तन आयेगा। नया निवेश होगा,किसान के दिन बहुरेंगे। लेकिन सबको अन्न खिलाने वाला अन्नदाता अड़ गया है। कह रहा है कि या तो ये तीनों कृषि कानून रद्द करो नहीं तो सड़के न सिर्फ गुलजार रहेंगी बल्कि पूरी तरह बंद कर दी जायेंगी और बावजूद इसके यदि मांग नहीं माने तो सबको अन्न मुहैया कराने वाला अन्नदाता खुद ही अन्न त्याग देगा लेकिन भला सरकार अन्नदाताओं की ये नाराजगी कैसे मोल ले सकती है। मनुहार जारी है। हालांकि उन्हें सचेत भी किया जा रहा है कि आपका आंदोलन तो शांतिपूर्ण है। लेकिन आपके आंदोलन पर देश के उन ताकतों की नजर है जो देश को अस्थिर करना चाहते हैं। अब इस बात में कितनी सच्चाई है ये तो सरकार ही बतायेगी। लेकिन सरकार ने खुफिया तंत्र के हवाले से कहा है तो सही ही होगी। बावजूद इसके किसान सड़क पर जमे हुए हैं। वो अपनी बैठक कर रहे हैं और सरकार के मंत्री अपनी। दोनों एक दूसरे से सवाल कर रहे हैं जवाब देने की स्थिती में कोई नहीं दिखता। हालांकि दोनों तरफ से चौपाल सजाने की बात हो रही है। किसानों का कहना है कि उनकी चौपाल तो सड़क पर सज गयी है हालांकि सरकार की चैपाल अभी सजाई जानी है जहां तीन कृषि बिल के फायदे बताये जायेंगे।
क्या कहा प्रधानमंत्री ने
इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद किसानों विशेष रूप से गरीब किसानों को कृषि बिल से क्या फायदा होगा यह बताने सामने आये। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए हमने दीवारें देखी हैं। अब है सभी दीवारें हटाई जा रही हैं। सभी अड़चनें हटाई जा रही हैं। इन रिफॉर्म्स के बाद किसानों को नए बाजार मिलेंगे। इससे उन्हें फायदा होगा। आज भारत के किसानों के पास अपनी फसल मंडियों के साथ ही बाहर भी बेचने का विकल्प है। आज भारत मे मंडियों का आधुनिकीकरण तो हो ही रहा है किसानों को डिजिटल प्लेटफार्म पर फसल बेचने और खरीदने का भी विकल्प दिया है। इन सारे प्रयासों का लक्ष्य यही है कि किसानों की आय बढ़े। देश का किसान समृद्ध हो। जब देश का किसान समृद्ध होगा तो देश भी समृद्ध होगा।

एग्रीकल्चर सेक्टर और उससे जुड़े अन्य सेक्टर जैसे एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर हो, फ़ूड प्रोसेसिंग हो, स्टोरेज हो, कोल्ड चैन हो, इनके बीच हमने दीवारें देखी हैं। अब है सभी दीवारें हटाई जा रही हैं, सभी अड़चनें हटाई जा रही हैं। इन रिफॉर्म्स के बाद किसानों को नए बाजार मिलेंगे, नए विकल्प मिलेंगे, टेक्नोलॉजी का लाभ मिलेगा, देश का कोल्ड स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर आधुनिक होगा। इन सबसे कृषि क्षेत्र में ज्यादा निवेश होगा। इन सबका सबसे ज्यादा फायदा मेरे देश के किसान को होने वाला है।

. अनुभव रहा है कि पहले के समय की नीतियों ने कई क्षेत्रों में अदक्षता को संरक्षण दिया, नए प्रयोग करने से रोका। जबकि आत्मनिर्भर भारत अभियान हर क्षेत्र में दक्षता को बढ़ावा देता है।

कृषि बिल के समर्थन में उठने लगी है आवाजें
अब प्रधानमंत्री ऐसा कह रहे हो सरकार के कृषि मंत्री भला कहां पीछे रहने वाले थे। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि सरकार का मकसद किसानों की माली हालत में सुधार लाना है और इसके लिए चौतरफा प्रयास किए जा रहे हैं। इस दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अहम कदम उठाए गए हैं, जिनका लाभ किसानों को मिलना शुरू भी हो गया है। आज उन्होंने हरियाणा से आए किसानों के उस प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की जो कृषि बिल के समर्थन में है। हरियाणा से 29 किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने इन कानूनों के प्रति अपना समर्थन प्रकट करने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात की और इन्हें निरस्त किए जाने की स्थिति में प्रदर्शन करने की धमकी दी। भारतीय किसान यूनियन मान हरियाणा के प्रदेश नेता गुणी प्रकाश के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने संसद द्वारा सितंबर में पारित किए गए तीन नये कृषि कानूनों पर तोमर को एक समर्थन पत्र सौंपा और उन्होंने सरकार से इन कानूनों को बरकरार रखने की मांग की।
उन्होने कहा कि यदि नये कृषि कानूनों को निरस्त किया जाता है तो हम प्रदर्शन करेंगे हमनें सभी जिलों को एक ज्ञापन दिया है। उन्होंने यह जानना भी चाहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को 2014 तक लागू क्यों नहीं किया, किसानों को इन तीनों कानूनों के जरिए असली आजादी मिलेगी।

उल्लेखनीय है कि हरियाणा से किसानों का यह दूसरा समूह है जिसने तोमर से मुलाकात की और कृषि कानूनों के प्रति अपना समर्थन प्रकट किया पहला समूह मंत्री से सात दिसंबर को मिला।
दुष्यंत चौटाला को है भरोसा जल्द मानी जाएगी मांग
हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि केंद्र और किसानों के बीच बातचीत होगी और फलदायी होगी। मुझे उम्मीद है कि अगले 24 से 48 घंटों में वार्ता का अंतिम दौर होगा और दोनों पक्ष निर्णायक समाधान पर पहुंचेंगे।

उन्होंने कहा किसानों के प्रतिनिधि के रूप में यह मेरा दायित्व है कि मैं उनके अधिकारों को सुरक्षित रखूं। मैंने केंद्रीय मंत्रियों से इस विषय पर चर्चा की। मुझे उम्मीद है कि आपसी सहमति से एक रास्ता मिल जाएगा और गतिरोध का समाधान हो जाएगाण् केंद्र सकारात्मक है। इससे पहले दुष्यंत चौटाला ने केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, पियूष गोयल और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात की।


आंदोलन में टूट के हैं संकेतरक्षा मंत्री से मिला भानु गुट
केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर एवं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात के बाद भारतीय किसान यूनियन भानु के राष्ट्रीय अध्यक्ष भानुप्रताप सिंह ने जिले के सभी पदाधिकारियों को दिल्ली बुलाया है। सभी पदाधिकारियों को रविवार को दिल्ली नोएडा चिल्ला बार्डर पर चल रहे धरना स्थल पर आने को कहा गया है।


सेक्टर14 ए स्थित चिल्ला बार्डर पर पिछले 12 दिन से धरने पर बैठे भारतीय किसान यूनियन भानु गुट के नेताओं ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से उनके आवास पहुंचकर मुलाकात की। उन्हें किसानों की 18 सूत्रीय मांगों संबंधित प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा। जिसमें किसान आयोग का गठन कर सभी फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य एमएसपी तय करने की मांग की गई है। इसपर राजनाथ सिंह ने सभी मांगों को जल्द पूरा करने का आश्वासन दिया है। इस दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर भी मौजूद रहे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की किसानों के साथ डेढ़ घंटे तक बैठक चली। दिल्ली.नोएडा चिल्ला बॉर्डर को खोल दिया गया। सभी बैरिकेडिंग हटा दी गई। चिल्ला बॉर्डर 12 दिनों से बंद था। किसानों ने आज रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात की थी। सहमति बनने के बाद बॉर्डर को खोला गया है।

मांगें नहीं मानी गईं तो भूख हड़ताल शुरू करेंगे

इस बीच किसान नेता गुरनाम सिंह ने बताया कि किसानों की पंजाब से आने वाली कई ट्रॉलियों को सरकार ने रोक लिया है। हम लोग सरकार से अपील करते हैं कि वो किसानों को दिल्ली पहुंचने दें। अगर सरकार 19 दिसंबर से पहले हमारी मांगे नहीं मानती है तो हम गुरु तेग बहादुर के शहादत दिवस से भूख हड़ताल भी शुरू करेंगे।इससे पहले शनिवार को ऐलान के मुताबिक किसानों ने पंजाब और हरियाणा में टोल फ्री कर दिए। टोल कर्मचारियों को लोगों से टैक्स नहीं वसूलने दिया गया। किसानों ने ज्यादातर टोल प्लाजा पर कब्जा किया। उधर जालंधर में किसानों का समर्थन कर रही सिख तालमेल कमेटी ने रिलायंस ज्वेल्स का शोरूम बंद करवा दिया। अंबाला से करीब 15 किमी दूर हिसार हाईवे पर स्थित टोल प्लाजा पर किसानों ने कब्जा कर लिया। टोल कर्मचारियों को आने.जाने वालों से टोल नहीं वसूलने दिया जा रहा। बस्तारा टोल प्लाजा. करनाल.जिंद हाईवे पर पेऑन्ट टोल प्लाजा भी फ्री कर दिया।
किसानों ने पंजाब में भी टोल प्लाजा फ्री कर दिए हैं। हालांकि वहां किसान पहले से आंदोलन कर रहे हैं। इसलिए कई टोल प्लाजा पर 1 अक्टूबर से ही फीस नहीं ली जा रही। पंजाब में नेशनल हाईवे पर 25 टोल हैं। टोल बंद होने से सरकार को हर दिन 3 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है।
शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने कहा है कि केंद्र सरकार किसानों की सुनने की बजाय उनकी आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। जिनके लिए कानून बनाए हैं। वे ही इन्हें नहीं चाहते तो केंद्र क्यों अत्याचार कर रहा है। मैं प्रधानमंत्री से अपील करता हूं कि वे किसानों की सुनें।

दिल्ली.जयपुर हाईवे जाम कल
किसान आज दिल्ली.जयपुर हाईवे जाम करने वाले थे लेकिन ये कल के लिए टल गया। किसानों के प्रदर्शन में शामिल योगेंद्र यादव ने सोशल मीडिया पर यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राजस्थान और हरियाणा के किसान आज कोटपुतली और बहरोड़ में इकट्ठे हो रहे हैं। कल दिल्ली की तरफ बढ़ेंगे।

देश विरोधी घुसे हैं तो इंटेलीजेंस उन्हें पकड़े
किसान आंदोलन को लेकर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, “किसान के कुछ नेताओं ने इस आंदोलन को हाइजैक कर लिया है। नक्सल-माओवादी ताक़तें जो वहां हावी हो गई हैं। ऐसे में किसानों को समझना पड़ेगा कि ये आंदोलन उनके हाथ से निकल कर इन माओवादी और नक्सल लोगों के हाथ में चला गया है।” उन्होंने कहा कि हमने उनकी (किसानों की) पुरानी बातों में से निचोड़ निकालकर जो उनके संदेह नज़र आए उस पर एक बहुत अच्छा प्रपोजल दिया, लेकिन उस पर भी कोई चर्चा करने को तैयार नहीं है। बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि माओवादी और नक्सल उन्हें चर्चा से रोक रहे हैं। किसान आंदोलन में देश विरोधी लोगों के घुसने के आरोपों पर भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि इंटेलीजेंस को उन्हें पकड़ना चाहिए। अगर बैन ऑर्गेनाइजेशंस के लोग हमारे बीच घूम रहे हैं तो उन्हें जेल में डालना चाहिए। हमें ऐसा कोई नहीं मिलाए अगर दिखेगा तो बाहर निकाल देंगे। रिपोर्ट में बताया गया है कि अल्ट्रा-लेफ्ट नेताओं और प्रो-लेफ्ट विंग के चरमपंथी तत्वों ने किसानों के आंदोलन को हाईजैक कर लिया है। जानकारी के मुताबिक इस बात के विश्वसनीय खुफिया इनपुट हैं कि ये तत्व किसानों को हिंसा, आगजनी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए उकसाने की योजना बना रहे हैं।
बहाने तलाश रही है सरकार
अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति ने किसानों के आंदोलन को बदनाम करने के लगातार कदमों की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि असल में सरकार किसानों की मुक्त समस्या तीन खेती के कानून और बिजली बिल 2020 की वापसी को हल नहीं करना चाहती। अपने जिद्दी रवैये को छिपाने के लिए वह इस तरह के कदम उठा रही है। पहले केन्द्र सरकार ने दावा किया कि किसानों का यह आंदोलन राजनीतिक दलों द्वारा प्रोत्साहित है। फिर उसने कहा कि यह विदेशी ताकतों द्वारा प्रोत्साहित है, इसके बाद उसने कहा कि यह पंजाब का आंदोलन है, जिसमें खालिस्तान पक्षधर ताकतें भाग ले रही हैं। इसके बाद कहा कि किसान संगठन वार्ता से बच रहे हैं जबकि हमने सभी वार्ताओं में भाग लिया, किसी वार्ता में जाने से मना नहीं किया और विस्तार से सरकार को अपना पक्ष समझाया और कहा कि वह साफ करे कि वह कानून वापस लेगी या नहीं। सच यह है कि सरकार के पास किसानों से बात करने के लिए कुछ है ही नहीं।

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