
दक्षिण भारत का एक ऐतिहासिक मंदिर और धरोहर ‘चेन्नाकेशव’ जिसे उत्तर भारत के अधिकांश लोग नहीं जानते हैं। कन्नड़ भाषा में चेन्नाकेशव का अर्थ है सुन्दर विष्णु। भगवान विष्णु के इस अनोखे मंदिर का निर्माण बारहवीं शताब्दी (1117ई0) में बेलूर की ‘होयसला’ (hoysala) रियासत के राजा विष्णुवर्धन ने यगाची (yagachi) नदी के किनारे करवाया था। यह बेंगलुरु से 200 किलोमीटर और हासन जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर अवस्थित है। बार-बार किये गये ध्वंस की मरम्मत, पुनर्निर्माण और विस्तार अगले 103 वर्षों तक उनकी तीन पीढ़ियाँ करती रही थीं। इस क्रम में इसका फैलाव लगभग चार एकड़ में हो गया। इस मंदिर का इतिहास ध्वंस और निर्माण के संगम का एक अनूठा अध्याय है।
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यह मंदिर स्थापत्य कला और पत्थरों पर नक्काशी के मामले में अद्वितीय और अद्भुत है। सम्पूर्ण परिसर के ध्वंसावशेषों में रामायण, महाभारत और पुराणों में वर्णित मिथकीय कथाओं को प्रस्तर कलाओं के माध्यम से अभिव्यक्त किया गया है। छतों, स्तंभों, दीवारों, विग्रहों और मूर्तियों पर की गयी महीन कारीगरी देखकर विश्वास करना मुश्किल है कि यह काम बिना मशीनों के, केवल छेनी-हथौड़ी के सहारे किया गया कारनामा है! उन कारीगरों और निर्माण के लिए समर्पित राजाओं के लिए श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कुछ फोटोग्राफ आपसे साझा कर रहा हूँ।
कमश: जारी…
पहली कड़ी यहां पढ़ें…कमश: जारी…
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