बदलकर भी नहीं बदला मेरा गाँव

डाॅ पवन कुमार सिंह दुहाई कोशिका महरानी, बाल बच्चा के जान बकस दे मइया, बाढ़ में दूध चढ़ैबो अरु दुहाई हे कोशिका महरानी, बाल बुतरू के जान बकस दे माय, भादो में दूध चढ़ैबो आरु माघी पूर्णिमा में पाठी देबौ गे माय। बाबा कहा करते थे कि कोसी को पक्का घर नहीं सुहाता। इसके दोनों … Continue reading बदलकर भी नहीं बदला मेरा गाँव