Our Heritage

मेरे व्यवहारिक जीवन की पाठशाला रहा है गांव

डॉ रश्मि सिंह (आईएएस) मेरा गांव भवानीपुर औरंगाबाद जिले में देव प्रखंड में है। देव कई कारणों से प्रसिध्द है। उसमें ऐतिहासिक सूर्य मंदिर तो एक कारण है ही, मेरे बाबा और पिता का भी इस प्रसिध्दि में काफी योगदान रहा है। मैंने अपने बाबा कामता प्रसाद सिंह ‘काम’ को देखा भले नहीं है, लेकिन …

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कच्चे पत्थरों के मन में क्या है!

प्रो सर्वेश सिंह ढेरावीर बाबा के उस अड़भंगी पत्थर पर पहला दिया शीतला चाची ने ही जलाया था। चाची से ही आग पाकर बाबा स्पंदित हुए और फिर उसी के जीवन की बलि पाकर सिद्ध भी बने। पता नहीं यह कैसी उलटबाँसी थी ! तब सोचा न था कि देवता बनाना इतना जोखिम भरा है। …

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मेरा गांव आमी अर्थात अम्बिका स्थान

ब्रज किशोर सिंह बिहार के सारण जिले में मेरा गांव दिघवारा स्टेशन से चार किलोमीटर पश्चिम छपरा-सोनपुर राष्ट्रीय उच्च पथ पर स्थित है। पटना से इसकी दूरी 52 किलोमीटर एवं छपरा से 25 किलोमीटर है। यह गंगा के किनारे अवस्थित है जिसकी धाराएं कभी पास आती है एवं कभी दूर जाती है। आज से 70 …

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दादी के जीवन का आकर्षण नानी के जीवन से गायब दिखा…

डॉ सुधा सिंह दादी की तुलना में नानी कमला देवी को मैंने अधिकतर सबमिसिव भाव में देखा। उनके चार बेटे और बहुओं का परिवार था उसका तनाव बिल्कुल नहीं लेती थीं। घर के अंदर सेवा-टहल और आज्ञापालन के लिए समर्थ बहुएं थीं। वे घर के कमाऊ और आधुनिक मिजाज मुखिया की पत्नी थीं और इसी …

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जखनी गांव के देश का पहला जलग्राम बनने की कथा

उमाशंकर पांडे अक्सर कहा जाता है कि ‘हिम्मते मरदा, मददे खुदा’। लेकिन एक मर्द ही क्यों पूरा का पूरा गांव, और न​ सिर्फ मर्द बल्कि स्त्री पुरूष जब  अपने गांव की तकदीर बदलने में लग जायें तो सिर्फ खुदा ही क्यों, पूरी कायनात उसके सामने नतमस्तक होती है और गांव वालों की खुद के परिश्रम …

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सांसद आदर्श ग्राम योजना के फलॉप होने का गवाह है जीरादेई

महात्मा भाई राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150 वीं वर्षगांठ के अवसर पर मुझे अपने गांव के बारे में कुछ लिखने का मौका मिला है तो मैं अपने को भाग्यशाली मानता हूं। देश के प्रथम राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद की जन्मभूमि होने से इस गांव को स्वाधीनता आंदोलन की गतिविधियों का साक्षी बनने का सौभाग्य मिला है। …

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विद्यापति…घुरी आउ बिस्फी गाम

प्रसून लतांत, वरिष्ठ पत्रकार बिहार में अंतरराष्ट्रीय ख्याति का एक गांव है बिस्फी। इस गांव को लोग महाकवि विद्यापति की जन्मस्थली के रूप में जानते हैं। यह गाव विद्यापति को उनके प्रतिभा के कारण उनके आश्रय दाता राजा ने पुरस्कार के रूप में राजा ने दिया था। पैसे और अन्य कारणों से लोग संपत्ति हासिल …

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धीरे-धीरे ही सही बदल रही है बालुडीह की तस्वीर

गुरुस्वरूप मिश्रा ‘बदल गया है गांव मेरा बदल गयी हैं गलियां भी, अब तो सूखी-सूखी हैं फूलों की ये कलियां भी। चौपालों में सूनापन है, चौराहे पर सन्नाटा है। हस्तशिल्प के पंखे गायब, मिलता अब तो फर्राटा है।’ यह कविता गांव-देहात की बदलती तस्वीर की हकीकत बयां कर रही है। गांव की चर्चा होते ही …

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बदला-बदला सा दिखता है मेरा गांव

आशुतोष कुमार सिंह मां के बाद अगर कोई सबसे सुन्दर शब्द है तो वह है गांव। गांव की चर्चा होते ही रोम-रोम पुलकित हो उठता है। आम, महुआ, जामुन, कटहल, बेर, पीपल एवं नीम के पेड़ों के संग की दोस्ती याद आने लगती है। आंगन में गौरइयों की चहकती आवाज हो अथवा फूदक-फूदक कर चलने …

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शहरों की काॅपी बने गांव,खत्म हो रही है साझी विरासत की थाती

शैलेन्द्र कुमार सिंह मंजिल करीब आते ही एक पांव कट गया. चौड़ी हुई सड़क तो मेरा गांव कट गया. मशहूर शायर मुनव्वर राना की ये लाइनें मेरे गांव अजमतउल्ला गंज पर सटीक बैठती है जो पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली में पड़ता है। इस गांव में पिछले 40 साल में कई …

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