
बेंगलुरू शहर के लगभग मध्य भाग में स्थित लालबाग बॉटेनिकल गार्डन एक चित्ताकर्षक पर्यटन स्थल है। 240 एकड़ में फैले इस उद्यान का निर्माण टीपू सुल्तान के पिता हैदर अली ने किया था और परवर्ती अंग्रेज अफसरों ने इसका संरक्षण और संवर्धन किया। वर्तमान में यह राजकीय उद्यान विभाग की परिसंपत्ति है। बाग में सैकड़ों प्रजाति के दुर्लभ और बेशकीमती देशी – विदेशी पेड़ – पौधों तथा 32 एकड़ के झील में हजारों वन्य जीवों का बसेरा है। सबसे बड़ा आकर्षण 1890 में निर्मित भव्य बहुरंगी शीशमहल है जिसमें गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस के दिन पुष्प प्रदर्शनी लगाई जाती है।
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लालबाग का ये रॉक एक संरक्षित जियोलॉजिकल मॉन्युमेंट है, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण बोर्ड के अनुसार यह “पृथ्वी की सबसे पुरानी चट्टानों में से एक है, जो 3000 मिलियन वर्ष पुरानी है” और जो कभी समुन्दर के अंदर नहीं रहा है।
प्रवेश द्वार के पास पुराने सूखे वृक्षों से निर्मित कष्ठाकृतियां दर्शकों को आकर्षित करती हैं। अपनी गृहवाटिका को सजाने के शौकीन लोगों के लिए सरकारी नर्सरी में हजारों किस्म के पौधे रियायती दर पर उपलब्ध हैं। बेंगलुरू भ्रमण पर आने वाले लोगों के लिए लालबाग बॉटेनिकल गार्डन का अवलोकन बहुत जरूरी है। हम एक बार घूम आए हैं और वापसी से पहले एक बार और जाएंगे कुछ मनपसंद पौधे खरीदकर ले जाने के लिए। अफसोस है कि वापसी हवाई मार्ग से है जिसमें वजन की सीमा है। कभी ट्रेन से जाना हुआ तो मेरी बगिया अमीर हो जाएगी।
(घुमंतू की डायरी की तीसरी कड़ी..क्रमश: जारी)








