टमाटर, प्याज से लदी रेल, चल पड़ी है किसान मेल

मंगरूआ

नयी दिल्ली: चलल रेलगाड़ी रंगरेज तेजधारी,
बोझाए खूब भारी हाहाकार कईले जात बा.
बईसे सब सूबा जहां बात हो अजूबा,
रंगरेज मंसूबा सब लोग के सुहात बा…
…रेलगाड़ी, रेलगाड़ी छुक-छुक, अगला स्टेशन बोले रुक-रुक…।
भले ​ही लॉक डाउन के दौरान रेल के पहिये थम गये। किसान आदोलन ने सड़क घेर रखा है लेकिन किसानों की रेल नहीं रूकी। बढ़ती ही चली जा रही है। जी हां, बात हो रही है किसान रेल की। जिसका ऐलान 2020 के बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने करते हुए कहा था कि देश में पीपीपी मॉडल ने देश में किसान रेल चलाया जाएगा और इसके जरिए किसानों की उपज को सीधे मंडियों में पहुंचाने की व्यवस्था होगी। आज वह सफर उस पड़ाव पर पहुंच गया है जिसें क्रिकेट की भाषा शतक कहते हैं। आज देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को देश की 100वीं किसान रेल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रेल महाराष्ट्र के सांगोला से पश्चिम बंगाल के शालीमार के लिए रवाना हुई। यह ट्रेन गोभी, शिमला मिर्च, पत्ता गोभी, मिर्च और प्याज जैसी सब्जियां तथा अंगूर, संतरा, अनार तथा केले जैसे फल लेकर जा रही है।


क्या कहा प्रधानमंत्री ने
 इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि किसान रेल सेवा देश के किसानों की आमदनी बढ़ाने की दिशा में बहुत बड़ा कदम है। इससे खेती से जुड़ी अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आएगा। उन्होंने कहा कि इससे देश की कोल्ड सप्लाई चेन की ताकत भी बढ़ेगी। हमारे देश में भंडारण की क्षमताओं का अभाव हमेशा से किसान के लिए एक बड़ी चुनौती रही है। हमारी सरकार इन समस्याओं के निदान के लिए करोड़ों का निवेश तो कर ही रही है, किसान रेल जैसी सुविधा भी दे रही है।


छोटे किसानों को होगा फायदा
प्रधानमंत्री ने कहा कि छोटे किसानों को कम खर्च में बड़े से बड़ा बाजार देने के लिए हमारी नीयत भी साफ है। किसान रेल से देश के 80 प्रतिशत से अधिक छोटे और सीमांत किसानों को बहुत बड़ी शक्ति मिली है। इसमें किसानों के लिए कोई न्यूनतम मात्रा तय नहीं है। कोई किसान 50-100 किलो का पार्सल भी भेज सकता है। देश के हर क्षेत्र की खेती को, किसानों को किसान रेल से कनेक्ट किया जा रहा है। कोरोना की चुनौती के बीच भी बीते 4 महीनों में किसान रेल का ये नेटवर्क आज 100 के आंकड़े पर पहुंच चुका है। प्रधानमंत्री ने कहा कि किसान रेल सेवा, देश के किसानों की आमदनी बढ़ाने की दिशा में भी एक बहुत बड़ा कदम है। इससे खेती से जुड़ी अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आएगा।
चलते-फिरते कोल्ड स्टोरेज जैसी है किसान ट्रेन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि किसान ट्रेन एक तरह से चलता-फिरता कोल्ड स्टोरेज भी है। इसमें फल, सब्जी, दूध, मछली और जल्दी खराब होने वाली बाकी चीजें पूरी सुरक्षा के साथ पहुंच रही हैं। पहले यही सामान किसान को सड़क मार्ग के माध्यम से ट्रकों से भेजना पड़ता था, जिसमें कई समस्याएं हैं। इसमें समय बहुत लगता है, किराया ज्यादा लगता है। गांव में उगाने वाला हो या शहर में खाने वाला, दोनों के लिए यह महंगा पड़ता है।
उन्होंने कहा, यह किसान रेल पश्चिम बंगाल के लाखों छोटे किसानों को बहुत फायदा पहुंचाएगी। इस रेल के माध्यम से उन्हें एक बहुत बड़ा विकल्प मिला है और ये विकल्प किसान के साथ ही स्थानीय छोटे-छोटे व्यापारी को भी मिला है। वो किसान से ज्यादा दाम में ज्यादा माल खरीदकर किसान रेल के जरिए दूसरे राज्यों में बेच सकते हैं। कृषि से जुड़े एक्सपर्ट्स और दुनिया भर के अनुभवों और नई टेक्नॉलॉजी का भारतीय कृषि में समावेश किया जा रहा है।


‘किसानों का हित हमारी सरकार की प्राथमिकता’
उन्होंने कहा कि गांवों में रोजगार पैदा करने के लिए, किसानों को बेहतर जीवन देने के नई सुविधाएं, नए समाधान देना बहुत जरूरी है। उपज का भंडारण हो या फसल का उत्पादन, सभी को बेहतर बनाना हमारी प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि किसानों को सुविधाएं देने के लिए रेलवे स्टेशनों के पास पेरिशेबल कारगो सेंटर बनाए जा रहे हैं। स्टोरेज से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर हो या फिर खेती उत्पादों में वैल्यू एडिशन से जुड़े प्रोसेसिंग उद्योग, ये हमारी सरकार की प्राथमिकता हैं।

उल्लेखनीय है कि जिस बजट में किसान रेल का प्रावधान किया गया था,उसी बजट में सरकार ने कृषि उड़ान योजना की भी घोषणा की थी। जैसे रेल से सब्जी आदि की ढुलाई का प्रावधान है, वैसे ही कृषि उड़ान योजना में हवाई जहाज से कृषि उत्पादों को ढोया जाता है।
इस योजना के तहत केंद्र सरकार कृषि उपजों को एक जगह से दूसरे जगह ले जाने में किसानों की मदद करती है। जिस तरह किसान रेल योजना तेजी से चल रही है उसी तरह उत्तर पूर्व के कुछ राज्यों में कृषि उड़ान सेवा शुरू हुई है। इस योजना के अंतर्गत किसानों की फसलों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए विशेष हवाई यात्रा का इंतजाम है।

किसानों और एयरलाइन कंपनियों को सब्सिडी
कृषि उड़ान योजना के अंतर्गत कम से कम आधी सीटें किसानों को रियायती दरों पर दी जाती है। किसानों और एयरलाइन कंपनियों को इसके लिए सब्सिडी दी जाती है। सब्सिडी की राशि को केंद्र और संबंधित राज्य सरकार द्वारा साझा किया जाता है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय और उड्डयन मंत्रालय के सहयोग से शुरू की गई यह सब्सिडी आधारित सेवाएं सभी अंतरराजीय और अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर भी लागू होती है।
इस योजना में किसानों के प्रोडक्ट जैसे कि दूध, मछली, सब्जी, फल, मांस आदि खराब होने वाली चीजों को हवाई जहाज से बाजार तक पहुंचाया जाता है। विमान सेवा मिलने से किसानों को अपनी उपज बेचने का ज्यादा वक्त मिल जाता है जिससे उनकी कमाई बढ़ती है। अभी मंडियों में उपज खराब होने के डर से किसान औने-पौने दामों पर बेचकर भाग जाते हैं। अगर रेल या हवाई सुविधा से उन्हें जल्द बाजार तक पहुंच मिले तो उन्हें बेचने का वक्त भी ज्यादा मिलेगा और उपज तरो-ताजा होने से कमाई भी अच्छी होगी।


इतना ही नहीं पीएम कृषि संपदा योजना के तहत मेगा फूड पार्क्स, कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर, एग्रो प्रोसेसिंग क्लस्टर, ऐसे करीब साढ़े छह हजार प्रोजेक्ट स्वीकृत किए गए हैं। आत्मनिर्भर अभियान पैकेज के तहत माइक्रो फूड प्रोसेसिंग उद्योगों के लिए 10 हजार करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज अगर सरकार देशवासियों की छोटी-छोटी जरूरतें भी पूरी कर पा रही है तो इसका कारण सहभागिता है। कृषि से जुड़ी सभी सुधारों के पीछे किसानों की सहभागिता है।
केंद्र सरकार ने साल 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने का फैसला लिया है। आमदनी बढ़ाने के लिए सरकार की ओर से शुरू किए गए अलग-अलग कदमों में किसान रेल और कृषि उड़ान योजना भी शामिल हैं। इसके लिए सरकार ने किसानों के कल्याण के लिए जिस 16 सूत्रीय कार्ययोजना का ऐलान किया है, किसान रेल और कृषि उड़ान योजना भी उनमें एक है।

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