दिल्ली बोर्डर पर ठंढ़ से ठिठुरते और मरते किसानों पर चुप्पी… शेर,बाघ और तेंदुआ की बढ़ती जनसंख्या पर वोकल दिखे प्रधानमंत्री

मंगरूआ

नयी दिल्ली: साल बीत रहा है। इस गुजरे साल में जिस तरह की पीड़ा से आम जन को गुजरना पड़ा वह किसी से छिपा नहीं है। लेकिन कहते हैं ​न चलने का नाम ही जिंदगी है। ​और अगले वर्ष आपकी जिंदगी नये रफ्तार से दौड़े इसका टिप्स लिये आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर से अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम के जरिए जनता से रूबरू हुए। इस दौरान प्रधानमंत्री ने बीते वर्ष की चुनौतियों की चर्चा तो की ही साथ ही अगले वर्ष की रूपरेखा भी सामने रखी,लेकिन बोर्डर पर एक माह से प्रदर्शन कर ​रहे किसानों को लेकर प्रधानमंत्री ने कुछ नहीं कहा बावजूद इसके कि प्रधानमंत्री तेंदूआ और बाघ के बढ़ती जनसंख्या की चर्चा करना न भूले।
क्या कहा प्रधानमंत्री ने
कोरोना संकट की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस दौरान देश में आशा का एक अद्भुत प्रवाह भी देखा गया है। उन्होंने कहा कि कोरोना संकट के दौरान जनता कर्फ्यू जैसा अभिनव प्रयोग, पूरे विश्व के लिए प्रेरणा बना, जब, ताली-थाली बजाकर देश ने हमारे कोरोना वारियर्स का सम्मान किया था, एकजुटता दिखाई थी, उसे भी, कई लोगों ने याद किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्र ने इस दौरान नई क्षमताओं को भी विकसित किया है। इस क्षमता को हम आत्मनिर्भरता कह सकते हैं।


लोकल फॉर वोकल की अपील
प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें वोकल फॉर लोकल की भावना को बनाए रखना है। दिल्ली एनसीआर और देश के दूसरे शहरों में ठिठुरती ठंड के बीच बेघर पशुओं की देखभाल के लिए कई लोग, बहुत कुछ कर रहे हैं। वे उन पशुओं के खाने-पीने और उनके लिए स्वेटर और बिस्तर तक का इंतजाम करते हैं।
उन्होंने कहा कि हमें वोकल फॉर लोकल की भावना को बनाए रखना है, बचाए रखना है, और बढ़ाते ही रहना है। मैं देश के मैन्यूफैक्चरर्स और इंडस्ट्री लीडर्स से आग्रह करता हूं। देश के लोगों ने मजबूत कदम उठाया है, मजबूत कदम आगे बढ़ाया है। वोकल फॉर लोकल ये आज घर-घर में गूंज रहा है। ऐसे में अब, यह सुनिश्चित करने का समय है, कि, हमारे प्रोडक्ट्स विश्वस्तरीय हों।
कश्मीरी केसर की चर्चा
प्रधानमंत्री ने कहा कि कश्मीरी केसर वैश्विक स्तर पर एक ऐसे मसाले के रूप में प्रसिद्ध है, जिसके कई प्रकार के औषधीय गुण हैं। यह अत्यंत सुगन्धित होता है, इसका रंग गाढ़ा होता है और इसके धागे लंबे व मोटे होते हैं। जो इसकी औषधीय मूल्य को बढ़ाता है। इसी साल मई में, कश्मीरी केसर को जियोग्रफाकिकल इंडीकेशन टैग यानि जीआई टैग दिया गया। इसके जरिए, हम, कश्मीरी केसर को एक ग्लोबली पॉप्युलक ब्रांड बनाना चाहते हैं। जीआई टैग का सर्टिफिकेट मिलने के बाद दुबई के एक सुपर मार्किट में इसे लॉन्च किया गया। अब इसका निर्यात बढ़ने लगेगा। यह आत्मनिर्भर भारत बनाने के हमारे प्रयासों को और मजबूती देगा। केसर के किसानों को इससे विशेष रूप से लाभ होगा। उन्होंने कहा कि कश्मीरी केसर मुख्य रूप से पुलवामा, बडगाम और किश्तवाड़ जैसी जगहों पर उगाया जाता है। उन्होंने कहा कि जुनून और दृढ़निश्चय ऐसी दो चीजें हैं जिनसे लोग हर लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं।


भारतीय वनक्षेत्र में हुआ इजाफा
साथियों, मैंने, तमिलनाडु के कोयंबटूर में एक ह्रदयस्पर्शी प्रयास के बारे में पढ़ा। आपने भी सोशल मीडिया पर इसके विजुअल्स देखे होंगे। हम सबने इंसानों वाली व्हीलचेयर देखी है, लेकिन, कोयंबटूर की एक बेटी गायत्री ने, अपने पिताजी के साथ, एक पीड़ित कुत्ते के लिए व्हीलचेयर बना दी।
आपको इन बातों की भी जानकारी होगी कि पिछले कुछ सालों में, भारत में शेरों की आबादी बढ़ी है, बाघों की संख्या में भी वृद्धि हुई है, साथ ही, भारतीय वनक्षेत्र में भी इजाफा हुआ है। इसकी वजह ये है कि सरकार ही नहीं बल्कि बहुत से लोग, सिविल सोसाइटी, कई संस्थाएं भी, हमारे पेड़-पौधों और वन्यजीवों के संरक्षण में जुटी हुई हैं। देश के अधिकतर राज्यों में, विशेषकर मध्य भारत में, तेंदुओं की संख्या बढ़ी है।
भारत में बने उत्पादों का इस्तेमाल करें
मैंने पहले भी कहा है और फिर से देशवासियों से आग्रह करुंगा। आप एक सूची बनाएं। दिनभर हम जो चीजें काम में लेते हैं, उन सभी चीजों की विवेचना करें और ये देखें कि अनजाने में कौन सी विदेश में बनी चीजों ने हमारे जीवन में प्रवेश कर लिया है। एक प्रकार से हमें बंदी बना लिया है। इनके भारत में बने विकल्पों का पता करें और ये भी तय करें कि आगे से भारत में बने, भारत के लोगों की मेहनत से, पसीने से बने उत्पादों का हम इस्तेमाल करें। आप हर साल न्यू ईयर रिजॉल्यूशन लेते हैं। इस बार एक रिजॉल्यूशन अपने देश के लिए भी जरूर लें।
जिज्ञासा हो तो सीखते हैं कुछ नया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमें सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग न करने का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों के बीच, हमें ये भी सोचना है कि ये कचरा इन बीच पर, इन पहाड़ों पर, पहुंचता कैसे है? आखिर, हम में से ही कोई लोग ये कचरा वहां छोड़कर आते हैं।
सामान्य सी लगने वाली प्रेरणाओं से बहुत बड़े काम भी हो जाते हैं। ऐसे ही एक युवा हैं श्रीमान प्रदीप सांगवान! गुरुग्राम के प्रदीप सांगवान 2016 से हीलिंग हिमालयाज नाम से अभियान चला रहे हैं। हम नए साल पर नए संकल्पों की भी बात कर रहे थे। लेकिन, कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो लगातार कुछ-न-कुछ नया करते रहते हैं, नए-नए संकल्पों को सिद्ध करते रहते हैं।
सीखने की उम्र नहीं होती
टी श्रीनिवासाचार्य स्वामी जी का जीवन इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है, कि, जीवन, तब तक ऊर्जा से भरा रहता है, जब तक जीवन में जिज्ञासा नहीं मरती है, सीखने की चाह नहीं मरती है। इसलिए, हमें कभी ये नहीं सोचना चाहिए कि हम पिछड़ गए, हम चूक गए। जिज्ञासा की ऐसी ही ऊर्जा का एक उदाहरण मुझे पता चला, तमिलनाडु के बुजुर्ग टी श्रीनिवासाचार्य स्वामी जी 92 साल के हैं। वो इस उम्र में भी कंप्यूटर पर अपनी किताब लिख रहे हैं, वो भी, खुद ही टाइप करके।

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