हरियाणा: सरपंच बनने की है ख्वाहिश, सता रहा है डर…कहीं लग न जाये किसान आंदोलन का ग्रहण

अभिषेक राज

चंडीगढ़: हरियाणा में एक तरफ नगर निगम के चुनाव हो रहे हैं वहीं दूसरी ओर पंचायत चुनाव की तैयारियां भी चल रही हैं। यानी तीसरी अर्थात छोटी सरकार के चुनाव आयोजित करने की घोषणा जल्द ही प्रदेश में हो सकती है। इसके संकेत उपमुख्यमंत्री और पंचायती राज मंत्री दुष्यंत चौटाला कई बार दे चुके हैं। वे पंचायती चुनाव जनवरी में कराने के लिए घोषणा कर चुके हैं।उम्मीद की जा रही है कि इस महीने के आखिरी तक इस बाबत घोषणा की जा सकती है क्योंकि फिलहाल नगर निगमों, एक नगर परिषद और 3 नगर पालिकाओं के चुनाव करवाए जा रहे हैं। 30 दिसंबर तक यह कार्यक्रम चलेगा। इसके बाद पंचायत चुनाव को लेकर कार्रवाई शुरू होगी। सरपंच बनने के इच्छुक प्रत्याशियों ने ग्रामिणों से मेल जोल बढ़ाना शुरू कर दिया है,हालांकि उनकी नजर किसानों के आंदोलन पर भी है।


क्या है तैयारी
विगत दिनों उपमुख्यमंत्री और पंचायती राज मंत्री दुष्यंत चौटाला के आवास पर हरियाणा मंत्रीमंडल की बैठक आयोजित की गई थी। इसी बैठक में पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों को लेकर चर्चा की गई और राज्य चुनाव आयोग को पत्र लिखकर चुनाव करवाने के लिए हरी झंडी दी गई। अब चुनाव आयोग मतदाता सूचियों के हिसाब से चुनाव कार्यक्रम तय करने में जुटा है। प्रदेश में 22 जिला परिषदों के अलावा 147 पंचायत समितियों का गठन होना है। जिला परिषद चेयरमैन व ब्लॉक समिति के अध्यक्ष का चुने हुए पार्षद ही करेंगे। इसी तरह से करीब 6200 पंचायतों में सरपंचों और इन गांवो के करीब साढ़े 60 हजार पंच पदों के लिए चुनाव होंगे।
सरपंच पद के लिए 50 फीसदी महिला आरक्षण
पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों में पहली बार महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिये जाने की घोषणा सरकार द्वारा की गई है। यानि इस बार प्रदेश में 6200 ग्राम पंचायतों में से 3100 ग्राम पंचायतों की चौधर महिलाओं के पास होगी। हालांकि पंचों, ब्लाक समितियों व जिला परिषद में पुरानी प्रक्रिया के अनुसार 33 फीसद का आरक्षण महिलाओं को दिया जाएगा। सरपंच पद के लिए आरक्षण का फैसला ड्रा के जरिये होगा। सरकार की ओर से बाकायदा सभी जिला उपायुक्तों को ड्रा निकालने के निर्देश जारी किए जा चुके हैं।
लागू होगा आॅड इवन फार्मूला
महिलाओं को सरपंच पद के चुनाव में आरक्षण देने का फार्मूला ऑड-इवन रहेगा। यानि इस बार पांच वर्षों के लिए ऑड नंबर की ग्राम पंचायतें चिह्नित की जाती हैं तो अगामी पांच वर्षों बाद होने वाले चुनावों में इवन नंबर को तरजीह दी जाएगी। विकास एवं पंचायत विभाग ने सभी ग्राम पंचायतों को यूनिक आईडी नंबर दिया हुआ है। इसी तरह से पिछड़ा वर्ग की ‘बी’ कैटेगरी के लिए भी पंचायतों में 8 प्रतिशत आरक्षण का कानून गठबंधन सरकार बना चुकी है।

सरपंच शाहनाज खान,गरहजन गांव


पिछले बार पढ़ी लिखी पंचायत की हुई थी घोषणा
2016 के पंचायती राज चुनावों में जब प्रदेश के मुखिया मनोहर लाल ने पढ़ी लिखी पंचायत की बात कही थी तो इसको लेकर व्यापक विरोध हुआ था और इसकी वजह से चुनावों में छह महीने देरी से हुई थी। मुख्यमंत्री अपनी घोषणाओं पर अड़े रहे और सभी पंचायत प्रतिनिधियों के लिए योग्यता निर्धारित की गई थी। जिला परिषद, ब्लॉक समिति तथा सरपंच पद के उम्मीदवार के लिए 10 वीं पास होना अनिवार्य किया गया। इसी तरह सामान्य श्रेणी के पंचों के लिए आठवीं पास होना अनिवार्य रखा गया। अनुसूचित जाति व महिला पंचों के लिए 5 वीं पास होना अनिवार्य बनाया गया। इसका सुखद परिणाम भी सामने आया और पढ़ी लिखी पंचायत की व्यवस्था होने के कारण महिलाओं की संख्या भी बढ़ी और कई अच्छे प्रतिनिधि निकल कर सामने आये।

महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिये जाने की घोषणा सरकार द्वारा की गई है। यानि इस बार प्रदेश में 6200 ग्राम पंचायतों में से 3100 ग्राम पंचायतों की चौधर महिलाओं के पास होगी। हालांकि पंचों, ब्लाक समितियों व जिला परिषद में पुरानी प्रक्रिया के अनुसार 33 फीसद का आरक्षण महिलाओं को दिया जाएगा। सरपंच पद के लिए आरक्षण का फैसला ड्रा के जरिये होगा। ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं पंचायती राज संस्थाओं में निर्वाचित होकर न केवल अपने गांव की आवाज को बुलंद करेंगी, बल्कि विकास के भी नए आयाम स्थापित करेंगी।

क्या कहते हैं चुनाव अधिकारी
मौजूदा समय में पंचायती राज संस्थाओं का कार्यकाल फरवरी माह में खत्म होगा। लिहाजा राज्य चुनाव आयोग फरवरी माह से पहले पंचायती राज्य संस्थाओं के चुनावों को करवाने की तैयारियों को अमलीजामा पहनाने की कवायद में जुटा हुआ है। हालांकि राज्य चुनाव आयुक्त डॉ दलीप सिंह का कहना है पंचायती राज्य संस्थाओं का कार्यकाल 24 फरवरी तक है। इससे पहले इनका नये सिरे से गठन होना है। फिलहाल तीन नगर निगमों, एक नगर परिषद और 3 नगर पालिकाओं के चुनाव करवाए जा रहे हैं। 30 सितंबर तक यह कार्यक्रम चलेगा इसके बाद पंचायत चुनाव करवाने की शुरू होने की संभावना है। हालांकि राज्य चुनाव आयुक्त डॉ दलीप सिंह का कहना है कि पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों से पहले इनका नए सिरे गठन किया जाएगा। इसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार की ओर से चिट्ठी लिखने की सूचना जरूरी है लेकिन अभी तक उनके पास चिट्ठी नहीं आई है।


सजने लगी है चौपाल, किसान आंदोलन पर है नजर
कृषि कानून के खिलाफ आंदोलन का केंद्र हरियाणा ही है। पंजाब के किसान हो या हरियाणा के सबका जमावड़ा हरियाणा में ही है। ऐसे में पंचायत चुनाव लड़ने के इच्छुक प्रत्याशियों की नजर किसान के आंदोलन पर तो है ही साथ ही सरकार भी आंदोलन के बाद ही इस दिशा में कदम बढ़ाने की इच्छुक है। क्योंकि कृषि आंदोलन के तुरंत बाद होने वाले पंचायत चुनाव में स्वाभाविक तौर किसानो के पक्ष ​या विरोध में लिये गये निर्णयों का असर होगा। इस बीच रबी के बुवाई का मौसम होने के कारण गांवों में दिन के समय अकसर लोग अपने खेतीबाड़ी के काम में लगे रहते हैं। इस व्यस्तता के चलते दिन में चुनाव लड़ने वाले दावेदार ज्यादातर ग्रामीणों से जनसंपर्क नहीं कर पाते हैं। जब ग्रामीण शाम को घर पहुंचते हैं, तब दावेदार अपना मिलना-जुलना शरू करते हैं। सरपंच का चुनाव लड़ने वाले दावेदारों ने अपनी तैयारियों को ये सोच कर करना शुरू कर दिया है। हालांकि 50 फीसदी महिला आरक्षण की घोषणा के बाद प्रत्याशी यह भी नजर रखे हुए हैं कि उनकी सीट कहीं आरक्षित न हो जाये। यदि महिला के लिए पद आरक्षित होता है, तो अपनी पत्नी या अन्य महिला सदस्य को मैदान में उतार देंगे। यदि सीट सामान्य रहती है, तो फिर वे स्वयं मैदान में उतरेंगे। हालांकि अभी चुनाव को लेकर कोई सूचना नहीं आई है। जल्द सूचना आ सकती है। बावजूद इसके प्रशासनिक स्तर पर काफी समय से तैयारी चल रही हैं।

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