..नाउम्मीदी में उम्मीद की किरण ढ़ूढ़ते अन्नदाता व हुक्मरान के बीच बैठक बेनतीजा.. अगली लंगर..15 जनवरी

संतोष कुमार​ सिंह


नयी दिल्ली: सरकारी वार्ताकार और किसान प्रतिनिधियों में बातचीत कितनी सफल होगी ये तो बातचीत खत्म होने के बाद ही पता चलेगा लेकिन समय से लंगर अंदर चला गया है। यानी लंच ब्रेक होने वाली है यानी बातचीत लगभग दो बजके पैतालिस मिनट पर शुरू हुई और लंगर 3.17 मिनट पर अंदर चला गया है। यहां तक की विज्ञानभवन में किसानों के लिए लंगर लाने वाले मनिंदर जीत सिंह सिरसा भी कहते हैं कि उम्मीद करते हैं कि आज आखिरी लंगर सजेगा। 4 बजे लंच ब्रेक हुआ उसके पहले विज्ञान भवन के बाहर लंगर की थाली सज चुकी थी। ​लंगर चखने वाले किसानों में पंजाब के किसान भी थे और बिहार के किसान भी। ये वो किसान थे जो अंदर बातचीत करने गये किसानों के समर्थन में आए थे। सुर वही था संशोधन नहीं पूरा कृषि कानून वापस लेना होगा। हालाकि कृषि नरेंद्र सिंह तोमर भी बाकी के मंत्रियों के साथ विज्ञान भवन में किसान प्रतिनिधियों से वार्ता के लिए जाते समय फिर से उम्मीद जताई की हमेशा की तरह ही वार्ता सकारात्मक माहौल में होगा और रास्ता निकलेगा।


क्या कहा नरेंद्र तोमर ने
नियत समय पर सभी किसान नेता और केंद्रीय मंत्री पीय़ूष गोयल, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर विज्ञान भवन पहुंच गए। इससे पहले किसान संगठन के साथ बैठक से पहले कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर और रेल मंत्री पीयूष गोयल ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के साथ उनके घर पर मीटिंग की। इस बैठक से पहले कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने सकारात्मक माहौल में बातचीत की उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा की मुझे पूरी आशा है कि किसान यूनियन के लोग सकारात्मक माहौल में चर्चा करेंगे और संभाव्यता हम लोग समाधान तक पहुंच पाएंगे। पहले भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा ‘ हम इस आशा के साथ बैठक में शामिल होने जा रहे हैं कि आज हमारी मांगों का समाधान जरूर होगा।’
स्वाभाविक है आशा और उम्मीद दोनों तरफ से है तभी दोनो पक्ष वार्ता के मेज पर है। लेकिन इस मौके पर अकबर बीरबल संवाद को याद करते हैं
“रोटी जली क्यों?
पान सड़ा क्यों?
घोड़ा अड़ा क्यों?”

बीरबल ने अपने उस जन्म में तपाक से जवाब दिया था-
“जहाँपनाह, फेरा न था।”
ऐसे में जब दिल्ली के सभी बोर्डर पर जमे किसान इस मांग पर अड़े हैं कृषि कानून को रद्द करने से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। दूसरी तरफ सरकार कह रही है ​​की कानून रद्द नहीं किया जा सकता। इसके सिवा सब कुछ मंजूर है।


आज नौवें दौर की वार्ता के दौरान भी किसान इस बात पर अड़े हुए थे कि सरकार कृषि कानून वापस ले,फिर सरकार ने दुहराया नहीं कर सकते। इस बीच सूत्रों के हवाले से यह दावा भी किया गया था की आज सरकार कृषि बिल को होल्ड पर रख सकती है। वहीं सूत्रों का कहना है कि सरकार राज्यों पर भी कृषि कानून को लागू करने का फैसला छोड़ सकती है।
लेकिन अंदर जब किसान प्रतिनिधी बैठे तो फिर वही मांग किसान संगठनों के तरफ से दुहराई गई सरकार कृषि कानून वापस ले। सरकार ने फिर दुहराया संशोधन सुझाएं,वापस लेने का सवाल नही। इस बीच लंगर की थाली सज चुकी थी। वार्ता के दौरान ही विज्ञान भवन से बाहर पंगत भी शुरू हो गई थी किसान प्रतिनिधियों के समर्थन में आए किसानों का जोश हाई था। कृषि बिल के वापसी से कम कुछ भी मंजूर नहीं।
अंदर से भी आवाज आई लंगर तैयार है। शायद लंगर का जायका किसानों और सरकार का मन बदल दे और समाधान की दिशा में कुछ बातचीत आगे बढ़े। इसी उम्मीद के साथ लंच ब्रेक के बाद बातचीत शुरू है। कहते हैं ​न कि नाउम्मीदी में भी उम्मीद ढूढ़ा जा रहा है वही कोशिश दोनों पक्ष कर रहे हैं।
जब लंगर खत्म हुआ तो साफ था दोनों पक्ष एक दूसरे को सुन तो रहे हैं मानने को तैयार नहीं।


नहीं बनी सहमती,फिर नयी तारीख
सरकार के साथ किसानों की 9वें दौर की बातचीत बेनतीजा रही। बातचीत में तल्खी इतनी थी कि बैठक में किसान तख्ती लगाकर बैठे थे। इस पर लिखा था- मरेंगे या जीतेंगे। किसानों ने तल्ख लहजे में सरकार से कहा कि आप हल निकालना नहीं चाहते हैं। अगर ऐसा है तो हमें लिखकर बता दीजिए, हम चले जाएंगे। इस किसानों और सरकार के बीच अगली बैठक 15 जनवरी को होगी।
वार्ता के बाद ऑल इंडिया किसान सभा ने कहा, ‘बैठक का माहौल गर्म था। हमने कह दिया है कि कानून वापसी के अलावा कुछ भी मंजूर नहीं है। हम किसी कोर्ट में नहीं जाएंगे। कानून वापस लो, नहीं तो हमारी लड़ाई चलती रहेगी। 26 जनवरी को हमारी परेड होगी।’
बैठक के दौरान किसान नेता बलबीर राजेवाल ने मंत्रियों से कहा, ‘आप जिद पर अड़े हैं। आप अपने-अपने सेक्रेटरी, जॉइंट सेक्रेटरी को लगा देंगे। नौकरशाह कोई न कोई लॉजिक देते रहेंगे। हमारे पास भी लिस्ट है। फिर भी आपका फैसला है, क्योंकि आप सरकार हैं। लोगों की बात शायद कम लगती है। जिसके पास ताकत है, उसकी बात ज्यादा होती है। इतने दिनों से बार-बार इतनी चर्चा हो रही है। ऐसा लगता है कि इस बात को निपटाने का आपका मन नहीं है। तो वक्त क्यों बर्बाद करना है।’
वहीं वामपंथी नेता हन्नान मोल्लाह ने कहा ​कि हम कानून वापसी के अलावा कुछ और नहीं चाहते। हम कोर्ट नहीं जाएंगे। कानून वापस होने तक हमारी लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि 26 जनवरी को तय कार्यक्रम के मुताबिक हमारी परेड होगी। हालांकी मोल्लाह ने यह भी कहा कि 11 जनवरी को किसान संगठनों की बैठक होगी।
वहीं कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने कहा कि वो पूरे देश को ध्यान में रखकर ही कोई फैसला लेंगे। कानून पूरे देश के लिए है न कि किसी राज्य के लिए। देश के किसान इन कानूनों को खूब समर्थन दे रहे हैं। उन्होंने आह्वाण किया कि किसान नेताओं को देश हित में आंदोलन को वापस लेना चाहिए।
विपक्ष का पक्ष
कांग्रेसी युवराज भले ही इटली में हो लेकिन वहीं से नरेंद्र मोदी की सरकार को किसान विरोधी करार देने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर मोदी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने ट्वीट करके कहा, ‘मोदी सरकार ने अपने पूंजीपति मित्रों के फ़ायदे के लिए देश के अन्नदाता के साथ विश्वासघात किया है। आंदोलन के माध्यम से किसान अपनी बात कह चुके हैं। अन्नदाताओं की आवाज़ उठाना और उनकी मांगों का समर्थन करना हम सब का कर्तव्य है।
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने किसानों के मुद्दे पर ट्वीट में लिखा कि किसान अपनी एमएसपी के लिए आवाज उठाएगा तो उसे छज्जे गिराने की धमकी दी जाएगी। उत्तर प्रदेश में सरकारी गड़बड़ी की वजह से 7.5 लाख से अधिक किसानों को ‘सम्मान निधि’ नहीं मिली लेकिन सरकार ने किसान आंदोलन रोकने के लिए नोडल अधिकारी बनाएं हैं।

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