वाम हुए इंद्रदेव, नहीं रूक रहा किसानों के मौत का सिलसिला, वामपंथी किसान संगठनों को दिख रहा है आपदा में अवसर

मंगरूआ

नयी दिल्ली: घन घमंड नभ गरजत घोरा। किसानों की दशा देख डरपत मन मोरा॥
दामिनि दमक रह नघन माहीं। खल कै प्रीति जथा थिर नाहीं॥

ठंढ़ का मौसम है। एक माह से ज्यादा हो गए किसान दिल्ली के बोर्डर पर जमे हुए हैं। दिनोंदिन सर्द होते शामो सुबह के बीच ये मौसम का मिजाज। बारिश की बूंदे…मानो आसमानी आफत बरस रहा हो। कल ही एक किसान के आत्महत्या की खबर सामने आयी थी। आज तीन किसानों के मौत की खबरे आई हैं। उसपर दावा ये मोदी सरकार किसानों के हित के प्रति संकल्पित है,वहीं दूसरी ओर किसानो के नाम पर अपनी नेतागिरी चमकाने वाले को इस ठंढ़ से नहीं बस इस बात से मतलब है कि यदि सरकार ने कल की बैठक में बात नहीं मानी तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।


एक तरफ सरकार किसानों की परीक्षा ले रही है दूसरी तरफ मौसम। बारिश से खुद को बचाने के लिए कुछ किसान भागकर टेंट के नीचे पहुंचे तो कुछ ट्रॉली के नीचे छिप गए। बारिश के कारण प्रदर्शनकारी किसानों के टेंट में पानी भर गया। बारिश थमने पर किसानों ने अपने टेंट से पानी निकाल दिया है। कड़ाके की ठंड के बीच हुई बारिश ने ठिठुरन और ज्यादा बढ़ा दी है। एक प्रदर्शनकारी किसान ने बताया कि तिरपाल और जो कुछ भी हम लेकर आए हैं, उसी से ठंड और बारिश से अपना बचाव कर रहे हैं। हालांकि ठंड से ठिठुरने के बाद किसानों ने कहा कि , ‘बारिश हमारी फसलों के लिए अच्छी है। जब हम अपने खेतों में काम करते हैं तो हम भीग जाते हैं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम यहां बारिश का सामना कर रहे हैं।’
ऐसा लग रहा है ​मानो इंद्रदेव भी अन्नदाता से वाम खड़े हो गये हैं लेकिन वामपंथी किसान नेताओं को किसान आंदोलन में अवसर दिखाई दे रहा है जैसे की देश के प्रधानमंत्री को कोरोना जैसे आपदा में अवसर दिखाई दे रहा था।


किसानों के मौत से बेपरवाह नेता,लापरवाह सरकार
स्वाभाविक है कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन का 39 वां दिन भी कड़कड़ाती ठंड और कोहरे समेत तमाम तरह की मुसीबतों के बावजूद डटे हुए हैं। लेकिन साथ ही जारी है इन किसानों के मौत का सिलसिला और सुबह से हो रही बारिश उनके आंदोलन पर मुसीबत बनकर बरस रही है। शनिवार को एक किसान ने सरकार से परेशान होकर आत्महत्या कर ली थी। उनकी चिता अभी ठंडी भी नहीं हुई कि रविवार सुबह अलग-अलग प्रदर्शन स्थल पर तीन और किसानों की मौत हो गई।
टीकरी बॉर्डर पर किसान ने तोड़ा दम
आज सुबह टीकरी बॉर्डर पर एक किसान ने दम तोड़ दिया। मृतक किसान की पहचान जगबीर सिंह (60) के रूप में की गई है। माना जा रहा है कि जींद जिले के गांव इट्टल कला के रहने वाले जगबीर की मौत अत्यधिक ठंड के कारण हुई है। हालांकि जांच पूरी होने के बाद ही मौत की असली वजह का पता चलेगा।
अन्य प्रदर्शन​कारियों ने बताया कि वो हफ्ते भर से पिलर नंबर 764 पर डटे हुए थे। रविवार सुबह करीब सात बजे तबीयत अधिक बिगड़ने लगी। इसके बाद साथी प्रदर्शनकारी उन्हें बहादुरगढ़ अस्पताल लेकर गए, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया। जगबीर के दो बच्चे हैं। उनके एक 32 वर्षीय लड़के और 28 वर्षीय लड़की हैं।

सोनीपत में दो किसानों की मौत
सोनीपत के कुंडली बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन में शामिल दो और किसानों की मौत हो गई है। वहीं एक अन्य की हालत गंभीर है। मृतकों की पहचान सोनीपत के गांव गंगाना निवासी कुलबीर सिंह व पंजाब के जिला संगरूर के गांव लिदवा निवासी शमशेर सिंह के रूप में हुई है। वहीं गंगाना के ही युद्धिष्ठर को हृदयघात के चलते पीजीआई रोहतक रेफर किया गया है।


शनिवार को किसान कश्मीर सिंह ने की थी आत्महत्या

दिल्ली बॉर्डर पर चल रहे किसानों के आंदोलन में शनिवार को रामपुर के किसान बाबा कश्मीर सिंह ने आत्महत्या कर लिया था। उन्होंने आत्महत्या करने से पहले गुरुमुखी में लिखे गए अपने सुसाइड नोट में उन्होंने अपने इस कदम का जिम्मेदार सरकार को बताया था। लिखा था कि आखिर हम कब तक यहां सर्दी में बैठे रहेंगे। ये सरकार सुन नहीं रही है और इसलिए अपनी जान देकर जा रहा हूं ताकि कोई हल निकल सके।
इन सब के बावजूद न ​तो सरकार झुकने को तैयार है और न किसान संगठन। सरकार ने बातचीत का सिलसिला तो जारी रखा है लेकिन किसान संगठनों के तीन कृषि कानून वापस लेने के मांग को लेकर असहमती का रूख है। वहीं किसान संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार को अल्टिमेटम दिया है कि यदि तीनों कृषि कानून नहीं वापस लिये गये तो आंदोलन तेज किया जाएगा। किसान संगठनों का कहना है कि अगर 4 जनवरी की बातचीत में परिणाम संतोषजनक ना निकला तो 6 जनवरी को मार्च होगा.

‘शहीद’ घोषित करने की मांग
किसान नेताओं ने कहा कि आंदोलनकारी सीमाओं पर 38 दिनों से बैठे हुए हैं। इस दौरान 50 से अधिक किसानों की शहादत हुई है, लेकिन सरकार उन्हें शहीद घोषित नहीं कर रही और ना ही उसे शहीद मानने को तैयार है। हम शांतिपूर्ण तरीके से अपना धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। हमारे ऊपर कई तरह के आरोप भी लगाए गए, कभी नक्सलवाद तो कभी खालिस्तानी और विदेशी फंडिंग तक का आरोप हमारे ऊपर सरकार ने लगाया।

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