
पटना: बिहार की राजधानी पटना में तीन कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध की आवाजें समय के साथ मुखर होते जा रही हैं। एक तरफ विपक्षी राजनीतिक दल केंद्र सरकार द्वारा पारित तीन कृषि कानूनों के खिलाफ 30 जनवरी को पूरे बिहार में मानव श्रृंखला बनाने की मांग कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ पटना का नागर समाज भी आम जनमानस के बीच अभियान चलाकर किसानों के बीच इस मसले पर अपनी राय मजबूती से रख रहा है। इसके लिए ऑल इंडिया पीपल्स फोरम (एआइपीएफ) के बैनर तले “किसानों के साथ हम पटना के लोग” अभियान चलाया जा रहा है। इस कड़ी में आज फुलवारी शरीफ के पेठिया बाज़ार पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया जहां आज छठे दिन प्रबुद्ध नागरिक समाज के अनेक लोग जुटे और तीन कृषि कानूनों के जनविरोधी परिणामों से लोगों को अवगत कराते हुए किसान आंदोलन के साथ एकजुट होने का आह्वान किया।
सभा को संबोधित करते हुए भाकपा-माले के फुलवारी शरीफ विधायक गोपाल रविदास ने कहा कि मोदी सरकार आम-अवाम की थाली से दाना-पानी छीनकर अंबानी-अडानी जैसे पूंजीपतियों के लिए देश में कंपनी राज स्थापित करना चाहती है। केंद्र सरकार द्वारा पारित तीन कृषि कानूनों को असंवैधानिक बताते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि देश से लोकतंत्र खत्म कर लोगों को दाने-दाने का मोहताज बनाने की तैयारी है जिसके खिलाफ किसान आज सड़कों पर आंदोलन कर रहे हैं। आम जन से किसान आंदोलन का समर्थन करने की अपील करते हुए माले विधायक ने कहा कि आने वाले विधानसभा सत्र में भाकपा-माले महागठबंधन की अन्य पार्टियों के साथ मिलकर नीतीश सरकार पर तीन कृषि कानूनों के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने की पुरजोर मांग उठाएगी।
ए एन सिन्हा इंस्टीट्यूट के पूर्व निदेशक , अर्थशास्त्री प्रो. डी.एम. दिवाकर ने तीन कृषि कानून पर अपनी बात विस्तार से रखा। प्रो दिवाकर ने कहा कि पूंजीपतियों के पक्ष में बनाए गए ये कानून जिस तरह से संसद से पारित किए गए वह जम्हूरियत के खिलाफ है। किसान सिर्फ खेती-किसानी बचाने की नहीं, बल्कि जम्हूरियत बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं।
“फिलहाल” पत्रिका की संपादक प्रीति सिन्हा ने इस मौके पर कहा कि इन तीन कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब से शुरू हुआ आंदोलन आज पूरे देश का आंदोलन बन चुका है। उन्होंने आगाह किया कि यदि ये कानून वापस नहीं लिये गये तो धीरे-धीरे जनवितरण प्रणाली की व्यवस्था खत्म हो जाएगी और आम-अवाम की थाली से भोजन छिन जाएगा। लिहाजा इनके खिलाफ हमारा-आपका एकजुट होना ज़रूरी है।
इस दौरान युवा कवि अंचित ने हिंदी के प्रसिद्ध कवि केदारनाथ सिंह की कविता के साथ स्वरचित कविता ‘किसान आंदोलन के साथ’ का पाठ करते हुए आंदोलन रत किसानों के साथ एकजुटता प्रदर्शित की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए युवा पत्रकार मो. इमरान ने किसान आंदोलन को ऐतिहासिक बताते हुए इस दौरान उठाए जा रहे सवालों को देश की आम अवाम के भोजन के अधिकार से जोड़ते हुए इसे जम्हूरियत की लड़ाई बताया और इसके पक्ष में खड़े होने की अपील की।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए इस नागरिक अभियान के संयोजक ग़ालिब ने मोदी सरकार पर सीधा हमला करते हुए कहा कि दो महीनों से भीषण ठंड में किसान सड़कों पर हैं और 150 से ज़्यादा किसानों की जान जा चुकी है। यह मौत नहीं, मोदी सरकार द्वारा की गई सांस्थानिक हत्या है। लिहाजा आम जनमानस को इस आंदोलन से जोड़ना हम सबकी ऐतिहासिक जिम्मेदारी है। यह आंदोलन सिर्फ किसानों का नहीं बल्कि पूरे समाज का है क्योंकि इसके जद में सिर्फ किसान नहीं बल्कि पूरा समाज आयेगा।
उल्लेखनीय है कि “किसानों के साथ हम पटना के लोग” नामक इस नागरिक अभियान का यह पांचवा दिन था जो पटना के अलग अलग इलाकों में गणतंत्र दिवस (26 जनवरी)तक चलेगा।
अभियान के छठे दिन 25 जनवरी को दोपहर 1 बजे से यह कार्यक्रम दानापुर रेलवे स्टेशन के दक्षिणी भाग पर आयोजित किया जाएगा।



