95 फीसदी को कामचलाऊ व 5 फीसदी को उत्कृष्ट शिक्षा देकर राष्ट्र निर्माण का सपना देखना बेमानी: मनीष सिसोदिया

संतोष कुमार सिंह

पूर्व सांसद व साहित्यकार शंकर दयाल सिंह की 83 वीं जयंती के उपलक्ष्य में हुआ शंकर स्मृती प्रतिष्ठान द्वारा वेबिनार का आयोजन..देश विदेश से जुड़े वक्ता,श्रोता।

नयी दिल्ली: रविवार शाम पूर्व सांसद व साहित्यकार डॉ शंकर दयाल सिंह की 83 वें जयंती के उपलक्ष्य में एक वेबिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन दिल्ली सरकार में पदस्थापित वरिष्ठ आईएएस अधिकारी व डॉ शंकर दयाल सिंह की पुत्री डॉ रश्मि सिंह ने किया। इस मौके पर मुख्य अतिथी व मुख्य वक्ता के रूप में कार्यक्रम में शिरकत करते हुए दिल्ली के उपमुख्यमंत्री व​ शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने ‘डॉ शंकरदयाल सिंह की साहित्य साधना’ पुस्तक का अनावरण भी किया जिसे औरंगाबाद के देवेश पांडे ने लिखा है।

उन्होंने एक पत्रकार के रूप में डॉ शंकर दयाल सिंह के साथ हुई अपनी मुलाकातों का अनुभवों का साझा करते हुए कहा कि मुझे खुशी है कि आज डॉ रश्मि सिंह जी ने मुख्य अतिथी व मुख्य वक्ता दोनों ही जिम्मेवारी मुझे दी है। उन्होनें डॉ शंकर दयाल सिंह के साथ हुई मुलाकातों के दौरान प्राप्त अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि उनसे मेरी मुलाकात राजभाषा समिती के कार्यक्रम में हुई थी। एक ऐसा व्यक्ति जो राजनीति में भी हस्ती है, साहित्य में भी हस्ती है। स्वाभाविक है एक नौसिखिया पत्रकार के लिए उनसे मुलाकात उसकी स्मृति में, जेहन में अभी भी बना हुआ है। वे विराम के साथ बात करते थे, ठहराव के साथ बात करते थे, बातचीत में सहजता थी। वो खुद पत्रकार,साहित्य​कार व राजनेता रहे। वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उस आपात काल के दौर में, ऐसे वक्त में जब चौकरी धमाल मचाये हुए थी, कांग्रेस में रहके उनकी कमियों को उजागर करना बहुत कठिन समय में किया गया काम था। मेरे जैसे लोगों के लिए उनका यह कार्य काफी साहस की बात है।
शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि आज मुझे शिक्षा पर बात करने को कहा गया है। शिक्षा पर कोई भी बात करें तो ऐसे मौके पर डॉ शंकर दयाल सिंह जिनको याद करने के लिए हम यहां एकत्रित हुए उन्हीं के संदर्भ में अपनी बात शुरू करता हूं। यदि शिक्षा नहीं होती, स्कूल नहीं होता, उस दौर में स्कूल में अच्छी पढ़ाई नहीं होती तो एक प्रबुद्ध परिवार का बालक हमें अच्छे साहित्यकार, अच्छा नेता कैसे मिला होता। साथ ही उपमुख्यमंत्री ने इंडियन एक्सप्रेस के उस रिपोर्ट की चर्चा की जिसमें यह पड़ताल की गई है वो बच्चे कहां है जिन्होंने पिछले 20 सालों में स्कूली शिक्षा में टॉप किया। मनीष ने कहा कि आज उनमें से ज्यादातर लोग विदेशों में है। प्रतिभा के पलायन के सवाल पर चर्चा करते हुए जब ये बच्चे टॉप करते हैं तो हम उस अवसर को सेलिब्रेट करते हैं लेकिन आज वो बच्चे दूसरे देशों की सेवा कर रहे हैं। सवाल है कि क्या ये उन बच्चों की गलती है? उन बच्चों ने अपने प्रतिभा का सही इस्तेमाल न होते देख उन देशों में जाना स्वीकार किया जहां उसे प्रतिभा की कद्र है। यदि हमने अपने देश में वातावरण दिया होता तो वो आज अपने देश में होता और उसका लाभ देश को मिलता। शिक्षा राष्ट्रनिर्माण से जुड़ा होता है। मैं एक जन प्रतिनिधि हूं, कोई शिक्षाविद् नहीं। मैं जनता को प्रतिनिधित्व करता हूं। वर्तमान शिक्षा मॉडल की खामी है कि 5 फीसदी बच्चों को शानदार शिक्षा मिलती है और 95 फीसदी बच्चों को काम चलाउ शिक्षा देते है। 5 फीसदी वाले के लिए सारे द्वार खुले हुए होते हैं वहीं 95 फीसदी बच्चे स्वयं के लिए दो वक्त के ​लिए रोजी जुटाने के लिए जद्दोजहद कर रहा होता है। 95 फीसदी बच्चों को कामचलाउ शिक्षा देकर हम राष्ट्र निर्माण का सपना नहीं देख सकते।


इस दौरान दिल्ली के उपमुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिय ने दिल्ली में शिक्षा व्यवस्था ​को लेकर किये जा रहे प्रयोग को विस्तार से रखा। उन्होंने कहा ​कि आज दिल्ली के सरकारी स्कूलों में कई तरह के प्रयोग हो रहे हैं जिसे कई स्तर पर सराहा जा रहा है। सबसे पहले हमें तय करना होगा कि हमें बदलना क्या है? शिक्षा में यदि शिक्षा के जरिए राष्ट्रनिर्माण करना चाहते हैं। इसके लिए हमें मानसिकता बदलने की जरूरत है। हम सभी बच्चों को टैलेंट तो दे रहे हैं लेकिन उनकी चेतना विकसित नहीं कर रहे हैं। उसको राष्ट्र,परिवार,समाज से जुड़ने की मानसिकता नहीं दे रहे हैं। ​बच्चों के ​शिक्षा के गुणवत्ता सुधार में हमने क्या किया। आज एक ही स्कूलों में 80 में से 5 बच्चे आईआईटी में गये। कई स्कूलों से एक दो बच्चे जरूर चयनित हुए हैं। जितना शानदार रिजल्ट दिल्ली सरकार ने दिया उतना तो कोटा का भी रिजल्ट नहीं होता है। इसी तरह एक स्कूल बहुत सारी बच्चियों ने नीट का एग्जाम पास किया। इसके साथ भी कई देशों में हमारे बच्चे जा रहे हैं।


उन्होंने कहा कि हमने मानसिकता के लिए हैप्पीनेस सर्वे नर्सरी से लेकर आठवीं तक, 9 वीं से 12 वीं तक एन्ट्रप्रेन्योर मांईड सेट सिखा रहे हैं, तीसरा देशभक्ति पाठ्यक्रम को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। देशभक्ति इस बात में भी है कि कैसे आप लॉ एबाईडिंग सिटिजन बनते हैं।
इसके साथ ही इस कार्यक्रम में अशोका यूनिवर्सिटी के संस्थापक डॉ० प्रमथ सिन्हा, पटना से राजगीर बोध विहार सोसायटी की सचिव डा० महाश्वेता महारथी, अमेरिका के बास्टन से डा० बलराम सिंह ने शिक्षा, संस्कृति एवं संस्कार पर चर्चा की। इसके साथ ही डॉ मनीषा प्रियम, डॉ इंदु प्रकाश सिंह आदि ने कार्यक्रम में शिरकत किया। कार्यक्रम का संयोजन व धन्यवाद ज्ञापन डॉ ​शंकर दयाल सिंह के पुत्र वरिष्ठ पत्रकार रंजन सिंह ने किया। कार्यक्रम का आयोजन शंकर स्मृती प्रतिष्ठान द्वारा किया गया था। इस दौरान लोगों ने इस कार्यक्रम को दिल्ली, पटना, औरंगाबाद, अमेरिका, जर्मनी, इंग्लैंड, सिंगापुर, इंडोनेशिया आदि अनेक देशों में देखा।

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