कई पंचायतें शामिल होंगी नगर पंचायत में, नगर पंचायतों को नगर परिषद बनने का रास्ता साफ

अमरनाथ झा,सलाहकार संपादक

नयी दिल्ली: बिहार में पंचायत चुनाव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। साथ ही शुरू हो गया नये नगर निगम और नगर पंचायत के स्वरूप में बदलाव का कार्य। आज बिहार कैबिनेट जब बैठी तो बैठक का सिर्फ एक ही एजेंडा था नगर पंचायतों का निर्माण और नगर निगमों के दायरे का विस्तार। इस बैठक में नीतीश कुमार की कैबिनेट 103 नगर पंचायतों के निर्माण और 32 नगर पंचायतों को नगर परिषद के रूप में विकास करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इतना ही नहीं आज कैबिनेट बैठक में 8 नए नगर परिषद के निर्माण की सहमती भी दी गई। सरकार के इस पहल के बाद 148 नये नगर निकायों के गठन का रास्ता साफ हो गया।


एक महीने के अंदर दी जा सकती है आपत्ती

कैबिनेट की बैठक के बाद विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने आज की बैठक में लिये गये फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि कुल 111 नये नगर निकायों के गठन की सरकार ने मंजूरी दी है। इसके साथ ही 32 नगर पंचायत को अपग्रेड कर नगर परिषद और पांच नगर परिषद को अपग्रेड कर नगर निगम बनाने पर कैबिनेट की मुहर लग गई। इस मौके पर नगर विकास सचिव आनंद किशोर ने बताया कि नए नगर निकायों के गठन पर लोगों से एक महीने के अंदर आपत्तियां मांगी गई है। डीएम और कमिश्नर को संबंधित क्षेत्र के लोग दावा-आपत्तियां संबंधित अर्जी दे सकते हैं। नए नगर निकायों के गठन की प्रक्रिया जिलाधिकारियों द्वारा पूरी की जाएगी।


इन जिलों को होगा फायदा
आज संपन्न हुई कैबिनेट बैठक में जिन पांच नगर परिषदों को अपग्रेड कर नगर निगम में बदलने की मंजूरी दी गई है उनमें सासाराम, बेतिया मोतीहारी, मधुबनी और समस्तीपुर शामिल हैं।अब ये सभी नगर परिषद नगर निगम कहलाएंगे।
इसके अलावा जिन 103 नए नगर पंचायतों के गठन को मंजूरी दी गई है, उनमें पटना जिले की दो (पुनपुन और पालीगंज), नालंदा जिले की नौ, भोजपुर की एक, बक्सर की दो, कैमूर की तीन, रोहतास की चार, मुजफ्फरपुर की सात, पश्चिम चंपारण की दो, वैशाली की तीन, और मुंगेर व जमुई की एक-एक पंचायत शामिल है।
जनता को सुविधा,सरकार को राजस्व
यदि दूसरे राज्यों की अपेक्षा बिहार में शहरीकरण की स्थिती को देखें तो प्रदेश शहरी इलाके काफी कम थे। शहरी जनसंख्या भी अन्य राज्यों की तुलना में बेहद कम थी। इस कारण शहरों के विकास के लिए केंद्र से मिलने वाली राशि में बिहार की हिस्सेदारी बहुत सीमित थी। इसलिए सरकार इस दिशा में पहल करते हुए पांच नए नगर निगम समेत 111 नए नगर निकायों के गठन की मंजूर दे रही है। इस फैसले से जहां एक ओर जनता को नगरीय सुविधाएं मिलेंगी वहीं, सरकार को भी और अधिक राजस्व की प्राप्ति हो सकेगी। अब सौ से अधिक नए निकायों के गठन और तीन दर्जन से अधिक निकायों के उत्क्रमित होने के कारण शहरी विकास के लिए अधिक फंड मिलेगा। हालांकि इस बदलाव का असर जनता की जेब पर भी बढ़ेगा। जिन 103 इलाकों को पहली बार नगर पंचायत में शामिल किया गया है, वहां सुविधाओं के साथ टैक्स की व्यवस्था में भी बदलाव होगा। इसी तरह नगर पंचायत से नगर परिषद बने 32 निकायों के लोगों को भी पहले से अधिक टैक्स देना होगा।
विकास की बढ़ी उम्मीद
सासाराम, मोतिहारी, बेतिया, मधुबनी और समस्तीपुर को नगर निगम का दर्जा देने की सिफारिश का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इन शहरों का अब नियोजित विकास संभव हो सकेगा। अभी इन शहरों का विस्तार तो हो रहा है लेकिन नियोजित विकास कोई संभावना नहीं बन पा रही थी। अब इस दिशा में एक व्यापक प्लान आगे बढ़ा जा सकता है। नगर निगम बनने के बाद अब यहां मेयर, डिप्टी मेयर के साथ नगर आयुक्त शहर के विकास का खाका तैयार करेंगे। साथ ही शहरी क्षेत्र में शामिल होने के बाद अब संबंधित निकायों में ड्रेनेज सिस्टम का विकास होगा। स्ट्रीट लाइटें लगाई जाएंगी। शहर की साफ-सफाई में अत्याधुनिक मशीनों का इस्तेमाल हो सकेगा। इसके अलावा सामुदायिक सुविधाएं भी बढ़ेंगी। जनता की सुविधा को देखते हुए पार्क आदि भी बनाए जाएंगे।

बनाये गये हैं ये मानक
सरकार ने नगर निकाय बनाने के मानक में बड़ा बदलाव किया है। अब 12 हजार से अधिक आबादी वाले ऐसे क्षेत्र जहां महज 50 फीसद लोग गैर कृषि कार्यों से आजीविका चलाएंगे वैसे क्षेत्र को सरकार नगर निकाय क्षेत्र घोषित कर देगी। इसी आधार पर नए नगर निकायों का गठन किया गया है। पहले यह 75 फीसद की सीमा थी।
आबादी के आधार पर बदलाव

बिहार में फिलवक्त 143 नगर निकाय, 3377 शहरी वार्ड हैं। इनमें 12 नगर निगम, 49 नगर परिषद और 82 नगर पंचायत हैं। अब नगर पंचायतों की संख्या बढ़कर 185, नगर परिषद की संख्या बढ़कर 95 और नगर निगम संख्या 17 हो जाएगी।उल्लेखनीय है कि सरकार 12 हजार की आबादी पर नगर पंचायत, 40 हजार की आबादी पर नगर परिषद और दो लाख की आबादी पर नगर निगम बनाती है।

प्रदेश में अभी है महज 11.27 फीसद शहरी आबादी
2011 की जनगणना के अनुसार बिहार में शहरी आबादी महज 11.27 फीसदी है। वहीं, राष्ट्रीय स्तर पर यह औसत 31.16 फीसद है। बिहार के कई अनुमंडल मुख्यालय अभी भी पंचायत के अधीन है। ऐसे में ​राज्य सरकार का मानना है कि नए नगर निकायों के अस्तित्व में आने से लोगों को कई नई सुविधाएं मिलने लगेंगी। इसके साथ टैक्स का बोझ भी बढ़ेगा। स्ट्रीट लाइट, ड्रेनेज सिस्टम, मशीनों के माध्यम से शहरों की साफ सफाई, पार्क व सामुदायिक सुविधाएं दी जा सकेंगी।

उल्लेखनीय है कि बिहार में 2021 में पंचायत चुनाव होने हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए नीतीश कुमार ने कैबिनेट बैठक में इन फैसलों को मंजूरी दी। अगले साल होने वाले पंचायत चुनाव में अब बदली हुई मतदाता सूची में भी परिवर्तन होगा। अब नए भौगोलिक क्षेत्र और जनसंख्या के हिसाब से वार्ड बांटे जाएंगे उनके आधार पर प्रतिनिधि चुने जाएंगे।

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