किसान आंदोलन के बीच …संसद के विशेष सत्र के लिए अभियान पर निकले हैं साईनाथ

अमरनाथ झा,वरीय संपादक

कृषि और संबंधित विषयों पर विचार करने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग लेकर वरिष्ठ पत्रकार पी साईनाथ देशव्यापी अभियान चला रहे हैं। उनका कहना है कि कृषि और किसान पहले से ही संकट में हैं, नए कृषि कानून उस संकट को बेतहाशा बढ़ाने वाले हैं। तीनों कानून अवांछित और असंवैधानिक हैं। अपने अभियान के क्रम में साईनाथ पिछले दो दिनों से पटना में थे।
वे बताते हैं कि कृषि राज्य का विषय है, इसके बारे में केन्द्र द्वारा कानून बनाया जाना गलत है। साथ ही इन्हें राज्यसभा से ध्वनिमत से पारित कराया गया जबकि ध्वनि मत का प्रावधान संविधान में नहीं है, यह केवल समय बचाने के लिए बनी परंपरा है। इस तरह कानून असंवैधानिक तो है ही, कृषि क्षेत्र पहुंचाने वाला भी है। इसे बनाकर सरकार आग से खेल रही है। कृषि क्षेत्र में सुधार का नाम लेकर सरकार कारपोरेट का विकास कर रही है।


पिछले महीने भर से अलग अलग जगहों पर बैठकों,सभाओं को संबोधित कर रहे हैं। इसी क्रम में पटना में बुध्दिजीवियों को संबोधित किया और फिर किसान संसद में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि किसान सीधे कारपोरेट से टकरा रहे हैं। उनका प्रतिरोध लोकतंत्र को बचाने के लिए है। सरकार ने महामारी के दौरान किसानों और मजदूरों को गहराई से प्रभावित करने वाले कानून बनाकर घोर अलोकतांत्रिक काम किया है।
उत्तरप्रदेश में 38 लेबर लॉ को सस्पेंड किया गया। उसमें सबसे बेहतर था यानि 8 घण्टा काम करने वाला कानून। उसे भी समाप्त कर दिया गया। इस कानून को ‘गोल्ड स्टैंडर्ड ऑफ लेबर लॉ’ कहा जाता है। केंद्र सरकार ने 29 कानूनों को 4 लेबर कोड में तब्दील कर दिया है। न मज़दूर, न किसान और न ही संसद से बल्कि कैबिनेट से भी कंसल्ट नहीं किया गया। बगैर कंसल्टेशन के कैसे कानून लाई सरकार? कृषि, संविधान के अनुसार राज्य लिस्ट में है। लेकिन केंद्र सरकार ने एक भी राज्य सरकार से बात नहीं किया। अब तो सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जैसे लोगा गौड़ा और लोढ़ा जैसे लोगों ने इस कानून को असंवैधानिक बताया।”

मीडिया की भूमिका का जिक्र करते हुए वरिष्ठ पत्रकार पी साईनाथ ने कहा “हिंदुस्तान में सबसे बड़ा पूंजीपति मुकेश अंबानी है और देश का सबसे बड़ा मीडिया चैनल मुकेश अंबानी के हाथों में है। 24 चैनल मुकेश अंबानी के हाथों में हैं मुकेश अंबानी को कानूनों ने सबसे ज्यादा पहुंचने वाला है तो वह कृषि कानूनों के बारे में कैसे सच बता सकता है ? अभी सुप्रीम कोर्ट की कमिटी से मान ने कमिटी छोड़ दिया क्योंकि उनके अपने ही संग़ठन बी.के यू (मान)ने उन्हें निकाल दिया लेकिन किसी भी मुख्यधारा की मीडिया ने यह नहीं दिखाया।


बिहार में ए.पी.एम.सी के खत्म होने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा” ए.पी.एम.सी कोई स्वर्ग न था। सभी किसान संगठन ए.पी.एम.सी में रिफॉर्म की मांग कर रहे थे । लेकिन कॉरपोरेट जो रिफॉर्म की मांग करता है और किसान जो मांग करता है उसमें बहुत फर्क है। जब तक खरीद का गारंटी नहीं होगी तब तक एम. एस. पी की गारंटी का कोई मतलब नहीं है। जब कपास के किसानों की आत्महत्या होती है तो सरकार एम. एस. पी की तो गारंटी कर देती है कुछ दिनों के लिए एम.एस. पी बढ़ा भी देती है लेकिन खरीद बन्द कर देता है जिससे किसान प्राइवेट हाथों में बेचने पर मजबूर हो जाता है।
सुप्रीम कोर्ट अपनी बनाई कमिटी की रिपोर्ट को कूड़े में फेंक देती है। बीटी कॉटन और जीएम फूड्स के लिए सुप्रीम कोर्ट ने देश के टॉप साइंटिस्ट को लेकर कमिटी बनाया। इस कमिटी ने जीएम रिसर्च पर तत्काल रोक लगाने की मांग की थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कुछ नहीं किया। कृषि में कश्मीर से लेकर कन्या कुमारी के किसानों से बात कर स्वामीनाथन आयोग बना लेकिन क्या हुआ उनकी रिपोर्टों का करता हुआ? सुप्रीम कोर्ट तो अपने ही बनाई कमिटियों का सम्मान नहीं करती। “
साईनाथ ने किसानों से आह्वान किया कि हर जिला में किसान बचाओ, देश बचाओ कमिटी बनानी चाहिए। जी.इस. टी पर स्पेशल सेशन किया गया क्योंकि वह पूंजीपतियों के फायदे के लिए था जबकि स्वामीनाथन आयोग का रिपोर्ट 15 सालों से है उसे अब तक लागू नहीं किया गया है। इस मसले पर एक घण्टे भी बात क्यों नहीं हुई ? संसद का एक सत्र होना चाहिए किसानों के मसले पर।


आगे की रणनीति
आगामी 23 और 24 जनवरी, 2021 को गुरु तेग बहादुर मेमोरियल (सिंघू सीमा के पास एक बड़ा स्थल), पर किसान संसद का आयोजन किया है। विभिन्न संगठनों द्वारा आयोजित किसान संसद में वर्तमान और पूर्व सांसदों के भाग लेने की संभावना है। इस दौरान तीन कृषि कानूनों पर चर्चा करने के लिए , एमएसपी का मुद्दा, किसानों के विरोध का सरकार का दमन और किसानों की अन्य प्रमुख समस्याएं पर चर्चा होगी।। किसान संसद के लिए सांसदों और पूर्व सांसदों द्वारा कुछ कृषि विशेषज्ञों और कुछ किसान नेताओं को आमंत्रित किया गया है।
इनमें प्रमुख है जस्टिस गोपाल गौड़ा, जस्टिस कोलसे पाटिल,एडमिरल रामदास, अरुणा रॉय, पी साईनाथ,यशवंत सिन्हा, मेधा पाटकर, गोपालदास, मोहम्मद अदीब,जगमोहन सिंह, सोमपाल शास्त्री, प्रशांत भूषण। इस कार्यक्रम के आयोजन के प्रमुख भागीदारी नेशन फॉर फामर्स, पिपल फस्र्ट और जन सरोकार है। इन्हीं संगठनों ने पटना में पी साईनाथ के कार्यक्रम का आयोजन किया था।

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