कोरोना काल में गांव को बचाने की जिम्मेवारी पंचायतों के पास

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अमरनाथ झा

सलाहकार संपादक, पंचायत खबर
पटना: कोरोना महामारी के इस दौर में शाषण की सबसे निचली इकाईं यानी पंचायती राज्य संस्थानों की जिम्मेवारी बढ़ गई है। इस दौर में एक ओर जहां गांव छोड़कर शहर गये लोगों में किसी भी कीमत पर अपने गांव में लौटने की जिजिविषा देखी गई वहीं दूसरी ओर संक्रमण के दौरान जो लोग शहर से भागकर अपने लोगों के बीच रहने के लिए गांव पहुंचे उनके सेहत की देखभाल और गांव को अचानक पहुंचे इन प्रवासियों से बचाने की जिम्मेवारी और उनके ठहरने के लिए 14 दिन की एकांतवास शिविर( कोरेंटाइन सेंन्टर) बनाने और उसकी देखभाल करने की जिम्मेवारी पंचायती राज संस्थानों को सौंपी गई। कई पंचायतों ने इस काम को अपनी नैतिजवाबदेही समझते हुए आरंभ में तो इस काम में होने वाले खर्च की कोई व्यवस्था नहीं थी और पंचायतें आपसी सहयोग से यह काम कर रही थी। पर बाद में पंचम वित्त आयोग के अनुदान की राशि इसमें खर्च करने की अनुमति दे दी गई। इससे पंचायतों को काफी सहुलियत हुई है।

पंचायतों को मिला वित्तिय अधिकार
बिहार के उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि पंचायतें पंचम वित्त आयोग से प्राप्त अनुदान की रकम का एक हिस्सा कोरोना से बचाव के उपायों पर खर्च कर सकेगी। इससे पंचायत प्रतिनिधियों, कर्मचारियों, एकांतवास शिविरों में रह रहे लोगों के बचाव के लिए मास्क, ग्लब्स, सैनेटाइजर और साबुन आदि की खरीद की जा सकेगी। इसके अलावा अपने क्षेत्र में स्वच्छता के लिए ब्लीचिंग पाउडर आदि का छिड़काव और दूसरे जरूरी उपाय भी किया जा सकेगा।
इधर मुख्यसचिव दीपक कुमार ने ग्राम पंचायतों में सरकारी स्कूलों और अन्य भवनों में बने एकांतवास शिविरों के संचालन में मुखियों से सहयोग करने की अपील की है। उन्होंने पंचायतों के सरपंच, पंच, वार्ड सदस्य, आंगनवाडी सेविकाओं, आशा कार्यकर्ता आदि से बात करके एकांतवास शिविरों में रहने वाले लोगों की सुविधाओं का ख्याल रखेंगे। संक्रमण नहीं फैले, इसके लिए लोगों को शारीरिक दूरी बनाए रखने के दिशानिर्देश को लेकर जागरुक करेंगे।
मुख्यसचिव ने वीडियो कांफ्रेंसिग के माध्यम से मुखियों से बात की और उनसे अपने अपने पंचायत क्षेत्र में लॉकडाउन का पालन होने सुनिश्चित करने के लिए कहा। अगर कोई इसका पालन नहीं कर रहा और मना करने पर भी ऐसा नहीं कर रहा तो स्थानीय प्रशासन को भी सूचित करेंगे।
पंचायतों को कोरोना बचाव के कार्यों में अनुदान की राशि खर्च करने का अधिकार मिलने से एकांतवास शिविरों की व्यवस्था में काफी सुधार हुआ है। पहले जरूरी सुविधाओं का अभाव होने से बाहर से आए लोग इनमें रहना नहीं चाहते थे। कई जगहों पर शिविर में रखे गए लोगों के घर भाग जाने की घटनाएं हुई। लेकिन अब स्थिति बदल गई है। न केवल भोजन, पानी और शौचालय की व्यवस्था हुई है, सोने के लिए भी बिस्तर आदि की व्यवस्था भी कई सेंटरों में अच्छा है। सफाई की अच्छा व्यवस्था की गई है और साबून आदि उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
वैसे एकांतवास सेंटरों में सरकारी कर्मचारी के तौर पर पंचायत के विकास मित्रों को तैनात किया जाना है। पर अधिकतर जगहों पर विकास मित्र दूसरे पंचायतों के रहने वाले हैं जिससे लाकडान के दौरान उनका इन शिविरों पर आना ही कठिन है। ऐसे में सारी जिम्मेवारी मुखिया और दूसरे पंचायत प्रतिनिधियों की है।
पंचम वित्त आयोग की सिफारिश पर पंचायती राज संस्थानों के लिए 1401 करोड़ रूपए की दूसरी किस्त जारी कर दी गई है। यह जानकारी उप-मुख्यमंत्री एवं वित्तमंत्री सुशील कुमार मोदी ने दी है। इसमें ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद सबको एक हिस्सा मिलना है। सुशील मोदी ने कहा है कि अनुदान की राशि 562 करोड़ में से ग्राम पंचायतों को 375 करोड़, पंचायत समितियों के 53 करोड़ और जिला परिषदों को 92 करोड़ रुपए मिलेगे। यह रकम जारी कर दी गई है। इस रकम को बुनियादी तौर पर ई-गवर्नेंस, क्षमतावर्ध्दन व प्रशिक्षण आदि पर खर्च करना था। मगर कोरोना महामारी से उत्पन्न स्थिति को देखते हुए इसमें से एक हिस्सा महामारी से बचाव के उपायों पर खर्च करने की अनुमति दी गई है। शेष 839 करोड़ ग्राम पंचायतें सात निश्चय कार्यक्रमों में खर्च कर सकेंगी।
इन पंचायतों ने कायम की मिसाल

अभिराज बैरिया ग्राम पंचायत
ऐसा भी नहीं है ​बिहार की पंचायतों में क्चारंटाइन की व्यवस्था नहीं की गई है। कुछ पंचायतों ने तो वास्तव में अच्छा काम किया है। उन्हीं में से एक पंचायत शिवहर जिले का अभिराज बैरिया ग्राम पंचायत। जहां की मुखिया रूबी देवी न सिर्फ कोरोना महामारी के दौर में बल्कि ऐसे भी पूरे पंचायत को साथ गांव को आगे बढ़ाने का सतत रूप से प्रयास कर रही हैं। विशेष रूप कोरोना के फैलाव के बाद उनके पंचायत ने मुखिया रूबी देवी के प्रत्यक्ष देखरेख में अच्छी व्यवस्था की है।

रूबी देवी कहती हैं कि हमारी पंचायत के अनेक व्यक्ति, जो विभिन्न कारणों से देश के अन्य शहरों/स्थानों पर रह रहे थे, कोरोना वायरस संक्रमण के कारण घोषित राष्ट्रीय लॉकडाउन की अवधि में वापस अपने घर लौट आए। कोरोना वायरस संक्रमण की आशंका के मद्देनजर भारत सरकार/बिहार सरकार के सक्षम प्राधिकार द्वारा निर्गत निदेशों के अनुरूप इन व्यक्तियों को ग्राम पंचायत – अभिराजपुर बैरिया के अन्तर्गत क्वारंटाईन में रखा गया। इस क्वारंटाईन अवधि में इनके स्वास्थ्य की नियमित रूप से जांच की गई तथा विशेष रूप से यह जाँच की गई कि इनमें कोरोना वायरस संक्रमण के लक्षण तो नहीं हैं। इन व्यक्तियों में दो सप्ताह तक कोरोना वायरस संक्रमण के लक्षण नहीं दिखने पर तथा निर्धारित क्वारंटाईन की अवधि समाप्त होने पर चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार इनमें से लगभग 70 (सत्तर) व्यक्तियों को आज क्वारंटाईन से मुक्त किया जा रहा है। इतना ही नहीं मुखिया ने इस बात का भी ख्याल रखा कि ये सभी अपने—अपने घरों में भी होम क्वारंटाईन से संबंधित निदेशों का पालन अवश्य करें। वो कहती हैं कि व्यक्तियों ने वचन दिया है वे अपने-अपने घर पर होम क्वारंटाईन से संबंधित निदेशों का पालन अवश्य करेंगे।

सेवा भाव के साथ चलाया क्वारंटाईन सेंटर
मुखिया रूबी देवी ने बताया कि क्वारंटाइन के दौरान हमारा यह प्रयास रहा है कि ग्राम पंचायत – अभिराजपुर बैरिया द्वारा संचालित क्वारंटाईन स्थल में रहने के दौरान इन सभी व्यक्तियों के लिए स्वच्छता, स्वास्थ्य एवं खान-पान संबंधी आवश्यकताओं का पूरी तरह ध्यान रखा जाये। प्रसन्नता का विषय है कि यह सभी व्यक्ति इनके लिए किए गए प्रबंध से पूरी तरह संतुष्ट हैं। सबसे अधिक प्रसन्नता का विषय है कि सार्वजनिक क्वारंटाईन में रखे गये हमारी पंचायत के सभी व्यक्ति एक जिम्मेदार नागरिक की तरह यह वचन दे कर जा रहे हैं कि अपनी-अपनी होम क्वारंटाईन की अवधि समाप्त होने के बाद यह सब अपने समाज तथा विशेष कर अभिराजपुर बैरिया ग्राम पंचायत के लोगों के सार्वजनिक हित के लिए उसी प्रकार सेवा भाव से समर्पित हो कर कार्य करेंगे, जिस तरह से इन व्यक्तियों की सार्वजनिक क्वारंटाईन की अवधि में इनके लिए इनके परिवार, समाज तथा ग्राम पंचायत के लोगों ने सेवा की है।


उल्लेखनीय है कि अभिराजपुर बैरिया ग्राम पंचायत के कासोपुर ग्राम, आशोपुर ग्राम, बैरिया ग्राम तथा पकड़ी ग्राम के व्यक्तियों को मिलाकर पूरी पंचायत के लगभग 70 (सत्तर) व्यक्ति क्वारंटाईन से मुक्त हो रहे हैं। क्वारंटाईन से मुक्त हो रहे प्रत्येक व्यक्ति को एक साबुन, दो मास्क तथा लगभग 100 ग्राम फिटकिरी उपलब्ध कराई गयी। बड़ी बात ये है कि मुखिया रूबी देवी ने अपने गांव में बाहर से लौट आये इन प्रवासियों को बोझ नहीं समझा बल्कि उनकी धारणा रही कि होम क्वारंटाईन की अवधि समाप्त होते ही यह सभी व्यक्ति हमारी अभिराजपुर बैरिया ग्राम पंचायत के श्रम शक्ति समूह के महत्वपूर्ण अंग बन जायेंगे।

बोझ नहीं गांव के श्रमशक्ति का हिस्सा है घर लौटे प्रवासी
वे कहती ​हैं कि जब इतनी सारी परेशानी को झेलते हुए लॉकडाउन के दौरान भी जब वे अपने गांव-घर वापस आ ही गये हैं, तब सामाजिक दूरी बनाये रखने के सरकारी निदेशों का पालन करते हुए इस विशाल मानव-बल को संसाधन के रूप में देखा जाना चाहिए, समस्या के रूप में नहीं। मुझे प्रसन्नता है कि जिन व्यक्तियों को कई स्थानों पर समस्या के रूप में देखा जा रहा था, अभिराजपुर बैरिया ग्राम पंचायत में उस विशाल मानव-बल के एक समूह को न केवल संसाधन के रूप में देखा गया, बल्कि उसी रूप में ग्राम पंचायत समाज के द्वारा उन्हें अपनाया भी गया। इसका परिणाम यह है कि अभिराजपुर बैरिया ग्राम पंचायत की श्रम शक्ति में 70 (सत्तर) व्यक्तियों की वृद्धि होने जा रही है। इससे बढ़कर प्रसन्नता का विषय और क्या हो सकता है!


रूबी देवी कहती हैं कि जो व्यक्ति पहले वापस आ गये थे या जो होली के बाद वापस गये ही नहीं थे, वैसे व्यक्ति आज हमारी पंचायत में कृषि तथा अन्य कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। हमारी पंचायत में मास्क तथा सैनिटाईजर का स्थानीय स्तर पर प्रबंध किया गया है। पंचायत के ऐसे व्यक्ति, जो कृषि कार्य में लगाये जा रहे हैं, को मास्क तथा साबुन उपलब्ध कराया गया है। मास्क की सिलाई ग्राम पंचायत में हमारी माताएँ-बहनें स्वयं कर रही हैं। साबुन हमने स्थानीय बाजार से खरीदा है। सभी कोरोना कृषि योद्धाओं को मास्क एवं साबुन की आपूर्ति की जा रही है। उन्हें समझाया जा रहा है कि साबुन से हाथ धो कर तथा मास्क पहन कर वह खेतों में जायें, जहां आपस में आवश्यक सामाजिक दूरी (प्रत्येक दो व्यक्तियों के बीच लगभग दो मीटर या छह फीट) बनाये रखते हुए रबी फसल की कटाई का कार्य करें। वे गांव के किसानों को इस बात के लिए प्रेरित करती है कि जिन किसानों के खेत में खड़ी फसल की कटनी होनी है, उन्हें समझाया जा रहा है कि कटाई कार्य करने वाले कोरोना कृषि योद्धाओं को खेत के चारों ओर से, आपसी दूरी बनाते हुए, फसल काटने हेतु काम पर लगायें।

मुखिया की प्रेरणा से महिलायें बना रही हैं मास्क

मुखिया रूबी देवी कहती हैं कि शहरों में मास्क को लेकर मारामारी मची है लेकिन अभिराजपुर बैरिया पंचायत ने मास्क की उपलब्धता को समस्या न मान कर इसे एक चुनौती, एक अवसर के रूप में देखा है। हमने अपनी पंचायत में स्थानीय महिलाओं के माध्यम से बड़े पैमाने पर मास्क निर्माण का कार्य प्रारंभ कराया था। हमारा यह लक्ष्य था कि पंचायत के प्रत्येक व्यक्ति को (शिशुओं सहित) कम से कम दो मास्क तथा पंचायत में रबी फसल की कटाई, परिवहन, भंडारण इत्यादि से जुड़े कोरोना कृषि योद्धाओं , पंचायत में कार्यरत सभी पुलिस कर्मियों, स्वास्थ्य कार्यकर्त्ताओं, सफाई कर्मियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ताओं आदि सभी कोरोना योद्धाओं को कम से कम पाँच मास्क अगले एक सप्ताह के भीतर उपलब्ध करा दिये जायें। इसी क्रम में मैं आपको बताना चाहती हूं कि कपड़े का इन्तजाम कर मास्क तैयारी का काम हमारी पंचायत में युद्ध स्तर पर चल रहा है।
स्वयंसेवक के रूप में काम कर रहे हैं कोरोना वॉरियर्स


पंचायत के इस अभियान में दर्जनों व्यक्ति स्वयंसेवक के रूप में जुड़े हैं तथा अभी पंचायत कोरोना योद्धा के रूप में कार्य कर रहे हैं। कई व्यक्तियों, जिनमें महिलाएँ, पुरूष तथा बच्चे भी शामिल हैं, ने मुझसे पूछा कि पंचायत द्वारा किए जा रहे कार्यों में वह किस तरह सहभागी बन सकते हैं। मैंने उनसे अनुरोध किया कि मास्क, साबुन तथा फिटकिरी की पैकिंग तथा वितरण करने में वह अपना सहयोग दे सकते हैं।
इनमें से अनेक महिलाएं, पुरूष तथा बच्चे अभी उत्साहपूर्वक इस कार्य में लगे हुए हैं। कार्य प्रारंभ करने से पहले वह अपने हाथ-पैर फिटकिरी के घोल तथा साबुन से धो कर, उसके बाद तौलिये या गमछे से हाथ-पैर पोंछ कर बैठते हैं तथा मास्क, साबुन एवं फिटकिरी की पैकिंग करते जाते हैं। दूसरे स्वयंसेवक इनका वितरण करते हैं। इनमें से किन्हीं स्वयंसेवक को भुगतान करने की आवश्यकता ग्राम पंचायत को नहीं पड़ रही है। हमारी स्थानीय एवं निःशुल्क सामूहिक श्रम शक्ति आज पंचायत के काम आ रही है। इन सभी स्वयंसेवकों को मात्र आधे घंटे का प्रशिक्षण देकर यह समझाया गया है कि स्वच्छता तथा सामाजिक दूरी संबंधी मानकों का पालन करते हुए यह छोटे-छोटे किन्तु महत्वपूर्ण कार्य किस तरह स्थानीय स्तर पर हमारे द्वारा सम्पन्न किए जा सकते हैं।

सहरसा के चैनपुर पंचायत ने कायम की मिसाल
अचानक हुए लॉक डाउन की घोषणा के बाद बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूरी अपने गांव लौटे। स्वाभाविक था अन्य पंचायतों की तरह ही सहरसा जिले के चैनपुर गांव में भी बाहर रह रहे प्रवासी मजदूर गांव लौट के आये। ऐसे में इन्हें गांव में आने पर कोरोना संक्रमण का खतरा था। बावजूद इसके चैनपुर पंचायत से जुड़े लोग और कुछ नौकरी चाकरी कर रहे युवाओं ने इनके लिए बेहतर व्यवस्था करने की ठानी। नतीजा यह हुआ कि पंचायत के लोगों ने खुद अपनी पहल से अपने पंचायत में क्वारंटीन सेंटर खोल दिया और यहां बाहर से आये मजदूरों के रहने, खाने-पीने, साफ-सफाई और स्वास्थ्य जांच की मुकम्मल व्यवस्था की गई। इसके अलावा वे अपने पंचायत क्षेत्र के उन परिवारों के नियमित भोजन का इंतजाम भी किया गया जिनकी आजीविका लॉक डाउन की वजह से ठप पड़ गयी है।


पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि दीपनारायण ठाकुर ने बताया कि, “24 मार्च को सुबह साढ़े आठ बजे तक हमारा क्वारंटीन सेंटर बनकर तैयार था। न केवल पंचायत प्रतिनिधि बल्कि गांव के एक दर्जन से अधिक युवाओं के सहयोग से साफ-सफाई कर परिसर को रहने लायक बनाया। वहां बेड की व्यवस्था की और खाना पकाने के लिए एक हलवाई का इंतजाम किया। पहले लॉट में तीन और फिर 21 मजदूर यहां रहने के लिए भेजे गये। सभी मजदूरों का इंतजाम किया गया। पंचायत के कृषि सलाहकार, आशा, एएनएम व अन्य कर्मी भी इस सेंटर पर पूरा सहयोग कर रहे हैं। इस दौरान गांव का एक व्यक्ति कोरोना के लिहाज से संदिग्ध पाया गया तो उसे भागलपुर रेफर किया गया। वहां हुई जांच में उसे कोरोना निगेटिव पाया गया है। बाकी लोग स्वस्थ हैं।


इस पूरे अभियान में चैनपुर गांव के उन लोगों की बड़ी भूमिका है, जो गांव से बाहर रहकर ठीक-ठाक नौकरी या रोजगार करते हैं। इनलोगों ने सोशल मीडिया माध्यमों का प्रयोग कर गांव से बाहर रह लोगों को गांव में अचानक आई इस आपदा के दौरान सहयोग करने के लिए प्रेरित किया। इस पूरे अभियान में अन्य लोगों के साथ ही अहम कड़ी बने दानापुर रेलवे में कार्यरत उज्जवल ठाकुर मालिक। उनका कहना है कि देश विदेश में रह रहे ग्रामीणों ने बड़ी रकम गांव में क्वारंटाइन सेंटर चलाने के साथ ही राहत अभियान के लिए दिया। जिसका उपयोग क्वारंटीन सेंटर और गांव के दिहाड़ी मजदूरों के खाने पीने के अभियान में खर्च हो रही है। इस दौरान बड़ी संख्या में जरूरत मंदों राहत किट दिये जाने की जिम्मेवारी देश विदेश में रह रहे ग्रामीणें ने उठाई। इस फूड किट में पांच किलो चावल, पांच किलो आटा, दाल, आलू, तेल, मसाला, साबुन, सर्फ इत्यादि घरेलू उपयोग की तकरीबन हर सामग्री है। जिससे एक परिवार का एक महीने का गुजारा हो सके।उज्जवल बताते हैं कि अमूमन एक किट नौ सौ से एक हजार रुपये का पड़ रहा है। ये काम अभी भी सतत रूप से जारी है और लोगों का सहयोग मिल रहा है।

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