संतोष कुमार सिंह
नयी दिल्ली: जैसे-जैसे रात गहरा रही है कुटुंबा पंचायत की मुखिया सावित्री सिंह को सुबह होने का इंतजार है। हालाकि कुटुंबा पंचायत में विजय की सुबह हो चुकी है जब इस पंचायत को प्रदेश का एक मात्र चाईल्ड फ्रेंडली पंचायत होने का समाचार मिल चुका है। फिर भी सावित्री को उस क्षण का इंतजार जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार यानी 24 अप्रैल को 11 बजे के बाद देश के उन पंचायत प्रतिनिधियों से बात करेंगे जिन्हें देश के अग्रणी पंचायत होने का गौरव हासिल हुआ है। इसी में एक पंचायत है कुटुम्बा और इस पंचायत की मुखिया सावित्री सिंह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वीडियो कांफ्रेंसिग के जरिए बात करेंगी।

उल्लेखनीय है कि प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी पंचायती राज दिवस मनाया जाना है। इस दिन पर प्रत्येक वर्ष सामान्य परिस्थितियों में देश के उन पंचायतों को सम्मानित किया जिन्होनें लोकतंत्र की सबसे मौलिक इकाईं यानी पंचायत में बेहतर काम किया है। गांधी के ग्राम गणराज्य के सपनों को पंचायती राज संस्था के जरिए जमीन पर उतारने में अहम भूमिका निभाई है। लेकिन जैसा कि सर्वविदित है कि कोरोना महामारी के कारण देश भर में लॉक डाउन है इसलिए सोशल डिस्टेंसिग रखने की बात कही गई है जिसके जरिए हम इस महामारी के फैलाव को रोक सकते है। इसी को ध्यान में रखकर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कंफ्रेंसिग के जरिए देश के पंचायत प्रतिनिधियों से बात करेंगे। हालांकि पंचायती राज मंत्रालय द्वारा बेहतर काम करने वाले पंचायतों के लिए अवार्ड की घोषणा कर दी गई है। मंत्रालय द्वारा घोषित अवार्ड पाने वाले पंचायतों में बिहार की दो पंचायते शामिल हैं जिन्हें नानाजी देशमुख राष्ट्रीय गौरव ग्रामसभा पुरस्कार और चाईल्ड फ्रेंडली पंचायत पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। । इन दोनों श्रेणियों में क्रमश: औरंगाबाद जिले के कुटुंबा पंचायत को चाईल्ड फ्रेंडली पंचायत पुरस्कार दिया जाएगा वहीं समस्तीपुर जिले के रोसड़ा प्रखंड के मोतीपुर पंचायत को नानाजी देशमुख राष्ट्रीय गौरव ग्रामसभा पुरस्कार देने की घोषणा हुई है।

कुटुम्बा कुटुंब के समान
पंचायती राज मंत्रालय द्वारा शिशु मित्र ग्राम पंचायत के पुरस्कार से सम्मानित हुई मुखिया सावित्री सिंह के लिए पूरा पंचायत ही कुटुंब है। इस लिहाज से वो अपने पंचायत का नाम सार्थक कर रही है विशेष रूप से उन गतिविधियों के लिहाज से जो किसी भी बच्चे के समुचित विकास के लिए आवश्यक होते हैं। तभी तो इस पंचायत को देश की ढाई लाख ग्राम पंचायतों में से शामिल उन 30 पंचायतों में स्थान मिला है। यह बिहार की एकमात्र पंचायत है जिसे इस पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है।
सारी आशंकाओं को निर्मूल साबित करती आगे बढ़ रही हैं सावित्री
ऐसा नहीं है कि कुटुम्बा की मुखिया सवित्री सिंह को मुखिया पद थाल में सजा कर दे दिया हो। लेकिन बदलाव की दिशा में यह कदम उस वक्त बढ़ा जब बिहार सरकार ने वर्ष 2006 में पंचायत और नगर निकायों के हर श्रेणी में महिलाओं को 50 प्रतिशत के आरक्षण का प्रावधान किया। पुरूष प्रधान समाज अकस्मात आये इस बदलाव को स्वीकार करने को तैयार न था। लेकिन उस दिन से लेकर आजतक गंगा में बहुत पानी बह गया है। भले ही पंचायती राज व्यवस्था में बहती भ्रष्टाचार रूपी गंगा समय पर अपनी कालिख छोड़ती रही हो लेकिन इस बीच कुछ पंचायत प्रतिनिधि ऐसे हैं जो उन उस वक्त इस्तेमाल किये गये उन फिकरों जिसमें यह कहा गया था चुनरी से कहीं पगड़ी के काम होई को झुठला रहे हैं। आज वही चुनरी पाग बन कर बिहार का नाम रोशन कर रही है। ऐसा ही एक नाम है सावित्री सिंह। एक बार फिर से उन्होंने देश भर में बिहार का नाम रोशन करते हुए अपने कुटुंबा ग्राम पंचायत को शिशु मित्र ग्राम पंचायत राष्ट्रीय पुरस्कार तक पहुंचने का माध्यम बनी हैं। कानपुर में पली बढी कुमारी सावित्री सिंह को कुटुम्बा को लोग एक प्राइवेट टीचर के रूप में जानते थे,जो बच्चों को ट्यूसन पढ़ती थी। वर्ष 2016 के पंचायत के आम चुनाव में कुटुम्बा के मतदाताओं को इस युवा नेत्री में भविष्य की संभावना दिखी और नतीजतन सावित्री सिंह कुटुम्बा ग्राम पंचायत की मुखिया चुनी गई। स्नातक तक की शिक्षा प्राप्त सावित्री चुनाव जीतने के बाद वे कुछ नया करना चाहती थीं ।

पंचायत का बढ़ा मान, जिले को मिला सम्मान
इस पुरस्कार मिलने से न सिर्फ पूरे गांव में हर्ष का माहौल है बल्कि इसके जरिए पूरे जिले का नाम रौशन हुआ है और अधिकारी कर्मचारी सब सावित्री सिंह के पंचायत कुटुंबा को मिले इस सम्मान से फूले नहीं समा रहे हैं। इसकी सूचना मिलते ही पूरे जिले में हर्ष की लहर दौड़ गई और विभिन्न संगठनों ने इसके लिए जिला प्रशासन, जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल, उप विकास आयुक्त अंशुल कुमार और इस कार्य से जुड़े अन्य अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को बधाई दी है। इस गौरवपूर्ण पुरस्कार के लिए यह चयन उप विकास आयुक्त अंशुल कुमार और कुटुंबा पंचायत की मुखिया कुमारी सावित्री सिंह के नेतृत्व में किए गए बेहतर कार्यों के लिए किया गया है जिसमें कुटुंबा प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, आईसीडीएस के जिला प्रोग्राम पदाधिकारी तथा कुटुंबा के प्रोग्राम पदाधिकारी की भी बेहद सक्रिय भूमिका है। उप विकास आयुक्त अंशुल कुमार ने बताया कि कुटुंबा ग्राम पंचायत में बालकों के शिक्षा स्वास्थ्य आदि पर विशेष रूप से ध्यान दिया गया है। यहां स्कूल में बच्चों के नामांकन तथा नामांकन के बाद बच्चे स्कूल से वापस नहीं जाए इस पर ध्यान केंद्रित किया गया। उन्हें कुपोषण से बचाने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से सशक्त किया गया। बच्चों में शैक्षणिक, सांस्कृतिक, मानसिक विकास को बढ़ावा देने जैसे भी कार्य किए गए। मुखिया सावित्री देवी का इसमें अहम योगदान रहा है। मुखिया सवित्री सिंह ग्राम सभा के महत्व को देखते हुए कुटुम्बा में लगातार ग्राम सभा का आयोजन करती रही हैं। साथ ही उन्होंने पेड़ों को राखी बांध कार राखी का पर्व मनाने का निर्णय लिया तो ग्रामीण और आस पड़ोंस के लोग उनकी तारीफ करते नहीं थक रहे थे।

पहले भी मिल चुका है सम्मान
ऐसा नहीं है कि कुटुम्बा पंचायत को राष्ट्रीय पुरस्कार पहली बार मिला है। इसके पहले भी कुटुम्बा ग्राम पंचायत भारत के मानचित्र पर अपना नाम दर्ज़ करा चुका है। विगत वर्षों में जबलपुर में आयोजित पंचायती राज दिवस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिती में कुटुम्बा मुखिया को राष्ट्रीय गौरव पुरष्कार से सम्मानित किया जा चुका है। ग्राम सभा का
प्रधानमंत्री करेंगे मुखिया से बात
कुटुम्बा पंचायत की मुखिया सावित्री सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री आगामी २४ अप्रैल को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये बात करेंगे। उन्हें यह जानकारी सरकारी अधिकारियों से प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा की उनकी पंचायत के लोगों ने उनका जो सहयोग किया है उससे यह पंचायत बेहतर कार्य कर सकी। उन्होंने प्रशासन विशेषकर डीडीसी अंशुल कुमार के सहयोग की सराहना की। कहा कि सभी अधिकारियों का रुख सकारात्मक रहा जिससे ये उपलब्धि मिली है। उन्होंने कहा कि आगे भी इस पंचायत को विकास की बुलंदियों तक पहुंचाने के लिए वे प्रयासरत रहेंगी।