औने पौने दाम पर खुले बाजार में धान बेचने को मजबूर हैं बिहार के किसान

अमरनाथ झा

पटना: बिहार धान की सरकारी खरीद की मंथर गति से किसान नाराज हैं। वे चाहते हैं कि खरीद की आखिरी तारीख को मार्च तक बढ़ाया जाए। मालूम हो कि आमतौर पर धान की खरीद ३१ मार्च तक होती रही है, इस बार इसे घटाकर ३१ जनवरी तक कर दिया गया है,लेकिन खरीद की रफ्तार जस की तस है। लक्ष्य ४५ लाख टन खरीदने का है, अभी आधी खरीद भी नहीं हुई है।
जब देश के किसान नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमा पर धरना दे रहे हैं, बिहार में धान उपजाने वाले किसान अपनी उपज बेचने के लिए परेशान हैं। उन्हें औने पौने दाम पर धान बेचना पड़ रहा है क्योंकि सरकारी खरीद बंद हो जाने के बाद इतना दाम मिलना भी कठिन हो जाएगा।
सहकारिता विभाग का आंकड़ा है कि २१ जनवरी तक राज्य में १७ लाख २० हजार टन से कुछ अधिक धान की खरीद हुई है। बाकी दस दिनों में बाकी २८ लाख टन की खरीद होना संभव नहीं लगता। किसान तो यही नहीं समझ पा रहे कि खरीद का लक्ष्य बढ़ाने और खरीद की मियाद घटाने का मकसद क्या है।

कृषि मंत्री अमरेन्द्र प्रताप सिंह के अनुसार, यह फैसला खरीद की प्रक्रिया को तेज करने और किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलाने के लिए किया गया है। सरकार की मानसिकता किसानों की सहायता करना है। लेकिन जब उनसे पूछा गया कि आमतौर पर धान की दो तिहाई सरकारी खरीद फरवरी ,मार्च में होती रही है, इस वर्ष जनवरी में ही खरीद बंद हो जाने का किसानों पर कैसा असर पड़ेगा, तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
पटना जिला के ही पालीगंज के किसान सुबोध शर्मा ने बताया कि मुश्किल से ३० प्रतिशत धान की खरीद हो पाई है। बाकी बचे धान की खरीद अगले दस दिन में होना संभव नहीं है। इसलिए सरकारी खरीद का निर्धारित लक्ष्य के करीब पहुंच पाना भी कठिन है।
इस प्रकार किसानों के सामने खुले बाजार में बारह, तेरह सौ रुपए प्रति क्वींटल धान बेचने के सिवा कोई चारा नहीं है। जबकि सरकार ने धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य १८८८ रुपए प्रति क्वींटल निर्धारित किया है।


किसानों की मांग है कि सरकार धान खरीदारी की तारीख कम से कम फरवरी तक बढ़ा दें। अभी तो बहुत सारे इलाके में धान की कटाई भी नहीं हुई है।
दिसंबर में जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार धान खरीद का लक्ष्य ३०लाख टन से बढ़ाकर ४५ लाख टन किया था,तब किसानों को लगा था कि सरकार धान खरीदने के लिए कोई विशेष अभियान चलाने वाली है पर बाद में पता चला कि खरीद की रफ्तार पिछले वर्षों से भी कम है।
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार मुख्यमंत्री के निर्देश पर एम एस पी पर धान खरीद के लिए दो विशेष प्रचार अभियान चलाए गए। पहला अभियान २९ दिसंबर से ३१ दिसंबर के बीच चलाया गया। दूसरा अभियान ७ जनवरी से ९ जनवरी के बीच चलाया गया। फिर भी खरीद की गति तेज नहीं हो पाई।
बिहार में प्राथमिक कृषि सहकारी समिति (पैक्स) और व्यापार मंडल अनाज की सरकारी खरीद करते हैं। आमतौर पर १५ नवंबर से धान की खरीद शुरू हो जाती है,पर इस साल विधान सभा चुनाव की वजह से इसमें देर हुई और शुरुआत दिसंबर में हो पाई। सहकारिता विभाग अधिकारी स्वीकार करते हैं कि धान खरीद की गति काफी कम है।
पिछले साल बिहार में करीब २० लाख टन धान की खरीद हुई थी। उसके पहले के सीजन में केवल १४.१६ लाख टन की खरीद हो पाई थी।
बिहार में गेहूं की खरीद भी बहुत कम हुई थी।सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले साल केवल ५० हजार टन गेहूं की खरीद हुई। जबकि लक्ष्य सात लाख टन का था।

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