“चाणक्य” न ‘हां’ कह पाये और ना ही ‘न’,नतीजा मान मनौव्वल की एक और कोशिश विफल

मंगरूआ

नई दिल्ली: कृषि कानून के विरोध में आंदोलन के बीच किसान नेताओं के एक धड़े के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हुई मुलाकात के बाद बातचीत सुलझने के बजाय और उलझ गई लगती है। बैठक से निकलकर पूर्व वामपंथी सांसद और वामपंथी किसान संगठन से जुड़े हन्नान् मोल्लाह बैठक से बाहर आये तो उन्होंने कहा कि सरकार कुछ लिख के देने को तैयार नहीं है, ऐसे में 9 सितंबर को किसान संगठनों के साथ होने वाले औपचारिक बैठक का कोई मतलब नहीं है। क्योंकि सरकार बिल को वापस लेने का कोई मतलब नहीं है। हालांकि उन्होंने ये कहा कि सरकार कल लिख कर देगी कि वे क्या करना चाहते हैं उसके बाद किसान संगठन आपस में कल 12 बजे बैठेंगे उसके बाद आगे की रणनीति तय होगी। साफ है गृह मंत्री के साथ इन किसान नेताओं की 3 घंटे से चली बैठक बेनतीजा रही।


भारत बंद के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों में बंद का असर भी अलग-अलग रहा। जहां ​बंद में शामिल विपक्षी दलों की सरकारें थी वहां तो बंद का असर देखा गया लेकिन जहां भाजपा और एनडीए की सरकार है वहां बंद के बेअसर होने की खबरें आई आम दिनों की तरह ही काम काज चलता रहा। हालांकि दिल्ली के सभी बोर्डर पर किसान संगठनों का धरणा आज भी जारी रहा है और वहां सरकार विरोधी और किसानों के समर्थन में नारे लगते रहे। बंद के दौरान एक ओर जहां सरकार के विभिन्न मंत्री यह बताते रहे कि बंद का कोई असर नहीं हुआ और कृषि बिल किसानों के​ हित में है। वहीं सरकार के मंत्री विपक्ष पर किसानों के मसले पर राजनीति करने को लेकर हमलावर रहे। वहीं विपक्षी नेता भारत बंद को सफल बताते हुए सरकार द्वारा किसानों से ज्यादती करने का आरोप लगाते रहे। ये बंद सिर्फ 3 बजे तक ही थी।

इस बीच खबर आई कि देश के गृह मंत्री अमित शाह ने चुनिंदा किसान नेताओं के आज शाम 7 बजे बैठक बुलाई है। बैठक के स्थान को लेकर किसान नेताओं में असमंजस की स्थिती देखी गई। इससे पहले, भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के नेता राकेश टिकैत गृह मंत्री के आवास पर पहुंच गए थे, जहां उन्होंने कहा कि मैं यह पता लगाने की कोशिश कर रहा हूं कि बैठक कहां हो रही है। वहीं कुछ किसान नेता ललित होटल के पास भी देखें गए। हालांकि अंतत: देश के ​गृह मंत्री अमित शाह और 13 किसान नेताओं के साथ बैठक इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (Indian Council of Agricultural Research) के इंटरनेशनल गेस्ट हाउस (International Guest House) के गेस्ट हाउस में हुई। इस बैठक में किसान नेताओं के साथ कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और रेल मंत्री पियूष गोयल भी शामिल थे। यहां पहुंचने के बाद किसान नेताओं को गृह मंत्री के साथ जब वर्चुअल मीटिंग की जानकारी दी गई तो उन्होंने विरोध किया। किसानों को एक किसान इस बात से नाराज होकर सिंघु बॉर्डर के लिए निकल गए। एक किसान नेता रुलदू सिंह मानसा वापस लौट गए। किसान समूह भारतीय किसान यूनियन (Ugrahan) ने कहा है कि गृह मंत्री के साथ इस तरह की अनौपचारिक बातचीत को टाला जाना चाहिए था। इसके बाद अफसरों ने शाह को पूरी जानकारी दी। फिलहाल किसानों के साथ गृह मंत्री अमित शाह की बैठक शुरू हो चुकी है।


गृह मंत्री अमित शाह के साथ लंबी बातचीत के जब बैठक से ​पूर्व सांसद हन्नान मोल्लाह बाहर आये तो उन्होंने कहा सरकार कृषि कानूनों को वापस लेने को तैयार नहीं है। हन्नान मोल्लाह ने कहा कि 11 बजे सरकार उनके पास प्रस्ताव भेजेगी और दोपहर 12 बजे किसान मिलकर इसपर मंत्रणा करेंगे। उन्होंने कहा कि अमित शाह ने हमसे कहा कि सरकार जो संशोधन करना चाहती है वह उसे लिखित में देगी; और हम तीनों कानूनों को निरस्त करना चाहते हैं, बीच का कोई रास्ता नहीं है। उन्होंने कहा कि शाह के साथ बैठक में मौजूद सभी 13 यूनियनों ने कानूनों को रद्द करने की मांग की, अन्य के साथ चर्चा करके हम अगले दौर की वार्ताओं के संबंध में निर्णय करेंगे।
किसानों के रूख को इस बात से भी समझा जा सकता है कि गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात से पहले किसान नेताओं ने कहा था जब वे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करेंगे तो अपनी मांगों पर केवल ‘हां’ या ‘नहीं’ में जवाब मांगेंगे। ‘बीच का कोई रास्ता नहीं है। अमित शाह के साथ बैठक में जाने वाले एक अन्य नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि ‘भारत बंद’ सफल रहा और केंद्र सरकार को अब पता है कि उसके पास कोई रास्ता नहीं है।

इन 13 नेताओं को बुलाया गया

  1. राकेश टिकैत
  2. गुरनाम सिंह चढूनी
  3. हनन मुला
  4. शिव कुमार कक्का जी
  5. बलवीर सिंह राजेवाल
  6. रुलदू सिंह मानसा
  7. मंजीत सिंह राय
  8. बूटा सिंह बुर्जगिल
  9. हरिंदर सिंह लखोवाल
  10. दर्शन पाल
  11. कुलवंत सिंह संधू
  12. बोध सिंह मानसा
  13. जगजीत सिंह दल्लेवाल

इससे पहले नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच पांचवें दौर की बातचीत बेनतीजा खत्म हो गई थी और किसानों ने भारत बंद का आह्वान किया था।

दिल्ली की सीमाओं पर हजारों किसान पिछले 12 दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं। पांचवें दौर की बातचीत में केंद्र सरकार ने कृषि कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव दिया था लेकिन किसान नेताओं ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि सरकार तीनों कानून वापस ले नहीं तो वे प्रदर्शन जारी रखेंगे।

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