गैर राजनीतिक किसान आंदोलन के समर्थन में उतरने की होड़ में शामिल हुए विपक्षी दल

मंगरूआ

नयी दिल्ली: कृषि बिल पर किसानों के आंदोलन को चहुंओर से समर्थन मिल रहा है। अब तो देश के कई विपक्षी पार्टियां भी खुल के किसानों के समर्थन में खड़ी हो गयी हैं। किसान आंदोलन से जुड़े लोग जो कल तक कह रहे थे कि आंदोलन का किसी भी राजनीतिक दल से कोई लेना देना नहीं अब राजनीतिक दलों से मिलते समर्थन पर यह कहने में संकोच नहीं कर रहे हैं उन्हें राजनीतिक दलों के समर्थन से परहेज है। इस बीच किसानों ने सरकार के पांचवे दौर की बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकलने के बाद 8 मार्च को भारत बंद बुलाया है और इस मौके पर विपक्षी दलों में कथित तौर पर गैर राजनीतिक आंदोलन के साथ खड़ा होने की होड़ लग गयी है। हालाकि सरकार ने अपनी तरफ से किसानों को समझाने की कोशिश नहीं छोड़ी है और सरकार को लगता है कि 9 तारीख को जो किसान यूनियनों के साथ बैठक बुलाई गई है उसमें इस मसले का कोई हल निकलेगा।


इन राजनीतिक दलों का मिला समर्थन
देशभर से अलग-अलग 22 राजनीतिक दलों ने किसानों के इस बंद के ऐलान को समर्थन देने की घोषणा की है। इनमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, पीएजीडी,एनसीपी,सीपीआई,सीपीएम,सीपीआई एम एल, आरएसपी,आरजेडी,डीएमके,शिवसेना,आप,एआइए्पी,जेएमएम,तृणमूल कांग्रेस आदी दलों ने समर्थन दिया है। इन राजनीतिक दलों ने कहा है कि हम किसानों के साथ खड़े हैं, किसान संगठनों के मौजूदा संघर्ष और उनके भारत बंद के ऐलान का हम समर्थन करते हैं। उनका कहना है कि ये कृषि कानून संसद में अलोकतांत्रिक तरीके से बनाए गए हैं। मतदान और चर्चा नहीं की गई। भारत की खाद्य सुरक्षा के लिए यह कानून खतरा है और यह हमारे किसान और कृषि व्यवस्था को बर्बाद कर देगा. इन पार्टियों नेताओं ने 9 दिसंबर को शाम पांच बजे राष्ट्रपति से मिलने के लिए समय भी मांगा है.

कांग्रेस भी करेगी समर्थन

कांग्रेस के संगठन महासचिव के सी वेणुगोपाल ने भारत बंद के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी 8 दिसंबर, 2020 को विभिन्न किसान यूनियनों / संगठनों द्वारा आहूत “भारत बंद” के आह्वान को अपना सक्रिय समर्थन देते हुए पूरी भागीदारी करेगी। इससे पूर्व भी कांग्रेस पार्टी ने संसद से सड़क तक तीन किसान विरोधी काले क़ानून के खिलाफ मज़बूती से लड़ाई लड़ी है।

टीआरएस का भी समर्थन का ऐलान

तेलंगाना में भी किसानों के समर्थन में प्रदर्शन की तैयारी है। टीआरएस एमएलसी के. कविता का कहना है कि हमने संसद में भी कृषि बिल का विरोध किया था और हम अपने विरोध जारी रखेंगे। किसी भी बिल में न्यूनतम समर्थन मूल्य के प्रावधान का जिक्र नहीं किया गया है और साथ ही अगर देश में मंडी व्यवस्था खत्म हो जाएगी तो किसानों के पास कोई विकल्प नहीं बचेगा। ऐसे में हम किसानों के भारत बंद के ऐलान का समर्थन करते हैं।


क्या कहते हैं अखिलेश
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव कहते हैं कि पार्टी ने यह तय किया है कि कल हर जिले में किसान यात्रा होगी. बात करें किसान आंदोलन की तो किसान और सरकार की बीच पांच दौर की बातचीत हो चुकी है, इसी के साथ किसानों ने 8 दिसंबर को भारत बंद का ऐलान कर दिया है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि किसान कानून किसानों के लिए डेथ वॉरेंट है।

उन्होंने आगे कहा कि सरकार को मंडियों को सुधारना चाहिए था। किसानों को पता नहीं था कि ये कानून लागू हो जायेगा और बड़े-बड़े आदमी किसान बन जाएंगे। बता दें कि कल वह कन्नौज में किसान मंडी में जाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि कल हर जिले में लगातार किसान यात्रा निकाली जाएगी।


क्या है तैयारी
अहिंसक होगा आंदोलन

किसान नेता बलदेव सिंह यादव ने कहा, ‘यह आंदोलन केवल पंजाब के किसानों का नहीं बल्कि पूरे देश का है।’ हमने आठ दिसंबर को भारत बंद का आह्वान किया है, जो सुबह आठ बजे से लेकर शाम तक चलेगा। इस दौरान दुकानें एवं कारोबार बंद रहेंगे। एंबुलेंस एवं आपात कार्य को बंद से छूट दी गयी है। गुजरात से करीब 250 किसान प्रदर्शन से जुड़ने के लिए दिल्ली आयेंगे।’ यादव ने सभी से यह सुनिश्चित करने की अपील भी की कि भारत बंद शांतिपूर्ण रहे।

उन्होंने कहा, ‘हम किसी को भी हिंसक होने की इजाजत नहीं देंगे और ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे। हम सभी से बंद का हिस्सा बनने का आह्वान करते हैं।’ केंद्र के नये कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हजारों किसान हरियाणा और उत्तर प्रदेश से लगती दिल्ली की सीमाओं पर डेरा डाले हुए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार उनकी मांगें नहीं मानती है तो वे आंदोलन तेज करेंगे और दिल्ली पहुंचने वाली और सड़कें बंद कर देंगे।

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