कोहरे की चादर ने बढ़ाई दलहन किसानों की परेशानी, बरतें सावधानी

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पंचायत खबर टोली
मऊ : सरकार द्वारा इस दलहन वर्ष बनाए जाने के दौरान मुख्य फसल अरहर सहित चना, मटर और मसूर का बढ़ावा दिए जाने की व्यापक कार्ययोजना बनाई गई। जमीन पर बदलाव भी दिख रहा है। किसान भाईयों ने जमकर सरकार के साथ कदम ताल मिलाया है जिसके परिणाम स्वरूप खरीफ में बरसात देर से होने की दशा में पूर्वोत्तर क्षेत्र में अरहर का क्षेत्रफल बहुत बढ़ा। निचली जमीनों पर भी इसकी व्यापक बुआई हुई है। लेकिन इस बीच रबी में अरहर में फूल अाने और चना, मटर व मसूर की वृद्धि के समय ही तन रही कोहरे की चादर फसल को व्यापक नुकसान पहुंचाएगी।

kohraaaविशेषज्ञ मानते हैं कि फूल झड़ने न खिलने की समस्या भी कोहरे के कारण होगा। ऐसे में फलियां कम बनने के साथ कमजोर भी होगी।इस दौरान तत्परता न बरतने पर व्यापक क्षति होगी। दलहनी फसल के लिए अभिशाप बना कोहरा किसानों के माथे पर शिकन पैदा कर रहा है। उपकृषि निदेशक डा.आशुतोष मिश्र बताते हैं कि जिले में कुल 14 हजार हेक्टेयर में दलहन का उत्पादन किया गया है। यह मौसम अरहर में फूल आने का है। इस वर्ष समय से पूर्व ही कोहरा का प्रभाव बढ़ गया है। ऐसे में फूल झड़ने के साथ खिलने की समस्या भी आएगी। किसानों को तत्काल हल्की सिंचाई कर चाहिए। इससे फूल का झड़ना रूक जाएगा।

kisan_nइस दौरान कीट नियंत्रण को लेकर भी बहुत सचेत रहना चाहिए। धूप होते ही फली छेदक कीट का प्रभाव बहुत तेजी से बढ़ेगा। खुली धूप में कीटनाशक का प्रयोग भी तत्काल करना लाभदायक होगा। दलहन वर्ष में विभाग द्वारा इसकी सभी प्रजातियों के उत्पादन में वृद्धि के लिए निरंतर प्रयास किया जा रहा है। कृषि रक्षा इकाई पर सभी कीटनाशक व रोग की दवाओं पर सरकार द्वारा 50 से 75 प्रतिशत तक अनुदान दिया रहा है। प्रतिकूल रहे में किसानों को इसका विशेष ध्यान रखना होगा।

adu-c-2उत्पादन को लेकर किसानों की चिंता बढ़ी
क्षेत्र के प्रगतिशील किसान नंद किशोर सिंह, राजेश सिंह किंकर, अभय मिश्र, पूर्व प्रधान हरेंद्र सिंह आदि बताते हैं कि खरीफ में बरसात देर से होने की दशा में अरहर की फसल अच्छी हुई है। इस दौरान ठंड के मौसम में कोहरा पहले ही आने इसके उत्पादन में आशातीत गिरावट का डर किसानों में समा गया है। नोटबंदी की दशा में मुख्य फसल गेहूं की बोआई के लिए परेशान किसानों के सामने दलहन फसल की सुरक्षा को लेकर भी आर्थिक बोझ उठाना होगा। अच्छी फसल होने के बाद भी मौसमी तेवर को देखते हुए दलहन के उत्पादन में गिरावट की आशंका बनी हुई है।

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