सात घंटे की माथापच्ची में ढ़ाई पग भी न बढ़ पाई अन्नदाता और हुक्मरान के बीच वार्ता..

मंगरूआ

नयी दिल्ली: सरकार के बुलावे पर अन्नदाता जब चौथे दौर की वार्ता के लिए विज्ञान भवन पहुंचे तो दिल्ली सहित देश के लोगों की निगाहें विज्ञान भवन की ओर तो थी ही,साथ ​ही दिल्ली के सभी बोर्डर को बंद कर चुके अन्नदाता भी सरकार बहादुर की तरफ उम्मीद की नजर से देख रहा था,उन्हें भरोसा था उनके नुमाईंदे गये हैं तो कुछ लेकर ही लौटेंगे। तय वक्त पर अन्नदाताओं के नुमाईंदे के तौर पर 41 किसान विज्ञान भवन पहुंच चुके थे। थोड़ी देर बाद सरकार के नुमाईंदे के तौर देश के कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर,सरकार के रेल मंत्री पियूष गोयल नुमाईंदगी करने पहुंच गये। उसके पहले उनकी देश के गृहमंत्री अमित शाह से बात हो चुकी थी।


अन्नदाता और हुक्मारान के बीच बातचीत शुरू हुई। कृषि बिल के पन्ने पलटे जाते रहे। किसानों ने सरकार के कहे मुताबिक अपनी आपत्तियां जतानी शुरू की। चाय भी आफर हुआ और लंच भी लेकिन अन्नदाता पानी पीने को भी राजी न था। बस वो एक ही सवाल के साथ आया था ​कृषि बिल ​किसानों के हित में नहीं सरकार इसे रद्द करे। ज्यादातर किसान नेताओं ने अपनी रूख बरकरार रखा हम अपनी पुरानी मांग पर अड़े हुए हैं। संशोधन हमें मंजूर नहीं है, हम तीनों कानूनों को वापस किए जाने तक अड़े हुए हैं। आंदोलन वापसी का कोई सवाल ही नहीं है।
सरकार की तरफ से बैठक में हुई बातों की जानकारी गृहमंत्री अमित शाह को दी जाती रही जबकी बैठक में शामिल कृषि मंत्री ने अपनी तरफ से किसानों के मान—मनौव्वल,समझाईश की भरसक कोशिश की। लेकिन जब किसान एक—एक कर किसान बिल की खामी गिनाने लगे तो ऐसा लग रहा था कि सरकार लोटा निकालने की तैयारी में बैठी हो लेकिन यहां तो पूरे कुएं में भाग हैं। ऐसे में या तो कुंआ ढ़क दिया जाए या फिर कुंए की पूरी तरह से उड़ाही हो।

अन्नदाता की चिंताओं की बाबत कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने कहा कि किसानों और सरकार ने अपने-अपने पक्ष रखे। हम लोग शुरू से ही बात कह रहे थे कि भारत सरकार को किसानों की पूरी चिंता है। सरकार को कोई अहंकार नहीं है। हम खुले मन से किसानों के साथ बातचीत कर रहे हैं। किसानों को चिंता है कि नए कानून से मंडी खत्म हो जाएगी। भारत सरकार यह विचार करेगी कि सशक्त हो और इसका उपयोग और बढ़े। जहां तक नए कानून का सवाल है, प्राइवेट मंडियों का प्रावधान है। प्राइवेट मंडियां आएंगी, लेकिन सरकार मंडी से कर की समानता हो, इसपर भी सरकार विचार करेगी। यह भी बात सामने आई कि जब मंडी के बाहर कारोबार होगा तो वह पैन कार्ड से होगा। इसलिए हम लोग ट्रेडर का रजिस्ट्रेशन हो, यह भी हम लोग सुनिश्चित करेंगे।


कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने आगे कहा कि किसानों ने कहा कि नए कानून में यह प्रावधान था कि कोई विवाद होता है तो वह एसडीएम कोर्ट में जाएगा। किसानों की चिंता है कि एसडीएम कोर्ट काफी छोटा कोर्ट है। उसे कोर्ट में जाना चाहिए। हम लोग इस दिशा में भी विचार करेंगे। किसानों ने पराली के ऑर्डिनेंस पर भी बातचीत की। सरकार इस विषय पर भी विचार करेगी।
किसान सवाल करते रहे। सरकार जवाब देती रही। लेकिन ऐसा लग रहा था दोनो एक दूसरे की न सुनने की हिदायत लेके आये हों। न तो अन्नदाता झुकने को तैयार था और न ही हुक्मरान कोई पुख्ता आश्वासन देने की स्थिती में। इस बीच यह मांग भी उठी कि कानून खत्म करने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया जाए। मसला इकलौते एमएसपी का नहीं, बल्कि कानून पूरी तरह वापस लेने का है। तय हुआ फिर 5 दिसंबर को बैठेंगे। इस बीच दिल्ली के सभी बोर्डर सिंघु , लामपुर,औचंडी, साफियाबाद, पियाओ मनिया और सबोली बॉर्डर दोनों तरफ से बंद रहे। रागिनी गायी जाती रही। बैरिकेंडिंग के दोनो ओर एक तरफ पुलिस बल तो दूसरी ओर किसान जमे रहे। नारे लगते रहे। रागिनी गायी जाती रही। शाम हो चुका था विज्ञान भवन गये किसान प्रतिनिधियों के लौटने का वक्त हो रहा था। खाने पकाने की तैयारी भी शुरू रही और इंतजार शुरू हुआ 5 दिसंबर का जब पांचवे दौर की बातचीत पर एक बार फिर से अन्नदाता और हुक्मरान बैठेंगे।

अन्नदाता की आपत्ति…हुक्मरान के जवाब
अन्नदाता— यानी मिनिमम सपोर्ट प्राइस बंद तो नहीं हो जाएगी?
हुक्मरान—चल रही थी, चल रही है और आने वाले वक्त में भी चलती रहेगी।
अन्नदाता— एपीएमसी यानी एग्रीकल्चर प्रोड्यूसर मार्केट कमेटी खत्म तो नहीं हो जाएगी?
हुक्मरान— प्राइवेट मंडियां आएंगी, लेकिन हम APMC को भी मजबूत बनाएंगे।
अन्नदाता—मंडी के बाहर ट्रेड के लिए पैन कार्ड तो कोई भी जुटा लेगा और उस पर टैक्स भी नहीं लगेगा।
हुक्मरान- ट्रेडर के रजिस्ट्रेशन को जरूरी करेंगे।
अन्नदाता—मंडी के बाहर ट्रेड पर कोई टैक्स नहीं लगेगा? हुक्मरान-एपीएमसी मंडियों और प्राइवेट मंडियों में टैक्स एक जैसा बनाने पर विचार करेंगे।
अन्नदाता-विवाद एसडीएम की कोर्ट में न जाए, वह छोटी अदालत है।
हुक्मरान— ऊपरी अदालत में जाने का हक देने पर विचार करेंगे।
अन्नदाता-नए कानूनों से छोटे किसानों की जमीन बड़े लोग हथिया लेंगे।
हुक्मरान-किसानों की सुरक्षा पूरी है। फिर भी शंकाएं हैं तो समाधान के लिए तैयार हैं।
अन्नदाता-बिजली संशोधित बिल और पराली जलाने पर सजा पर भी हमारा विरोध है।
हुक्मरान-सरकार विचार करने पर पूरी तरह राजी है।

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