कृषि कानून का फायदा बताते मोदी,​ कानून वापस लो की आवाज लगाता विपक्ष

मंगरूआ

नयी दिल्ली: कृषि कानूनों के समर्थन और विरोध में लामबंद हो रहे किसानो को भरोसा देने के लिए आज खुद देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब सामने आये और कहा कि गंगा और नर्मदा मैया की सौगंध सरकार अपने किसान भाईयों के खिलाफ नहीं जा सकती। ये जो ​कृषि कानून बनाए गये हैं वो किसानों के हित में हैं और विपक्ष किसानों को भड़काकर,गलत सूचनायें देकर उनका नुकसान कर रहा है। प्रधानमंत्री के बात से समर्थन कर रहे किसानों की धारणाएं इस कानून को लेकर और दृढ़ हुई होंगी ऐसा मानकर चला जा सकता है लेकिन दिल्ली के आसपास सड़क लगभग 22 दिन से सड़क घेर कर बैठे और कृषि बिल को वापस लेने की मांग पर अड़े किसान देश के सबसे बड़े नेता की बात से कितना इत्तफाक रखते हैं ये आने वाले दिन में पता चलेगा। हालांकि जो प्रतिक्रियाएं आ रही हैं उससे साफ पता चलता है कि किसान को प्रधानमंत्री के बात पर भरोसा नहीं हुआ है।


क्या कहा प्रधान मंत्री ने
मध्यप्रदेश के रायसेन में शिवराज सिंह चौहान द्वारा आयोजित कृषि सम्मेलन को वर्चुअली संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी बात विस्तार से रखी। एक तरफ उन्होंने कृषि कानून के फायदे गिनाए वहीं दूसरी तरफ इस 6 साल के मोदी राज में उनकी सरकार द्वारा किसान हित में किए गये काम और उठाए गये कदमों को विस्तार से रखा और लगे हांथो विपक्ष पर किसानों को भड़काने का आरोप लगाये हुए राजनीति करने की बात दुहराई।
एमएसपी खत्म ही करनी होती तो बढ़ाते क्यों
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “हमारी सरकार एमएसपी को लेकर इतनी गंभीर है कि हर बार, बुवाई से पहले एमएसपी की घोषणा करती है। उन्होंने कहा कि स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट लागू करने का काम हमारी ही सरकार ने किया। अगर हमें एमएसपी हटानी ही होती तो स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट लागू ही क्यों करते? पिछली सरकार ने अपने पांच साल में किसानों से लगभग 1700 लाख मिट्रिक टन धान खरीदा था। हमारी सरकार ने अपने पांच साल में 3,000 लाख मिट्रिक टन धान किसानों से एमएसपी पर खरीदा है।”
उन्होंने कहा कि मैं देश के प्रत्येक किसान को ये विश्वास दिलाता हूं कि पहले जैसे एमएसपी दी जाती थी, वैसे ही दी जाती रहेगी, एमएसपी न बंद होगी, न समाप्त होगी।


फैलाया जा रहा है झूठ..खत्म हो जाएगी मंडी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सभी विपक्षी दलों ने अपने घोषणापत्रों में कभी न कभी कृषि कानूनों का जिक्र किया। लेकिन अब राजनीतिक फायदे के लिए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं। नए कानूनों में हमने किसानों को सिर्फ इतना अधिकार दिया है कि वह अपनी फसल कहीं भी जाकर बेच सकते हैं। उसे जहां फायदा मिलेगा, किसान वहां जाकर बेच सकेगा। अगर किसान की मर्जी मंडी में फसल बेचने की है तो वह मंडी में ही जाकर अपनी फसल को बेचे। देश के हर किसानों को इसका लाभ मिलना चाहिए। किसानों को मंडियों से बांध कर सिर्फ पाप किया गया है। कानून लागू हुए 6 महीने हो गए हैं लेकिन देश में कोई मंडी बंद नहीं हुआ है। हम मंडियों के आधुनिकीकरण के लिए 500 करोड़ खर्च कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने किसानों को सावधान किया है कि जो हुआ ही नहीं है, उसके बारे में झूठ फैलाया जा रहा है। वैसे लोगों से बचिए। सच्चाई तो ये है कि हमारी सरकार एपीएमसी को आधुनिक बनाने पर, उनके कंप्यूटरीकरण पर 500 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च कर रही है। फिर ये एपीएमसी बंद किए जाने की बात कहां से आ गई उन्होंने कहा कि अगर किसी को शंका है तो हम किसानों से हर मुद्दे पर बात करने के लिए तैयार हैं। देश के किसानों का हित हमारे लिए सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। हमने कई विषयों पर देश के किसानों से बात की है। 25 दिसंबर को हम फिर से किसानों के साथ विस्तार से बात करेंगे।
उन्होंने कहा कि किसी ने मुझे एक अखबार की रिपोर्ट भेजी 8 मार्च 2019 की। इसमें पंजाब की कांग्रेस सरकार, किसानों और एक मल्टीनेशनल कंपनी के बीच 800 करोड़ रुपए के फार्मिंग एग्रीमेंट का जश्न मना रही है। पंजाब के किसान की खेती में ज्यादा निवेश हो, ये हमारी सरकार के लिए खुशी की ही बात है।


कांग्रेस पर बरसे मोदी
हजारों की संख्या में उपस्थित किसानों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस सहित तमाम किसानों को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा, “हमारे देश में किसानों के साथ धोखाधड़ी का बहुत ही बड़ा उदाहरण है, कांग्रेस सरकारों द्वारा की गई कर्जमाफी। जब 2 साल पहले मध्य प्रदेश में चुनाव होने वाले थे तो 10 दिन के भीतर कर्जमाफी का वादा किया गया था. कितने किसानों का कर्ज माफ हुआ?”
उन्होंने किसानों से क​हा कि, देश के किसानों को उन लोगों से जवाब मांगना चाहिए जो पहले अपने घोषणापत्रों में इन सुधारों की बात लिखते रहे, किसानों के वोट बटोरते रहे, लेकिन किया कुछ नहीं। सिर्फ इन मांगों को टालते रहे और देश का किसान, इंतजार ही करता रहा।
साथ ही मोदी ने किसानों को बीते दिनों की याद दिलाते हुए कहा कि देश के किसानों को याद दिलाऊंगा यूरिया की। याद करिए, 7-8 साल पहले यूरिया का क्या हाल था? रात-रात भर किसानों को यूरिया के लिए कतारों में खड़े रहना पड़ता था या नहीं? कई स्थानों पर, यूरिया के लिए किसानों पर लाठीचार्ज की खबरें आती थीं या नहीं?


याद कीजिए बी​ते दिनों को
अगर पुरानी सरकारों को चिंता होती तो देश में 100 के करीब बड़े सिंचाई प्रोजेक्ट दशकों तक नहीं लटकते। सोचिए, बांध बनना शुरू हुआ तो पच्चीसों साल तक बन ही रहा है। बांध बन गया तो नहरें नहीं बनी, नहरे बन गई तो नहरों को आपस में जोड़ा नहीं गया। राजनीति के लिए किसानों का उपयोग करने वाले लोगों ने किसान के साथ क्या बर्ताव किया, इसका एक और उदाहरण है, दलहन की खेती। 2014 के समय को याद कीजिए, किस प्रकार देश में दालों का संकट था. देश में मचे हाहाकार के बीच दाल विदेशों से मंगाई जाती थी।


क्रेडिट नहीं किसानो का भला चाहिए
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘मैं सभी राजनीतिक दलों को कहना चाहता हूं कि आप अपना क्रेडिट अपने पास रखिए। मुझे क्रेडिट नहीं चाहिए। मुझे किसान के जीवन में आसानी चाहिए, समृद्धि चाहिए, किसानी में आधुनिकता चाहिए। कृपा करके किसानों को बरगलाना, उन्हें भ्रमित करना छोड़ दीजिए। अचानक भ्रम और झूठ का जाल बिछाकर अपनी राजनीतिक जमीन जोतने के खेल खेले जा रहे हैं। किसानों के कंधे पर बंदूक रखकर वार किए जा रहे हैं।’

बावजूद इसके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आंदोलन कर रहे किसानों को अपने संबोधन में ये संदेश ​दिया कि सरकार किसानों की हर आशंका और आपत्ति का समाधान करने को तैयार है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हम किसानों से वार्ता करने को तैयार हैं।

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