प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ में ‘काम की बात’ तलाशते प्रदर्शनकारी किसान

पंचायत खबर टोली

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नयी दिल्ली: एक तरफ कृषि कानून को रद्द करने और अपने मनमुताबिक संशोधन को लेकर देश भर के किसान विशेष रूप से पंजाब और हरियाणा के किसान दिल्ली के विभिन्न प्रवेश द्वारों पर हजारों की संख्या में न सिर्फ दस्तक दे चुके हैं, वैसे समय में देश के सर्वोच्च नेता द्वारा कृषि कानूनों पर अपनी राय रखना और उसे देश के किसानों के हित में बताना निश्चित रूप से लोगों का ध्यान खींचता है। ​भारत के प्रधान मंत्री अपने मासिक ‘मन की बात’ कार्यक्रम में वैसे तो कई बाते कहीं लेकिन जब उन्होंने कृषि कानूनों की बात की तो देश के अन्नदाता का ध्यान उधर ही लगा हुआ था और वो प्रधानमंत्री की बातों को बहुत ध्यान से सुनते हुए दिखे।


क्या कहा प्रधानमंत्री ने
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में नए कृषि कानून पर भी बात की। उन्होंने कहा कि भारत मे खेती और उससे जुड़ी चीजों के साथ नए आयाम जुड़ रहे है। बीते दिनों हुए कृषि सुधारों ने किसानों के लिए नई संभावनाओं के द्वार भी खोले हैं। बरसों से किसानों की जो मांग थी, जिन मांगों को पूरा करने के लिए किसी न किसी समय में हर राजनीतिक दल ने उनसे वादा किया था। वो मांगे पूरी हुई हैं। नरेंद्र मोदी ने कहा कि काफ़ी विचार विमर्श के बाद भारत की संसद ने कृषि सुधारों को कानूनी स्वरुप दिया। इन सुधारों से न सिर्फ किसानों के अनेक बन्धन समाप्त हुए हैं, बल्कि उन्हें नए अधिकार भी मिले हैं और नए अवसर भी मिले हैं। इन अधिकारों ने बहुत ही कम समय में किसानों की परेशानियों को कम करना शुरू कर दिया है।
प्रधानमंत्री ने महाराष्ट्र के किसान जितेंद्र भोईजी की चर्चा की
कृषि कानून से हो रहे फायदे को समझाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यक्रम के दौरान बताया कि कैसे महाराष्ट्र के धुले जिले के किसान जितेन्द्र भोइजी को नए कृषि कानूनों से फायदा हुआ। प्रधानमंत्री ने बताया, “जितेंद्र भोइजी ने मक्के की खेती की थी औऱ सही दामों के लिए उसे व्यापारियों को बेचना तय किया। फसल की कुल कीमत तय हुई करीब 3.32 लाख रुपये। जितेंद्र को पच्चीस हजार रुपये एडवांस भी मिल गए थे। तय ये हुआ कि बाकी का पैसा उन्हें 15 दिन में चुका दिया जाएगा लेकिन बाद में परस्थितियां ऐसी बनी कि उन्हें बाकी का पेमेंट नहीं मिला।”
उन्होंने कहा, “किसान से फसल खरीद लो, महीनों-महीनों पेमेंट न करो, संभवत: मक्का खरीदने वाले बरसों से चली आ रही उसी परंपरा को निभा रहे थे। इसी तरह चार महीने तक जितेंद्र का पेमेंट नहीं हुआ। इस स्थिति में उनकी मदद की सितंबर में जो पास हुए हैं, जो कृषि कानून बने हैं- वो उनके आए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अब, जब, ऐसे कानून की ताकत हमारे किसान भाई के पास थी, तो, उनकी समस्या का समाधान तो होना ही था, उन्होंने शिकायत की और चंद ही दिन में उनका बकाया चुका दिया गया| यानि कि कानून की सही और पूरी जानकारी ही जितेन्द्र जी की ताकत बनी।
उन्होंने कहा कि कानून में एक और बहुत बड़ी बात है। इस क़ानून में ये प्रावधान किया गया है कि क्षेत्र के एसडीएम को एक महीने के भीतर ही किसान की शिकायत का निपटारा करना होगा। अब जब ऐसे कानून की ताकत हमारे किसान भाई के पास थी, तो उनकी समस्या का समाधान तो होना ही था। उन्होंने शिकायत की और चंद ही दिन में उनका बकाया चुका दिया गया।
उन्होंने कृषि की पढ़ाई कर रहे छात्रों से गांवों के किसानों को कृषि सुधारों और आधुनिक कृषि को लेकर जागरुक कर देश में हो रहे बदलाव का सहभागी बनने की अपील की।


मोहम्मद असलम की सफलता को सामने रखा
प्रधानमंत्री ने कहा कि किसानों में जागरूकता बढ़ाने का ऐसा ही एक काम कर रहे हैं, राजस्थान के बारां जिले में रहने वाले मोहम्मद असलम जी। ये एक किसान उत्पादक संघ के सीईओ भी हैं। जी हां, आपने सही सुना, किसान उत्पादक संघ के सीईओ। उन्होंने कहा कि उम्मीद है बड़ी बड़ी कम्पनियों के सीईओ को ये सुनकर अच्छा लगेगा कि अब देश के दूर दराज वाले इलाको में काम कर रहे किसान संगठनों मे भी सीईओ होने लगे हैं। मोहम्मद असलम जी ने अपने क्षेत्र के अनेकों किसानों को मिलाकर एक व्हाट्सऐप ग्रुप बना लिया है। इस ग्रुप पर वो हर रोज़, आस-पास की मंडियो में क्या भाव चल रहा है, इसकी जानकारी किसानों को देते हैं। उन्होंने कहा कि खुद उनका एफपीओ भी किसानों से फ़सल खरीदता है, इसलिए, उनके इस प्रयास से किसानों को निर्णय लेने में मदद मिलती है।


देवी अन्नपूर्णा की प्रतिमा भारत वापस आ रही है
इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह जानकारी भी साझा किया की देवी अन्नपूर्णा की प्रतिमा भारत वापस आ रही है। माता अन्नपूर्णा की प्रतिमा की तरह ही, हमारी विरासत की अनेक अनमोल धरोहरें, अंतर्राष्ट्रीय गिरोंहों का शिकार होती रही हैं। ये गिरोह अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इन्हें, बहुत ऊंची कीमत पर बेचते हैं। अब, इन पर, सख्ती तो लगायी ही जा रही है, इनकी वापसी के लिए, भारत ने अपने प्रयास भी बढ़ायें हैं। मैं कनाडा की सरकार और इस पुण्य कार्य को सम्भव बनाने वाले सभी लोगों का इस सहृदयता के लिये आभार प्रकट करता हूं। माता अन्नपूर्णा का, काशी से, बहुत ही विशेष संबंध है | अब, उनकी प्रतिमा का, वापस आना, हम सभी के लिए सुखद है।


स्वाभाविक है देश के अन्य लोगों की तरह कृषि कानून में बदलाव को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों की नजर भी प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ में कृषि कानूनों को लेकर कही गई बातों की तरफ होगी। ये अन्नदाता प्रधानमंत्री की बात से कितना इत्तफाक रखते हैं,ये आने वाले दिनों में पता चलेगा जब सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच बातचीत होगी। इस बीच किसानों ने अमित शा के दिल्ली के बुराड़ी मैदान में जाकर प्रदर्शन करने की सलाह को नकार दिया है और वे बोर्डर पर ही जमे हुए हैं।

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