किसान संगठनों की दो टूक…बुराड़ी नहीं जंतर-मंतर जायेंगे नहीं तो करेंगे दिल्ली की नाकाबंदी

पंचायत खबर टोली

नयी दिल्ली: केंद्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ हल्लाबोल की शक्ल में पिछले चार दि​नों से घर से निकले किसान प्रदर्शनकारियों ने रास्तों की तमाम बाधाओं को पार कर दिल्ली के सभी प्रवेश द्वारों पर डेरा डाल लिया है। घर से निकले थे ये कहते हुए कि दिल्ली जाना है लेकिन आंदोलन की गाड़ी बोर्डर पर फंस गई है। ये स्थिति तब है जब केंद्र सरकार की तरफ से बातचीत का खुला निमंत्रण मिला है और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की तरफ और केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की तरफ से साफ कहा गया है कि किसान दिल्ली पुलिस की तरफ से तय जगह पर जायें और वहां उनको सारी सुविधा मिलेगी और बातचीत की प्रक्रिया अगले दिन ही शुरू हो जायेगी।

लेकिन सरकार के इस प्रस्ताव पर अपनी असहमती जताते हुए किसान प्रतिनिधियों ने रविवार को आपस में बैठक कर यह तय किया कि वे राष्ट्रीय राजधानी के बुराड़ी मैदान में नहीं जाएंगे और दिल्ली की सीमाओं पर डटे रहेंगे। उन्होंने कहा कि हमें पता लगा है कि वह मैदान नहीं है, ओपन जेल है। इतना ही नहीं किसान प्रतिनिधियों ने अमित शाह के बुराड़ी जाने की सलाह को शर्त बताया है और कहा है कि बातचीत शर्तों के दायरे में नहीं होगी। केंद्र सरकार को किसानों के साथ बातचीत करने के लिए कोई शर्त नहीं थोपनी चाहिए। हालांकि किसान संगठन जंतर—मंतर पर जाने और अपना धरणा प्रदर्शन जारी रखने की बात कह रहे हैं।


यह पूछे जाने पर कि कुछ किसान बुराड़ी पहुंच गये हैं किसान नेताओं ने कहा कि बुराड़ी वे बुराड़ी में मौजूद अपने साथियों को वापस बुलाएंगे। बुराड़ी में किसानों का एक जत्था पहले से ही डेरा डाले हुए है। किसान संगठन का का कहना है कि वे दिल्ली घेरने आए हैं, न कि दिल्ली में घिर जाने के लिए।
आगे की राह क्या होगी
आगे की रणनीति के विषय में किसान प्रतिनिधियों ने कहा कि हम ओपन जेल में जाने की बजाय हम सोनीपत, रोहतक का बहादुर गढ़, जयपुर से दिल्ली हाईवे, मथुरा-आगरा से दिल्ली हाईवे, गाजियाबाद से आने वाला हाईवे जाम करेंगे और दिल्ली की घेराबंदी करेंगे। सभी 5 प्वाइंट पर हम धरना देंगे। किसानों ने कहा कि जिसको बातचीत करने है वो यहीं आयेगा नहीं तो हम यहां डटे रहेंगे। उनका कहना है कि हमने रहने के लिए ट्रैक्टर-ट्राली को घर जैसा बना रखा है। हमारे पास इतना राशन है कि 4 महीने भी हमें रोड पर बैठना पड़े, तो बैठ लेंगे। हम लंबे दौर की तैयारी करके आए हैं।


इस बीच आंदोलन कारी किसानों के बुराड़ी न जाने के फैसले के बाबत जब नरेंद्र सिंह तोमर से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा की भारत सरकार ने किसान प्रतिनिधियों से 3 दौर की वार्ता कर चुकी है। चौथे दौर में 3 दिसंबर को वार्ता होनी थी। सरकार खुले मन से बातचीत करने को तैयार है लेकिन किसानों को बातचीत का माहौल बनाना चाहिए। हम हर मसले पर बात करने को तैयार हैं।
हालांकि किसान संगठनों के आंदोलन को लेकर इसे राजनीतिक आंदोलन बताया जा रहा है लेकिन किसानों ने एक बार फिर दुहराया कि ये किसानों का आंदोलन है। उन्होंने कहा कि हमने एक कमेटी बनाई है। यही पांचों प्वाइंट पर धरने-प्रदर्शन का संचालन करेगी। किसी भी राजनीतिक दल को स्टेज पर बोलने की इजाजत नहीं है। कांग्रेस, आप या कोई भी राजनीतिक दल के लोग हमारे स्टेज पर स्पीकर के तौर पर नहीं बोलेंगे। इनके अलावा दूसरे संगठनों के जो संचालन कमेटी के तय नियमों को मानेंगे, उन्हें बोलने की इजाजत दी जाएगी।
एक तबका यह भी आरोप लगाने लगा है कि किसान आंदोलन की गाड़ी पटरी से उतर गई लगती है। किसानों को बातचीत नहीं करनी उन्हें हाईवे जाम करना है। साफ है धीरे-धीरे जो मंशा जताई जा रही थी वो सामने आ रही है। जिस बात को किसान शर्त बता रहे हैं वो खुले मन से कही गई बात थी और जिस जगह को किसान ओपन जेल बता रहे हैं उसी एतिहासिक मैदान में प्रत्येक वर्ष साल में दो बार निरंकारियों का समागम लगता है…ऐसे में किसान आंदोलन धीरे-धीरे अपना सपोर्ट खोता जायेगा।

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