बढ़ रहा है कारोबार लेकिन ब्रांड वैल्यू पर खड़े नहीं उतर रहे पतंजलि के उत्पाद

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संतोष कुमार सिंह
नयी दिल्ली:पिछले दिनों पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण की अचानक तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें ऋषिकेश स्थित एम्स अस्पताल लाया गया। इस बात को लेकर सोशल मीडिया पर योग गुरू रामदेव और पतंजलि का मजाक भी उड़ाया गया। कहा गया कि जब आचार्य बालकृष्ण को अपने ईलाज के लिए एम्स में जाना पड़ा तो फिर पतंजलि का यह दावा कैसे सटीक हो सकता है कि योग और आर्युवेद के जरिए वे सभी बीमारियों का ईलाज करने में सक्षम है। इस बीच एक आरटीआई के जरिये यह खुलासा हुआ है कि योग गुरु बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि के करीब 40% प्रोडक्ट हरिद्वार की एक लैब में क्वालिटी टेस्ट में फेल हो गए हैं। दैनिक हिन्दुस्तान में एक छपी खबर के मुताबिक 2013 से 2016 के बीच 82 सैंपल लिए गए थे, जिसमें से 32 उत्पाद की क्वालिटी मानकों पर खरी नहीं उतरी है। इसमें पतंजलि आंवला दिव्य जूस और शिवलिंगी बीज भी शामिल है।

आपको बता दें कि पिछले महीने सेना की कैंटीन ने भी पतंजलि के आंवला जूस पर बैन लगा दिया था, क्योंकि यह पश्चिम बंगाल की पब्लिक हेल्थ लैब की जांच में फेल पाया गया था। उत्तराखंड की स्टेट गर्वनमेंट लैब रिपोर्ट के मुताबिक, आंवला जूस की pH वैल्यू तय मानक से नीचे पाई गई. pH वैल्यू सात से नीचे होने पर एसिडिटी और अन्य मेडिकल परेशानियां हो सकती हैं। वहीं आरटीआई खुलासे के अनुसार शिवलिंगी बीज में 31.68 फीसदी विदेशी तत्व पाए गए हैं। रामदेव के सहयोगी और पतंजलि के CEO आचार्य बालकृष्ण ने लैब की रिपोर्ट को गलत बताया है और कहा कि यह पतंजलि ब्रांड की छवि को धूमिल करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि शिवलिंगी बीज प्राकृतिक है, उसमें हम कैसे मिलावट कर सकते हैं?

पतंजलि उत्पादों के अलावा आर्युवेदिक दवाओं के 18 नमूनों जैसे कि अविपटट्टिका चूर्ण, तलसदाय चूर्ण, पुष्नलुगा चिकना, लवन भास्कर चूर्ण, योगराज गुग्गुलु, लक्शा गग्गुलू भी क्वालिटी मानकों पर कमजोर पाए गए हैं। पिछले कुछ सालों में उत्तराखंड आर्युवेद उत्पादों के प्रमुख केंद्र के रूप में उभरा है। हरिद्वार और ऋषिकेश में 1,000 से ज्यादा डीलर, निर्माता और आर्युवेद दवाओं के आपूर्तिकर्ता हैं।

निर्माताओं में से एक, माइनर फॉरेस्ट प्रोडक्शन प्रोसेसिंग एंड रिसर्च सेंटर (एमएफपी-पीआरसी) ने कहा कि दवाओं को उत्तराखंड आयुष विंग की मंजूरी के बाद ही आपूर्ति की गई थी। आयुष मंत्री हरक सिंह रावत ने कहा कि उनका विभाग उत्पाद की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए अधिक नियमित परीक्षण करने की प्रक्रिया में है। उन्होंने कहा, हमारे पास नमूनों का परीक्षण करने के लिए हरिद्वार में एक प्रयोगशाला है लेकिन इसमें आवश्यक कर्मचारियों की कमी है। हमने पांच नए केमिस्ट्स नियुक्त किए हैं और भर्ती की प्रक्रिया में हैं।


हालांकि पतंजलि ने जबसे रिटेल सेक्टर और उपभोक्ता उत्पादों में कदम रखा है इसकी पहुंच गांव—गांव में हो गई है।पतंजलि आयुर्वेद आज देश की सबसे बड़ी एफएमसीजी कंपनियों को टक्कर दे रही है। महज एक दशक पुरानी इस कंपनी ने 80 सालों से भारत में मौजूद हिंदुस्तान युनिलीवर (एचयूएल) की नींव हिला कर रख दी है। इसके पीछे कारण है कि स्वदेशी माल की ब्रांडिंग के साथ पतंजलि लोगों के बीच अपनी छवि ‘घरेलू कंपनी’ के रूप में बनाने में सफल रही है। ये कुछ उत्पाद हैं जिसकी बिक्री काफी होती हैं, और उपभोक्ताओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं। ये हैं गाय का देसी घी,दंत कांति मंजन,आयुर्वेदिक दवाएं,केशकांति शैम्पू व साबुन। आज पतंजलि के डिस्ट्रिब्यूटर्स की संख्या 3,500 है, जो देशभर में 47,000 रिटेल काउंटर्स को उत्पादों की आपूर्ति करते हैं। पंतजलि की दुकाने मैंगी कैंडी से लेकर आयुर्वेदिक दवाइयां तक बेचती हैं। कंपनी का दावा है कि उसकी दवाएं जोड़ों के दर्द को ठीक करती हैं। ये दवाएं ज्यादार ग्रामीण इलाकों में काफी लोकप्रिय हैं।लेकिन इसके बावजूद सच्चाई यही है कि मल्टीनेशनल कंपनियों को कपालभाति कराने की उनकी मंशा के उलट खुद की कंपनी पतंजलि की मुश्किल में आ गई है। रामदेव ने वर्ष 2018-19 तक बीस हजार करोड़ रुपए का लक्ष्य रखा था लेकिन उलटा बिक्री बीते साल से भी 10 प्रतिशत कम हो गई। कंपनी की बिक्री 10 हजार करोड़ रुपए से घटकर करीब 8.1 हजार करोड़ रुपए हो गई है। इस तरह से बाबा रामदेव के कारोबार पर नोटबंदी ओर जीएसटी का असर हुआ है। ऐसे में यदि आरटीआई से हुये खुलासे जिसमे पतंजलि के उत्पाद सैंपल सर्वे में पास नहीं हो पा रहे निश्चित रूप से चिंताजनक है। विशेष रूप से उन उपभोक्ताओं के लिए जो आंख मूद कर बाबा रामदेव और पंतजलि पर भरोसा करते हैं।

 

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