दिल्ली बॉर्डर पर जमे अन्नदाता, कृषि मंत्री ने बुलाई किसान यूनियन की बैठक

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पंचायत खबर टोली

नयी दिल्ली: पिछले 5 दिनों से दिल्ली के विभिन्न बोर्डर पर हजारों की संख्या में कृषि कानून के खिलाफ प्रदर्शनकारी किसानों को केंद्रीय कृषि मंत्री ने बातचीत का न्योता दिया है। तोमर ने कहा ​है कि 1 दिसंबर को दोपहर 3 बजे विज्ञान भवन में किसान यूनियन की बैठक बुलाई है। हालांकि इस बात की चर्चा सुबह से ही थी कि सरकार किसानो से संपर्क में है और किसान नेताओं को देश के गृहमंत्री ने किसान नेताओं को बातचीत के लिए बुलाया है।
अमित शाह ने किया किसान नेताओं को फोन
किसान आंदोलन को खत्म करने के लिए केंद्र सरकार एक्टिव हुई है। भारतीय किसान यूनियन (डकौंदा) के अध्यक्ष बूटा सिंह ने दावा किया है कि गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार दोपहर को उनसे बात की है और आधिकारिक बातचीत का भरोसा दिया है और लेटर देने की बात कही है।


बूटा सिंह के मुताबिक, अमित शाह ने दोपहर करीब 12.30 बजे फोन किया और बातचीत के बारे में पूछा। हालांकि, किसान नेता की ओर से बुराड़ी जाने की शर्त मानने से इनकार किया गया। अमित शाह ने इस मसले पर फिर भी बात करने की हामी भर दी है और कहा है कि वो शाम तक वार्ता के लिए लेटर भेजेंगे, ऐसे में कल आधिकारिक तौर पर किसानों और सरकार के बीच बातचीत होने की उम्मीद है।
इसके बाद देर रात नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि किसानों को कल दोपहर तीन बजे बातचीत के बुलाया है। पहले भी अमित शाह ने किसानों से बुराड़ी के मैदान में जाने की अपील की थी, उसके बाद बीते दिन बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के घर पर कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, राजनाथ सिंह, अमित शाह की साझा बैठक हुई थी।
किसान भले ही कह रहे हैं कि उनके आंदोलन का राजनीतिक दल से कोई लेना देना नहीं है। लेकिन राजनीतिक दल किसानों को उकसाने या यू कहें कि किसान आंदोलन के समर्थन के नाम पर जिस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं उससे साफ है कि विपक्षी दल नहीं चाहते कि किसान और सरकार में सहमती बने।


वामपंथी किसान संगठन आंदोलन में होंगे शामिल
देश की वामपंथी पार्टियों ने किसान आंदोलन को समर्थन देने का ऐलान किया है। माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने जारी बयान में लेफ्ट संगठनों को एकजुट होने और किसान आंदोलन को सपोर्ट करने का आह्वान किया। सीताराम येचुरी ने कहा कि वामपंथी दल देशभर में सक्रिय अपने संगठनों को एकजुट करें और किसान आंदोलन को समर्थन दें। उन्होंने इसके लिए किसान संगठन, कृषि मजदूर संगठनों और ट्रेड यूनियन का आह्वान किया।
कांग्रेस ने कहा विश्वासघात कर रही है सरकार

कांग्रेस नेता सुरजेवाला ने कहा कि किसान विश्वासघात न स्वीकार करता, न माफ़! काशी की पवित्र धरती पर जा कर 62 करोड़ किसान-मज़दूरों को बरगलाने की आपकी कोशिश ने एक बार फिर किसान और उसकी मेहनत का अपमान किया है।मरहम लगाना तो दूर आप घाव पर घाव दिए जा रहे हैं। हमारा सीधा कहना है कि मोदी जी किसानों के साथ छल कपट और षड़ंयत्र करना बंद कीजिए और पूर्वाग्रह छोड़ इन 3 खेती विरोधी काले कानूनों को खत्म करने के लिए सीधे मन से बात कीजिए!

ऐसे में देखा जाना होगा कि कल जब ​किसान नेता सरकार के साथ बातचीत के लिए बैठेंगे तो इस मसले का क्या हल निकलता है।

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