तालाब/झील/जोहर संरक्षण

कदम-कदम पर कुओं का शहर कहे जाने वाले पटना में ढूंढ़े नहीं मिलते कुएं

अमरनाथ झा पटना: बरसात के दिनों में जलभराव के कारण जब वर्तमान पटना में नारकीय स्थि​ती हो जाती है और कई-कई दिनों तक सड़क पर पानी जमा रहता है तो याद आता है कुओं का शहर पटना से जुड़ा अतीत और उससे जुड़ी सुखद स्मृतियां। तब शायद यह अंदेशा बहुत कम लोगों को होता होगा …

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बारह वर्ण, 22 टोले में बसा है मुजफ्फरपुर जिले का जारंग पश्चिमी पंचायत.. हरेक जाती के टोले में अलग-अलग कुआं

अमरजीत पासवान गायघाट: मुजफ्फरपुर जिले का असिया गांव। यह गांव गायघाट प्रखंड के जारंग पश्चिम पंचायत में है। यदि पूरे पंचायत को केंद्र में रखकर परंपरागत जल स्रोतों मसलन, कुएं,तालाब, पोखर, मन यानी न​दी जैसे साधनों का जल आडिट आपके सामने रखूं तो सबसे पहले जारंग पश्चिमी पंचायत के से जुड़े गांवों की चर्चा समीचिन …

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पटना जिले के परसा गांव के कुओं और पानी की व्यवस्था ने यूं बदला ग्रामीण जीवन

प्रतिमा कुमारी पासवान पानी रे पानी,तेरी भी ऐसी कहानी,तुझसे है जीवनधारा,लेकिन मानवों ने ही किया तेरा भी वारा न्यारा, सारे पाप भी तुझमें धोए,सभी अनुष्ठानो में भी लेते तेरा सहारा,जिससे पूरा जीवन से मरण तक बिना पानी बिन जीवन शून्य है। तब भी पानी को पूंजीपतियों के हाथों बेच दिया जाता है, पानी ही जीवन …

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सुरवारि टोला से सैदपुर मठिया तक (झौवा पंचायत) के कुएं-तालाब का ऑडिट

  हरेन्द्र प्रसाद सिंह  जल और जीवन अभिन्न हैं। मानव और कुएं का संबंध आदिकाल से प्रमाणित होता है। जल बिन जीवन की कल्पना व अस्तित्व असंभव है। जल प्रकृति की अनुपम देन है। अमृतसो, वह भी पर्याप्त। आदिकाल से मानव जल स्रोतों के निकट अपना आश्रय बनाकर रहता आया है। नदी-समुद से दूर जब …

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परंपरागत कुओं को बिसरा.. हर घर नल जल तक सरपट दौड़ता बोधा छपरा,गोराईंपुर और पकौलिया गांव का जल ऑडिट

निरंजन कुमार सिंह पूरूब के चंदरिया से निकल अंगरिया, लेहू अईसन भईल आसमान गांव के ईनारवा पर लड़िकन ​सब के टोलियां गोल—गोईयां बांटी खेले गुल्ली, डंडा,गोलियां… खैर अब गांव के ईनार यानी कुओं पर लड़कों की टोली नहीं दिखाई देती और न ही दिखाई देती हैं पर्व-त्योहार, शादी-ब्याह के मौके पर कुआं पूजती स्त्रियां। उपरोक्त …

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वैशाली के गराही ग्राम पंचायत और उसके आसपास के जल स्रोतों का ऑडिट..दूसरा भाग

डॉ. शंभु कुमार सिंह जैसाकि पहले भाग में वर्णन किया गया है, गराही ग्राम पंचायत में जल स्रोतों की कोई कमी नहीं रही। हालांकि इस पंचायत में कोई नदी नहीं बहती है परंतु नदी जैसा ही नजारा बरसात में चौरों का होता था। मोहिउद्दीन पुर गराही और चक हुदहुद गांवों के पश्चिम उत्तर पानी का …

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वैशाली के गराही ग्राम पंचायत और उसके आसपास का जल स्रोतों (कुआं) का ऑडिट

डॉ शंभु कुमार सिंह वैशाली जिलान्तर्गत गराही ग्राम पंचायत पड़ता है जिसमें मुकुंदपुर गराही ,महिउद्दीनपुर गराही, कमालपुर, चकमलही जो दरअसल चकबाजो मलाही है, बंगरा, मेथुरा पुर और धंधुआ का लंका टोला मुख्यतः आता है। गांव में पहले  पीने हेतु पानी के लिये केवल कुआं का ही उपयोग किया जाता था। गराही छोटा सा ही गांव …

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गांव में ही मिल रहा है रोजगार, जल-जीवन-हरियाली योजना बन रहा है जीविका का आधार

मंगरूआ पटना: लॉकडाउन के कारण जिस तरह से प्रवासी मजदूर गांव लौट रहे हैं वैसे में बाहर से अपने गांव लौटे ग्रामीणों को लेकर एक तरफ गांव वालों के मन में इनके संक्रमित होने को लेकर आशंका के बादल तो हैं, वहीं इनके लौटने से गांव में चहल पहल है। कहीं क्वारंटिन सेंटर सजा हुआ …

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जखनी गांव के देश का पहला जलग्राम बनने की कथा

उमाशंकर पांडे अक्सर कहा जाता है कि ‘हिम्मते मरदा, मददे खुदा’। लेकिन एक मर्द ही क्यों पूरा का पूरा गांव, और न​ सिर्फ मर्द बल्कि स्त्री पुरूष जब  अपने गांव की तकदीर बदलने में लग जायें तो सिर्फ खुदा ही क्यों, पूरी कायनात उसके सामने नतमस्तक होती है और गांव वालों की खुद के परिश्रम …

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पानी से आर्सेनिक हटाने में मददगार हो सकते हैं कृषि अपशिष्ट

शुभ्रता मिश्रा भारतीय वैज्ञानिकों ने कृषि अपशिष्टों के उपयोग से ऐसे जैव अवशोषक बनाए हैं, जो प्रदूषित जल से आर्सेनिक को सोखकर अलग कर सकते हैं। वाराणसी स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (बीएचयू) और लखनऊ स्थित अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान के शोधकर्ताओं द्वारा एक ताजा अध्ययन के दौरान विकसित इन अवशोषकों को तैयार करने में अमरूद …

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