गुवाहाटी: मेरा दिल टूटा अषाढ़ में,
और घर बह गया बाढ़ में…
देश के कई ईलाकों में मानसून दस्तक दे रहा है। वहीं कई ईलाकों में मानसून पूरे उफान पर है। नदियां अपने रौद्र रूप में तो हैं तो कहीं बाढ़ अपने विकरालता से तबाही मचाने को आतुर है। असम के कई ईलाके बाढ़ के चपेट में हैं तो नेपाल की उफनती हुई नदियों द्वारा बिहार के नदियों में पानी का सैलाब लाना प्रत्येक वर्ष की कहानी है। जैसे—जैसे मानसून आगे बढ़ेगा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और देश के अन्य राज्यों में भी बरसात का पानी नदियों में उतरती नजर आएंगी। लेकिन जमीनी हकीकत ये दो पंक्तियां सामने लाती हैं
बाढ़ कैसे, किस हद तक तबाही मचाती है,
उन गावों से पूछों जो नदियों के किनारे है।।
तो सूरते हाल ये है कि देशभर में मानसून अब रफ्तार पकड़ने लगा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक उत्तर भारत के कई हिस्सों में आने वाले दिनों में इसका प्रभाव देखने को मिलेगा। असम में बाढ़ का प्रकोप जारी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक मानसून के इस मौसम में, विशेषकर बाढ़ प्रभावित हिस्सों में पानी की गंदगी के कारण कई तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। बाढ़ के कारण होने वाली मौतों का एक प्रमुख कारण दूषित पानी को भी माना जा सकता है। इस खतरे को देखते हुए सरकार और प्रशासन को प्रभावित लोगों तक साफ पीने का पानी पहुंचाने का प्रबंध करना चाहिए। लेकिन इन सब के बीच एक सच्चाई यह भी है कि
बाढ़ की मुसीबत में जो फँसा है उसका साथ बन,
निकाल उसे मुसीबत से तू खुदा का हाथ बन।।
यूनिसेफ ने लगाए जल फिल्टरेशन यूनिट्स
तो असम के कछार के ईलाके में जहां गांव के गांव जलमग्न हैं और मुसीबत में फंसी आबादी को कम से कम शुद्ध पेयजल मुहैया कराया जा सके इस दिशा में अभिनव पहल करते हुए यूनाइटेड नेशन्स इंटरनेशनल चिल्ड्रेन्स इमरजेंसी फंड (यूनिसेफ) असम ने डीडीएमए कछार और पार्टनर ऑक्सफैम इंडिया के साथ मिलकर यहां चार पानी के फिल्टरेशन यूनिट्स स्थापित किए हैं। दो यूनिट्स को कटिगोरा राजस्व सर्कल में, एक सिलचर टाउन और एक को सोनाई राजस्व सर्कल में लगाया गया है। इससे प्रभावित लोगों को पर्याप्त मात्रा में शुद्ध पेयजल प्राप्त हो सकेगा।
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700 से 1000 लीटर तक पानी का होगा उत्पादन
यूनिसेफ असम की तरफ से साझा की गई जानकारियों के मुताबिक ये वाटर फिल्टरेशन यूनिट्स प्रतिघंटे 700 से 1000 लीटर पानी का उत्पादन कर सकती हैं। अधिकारियों का कहना है कि गांव में साफ जल और स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
क्या कहते हैं यूनिसेफ असम प्रमुख
यूनिसेफ असम में चीफ ऑफ फील्ड ऑफिस और आधिकारिक प्रवक्ता डॉ मधुलिका जोनाथन कहती हैं, स्वच्छ पेयजल मौजूदा समय की बुनियादी जरूरत है। बाढ़ के कारण कई जिले जलमग्न हो गए हैं, ऐसे में पानी की अस्वच्छता के कारण कई तरह की बीमारियों के पनपने का खतरा हो सकता है। कछार में लगाए गए इन वाटर फिल्टरेशन यूनिट्स की मदद से लोगों तक साफ पीने का पानी पहुंचाकर हम बाढ़ जनित बीमारियों के जोखिम को कम करने का प्रयास कर रहे हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) कहता है, दूषित पानी और स्वच्छता में कमी हैजा, दस्त, पेचिश, हेपेटाइटिस-ए, टाइफाइड और पोलियो जैसी बीमारियों के संचरण का कारण बन सकती है। विशेषकर बाढ़ प्रभावित हिस्सों में सुविधाओं की कमी के कारण इन समस्याओं का जोखिम काफी बढ़ जाता है। साफ पीने के पानी की अनुपलब्धता और स्वच्छता की कमी के कारण ऐसे हिस्सों में संक्रमण और बीमारियां बढ़ जाती हैं, जिसके कारण हर साल हजारों की मौत होती है।
डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों के जरिए भी हमें यह पता चलता है कि दूषित पेयजल और साफ-सफाई की कमी के कारण हर साल करीब 829,000 लोगों की डायरिया से मौत हो जाती है। ये आंकड़े इस बात की ओर भी संकेत करते हैं कि हरेक साल 5 साल से कम उम्र के 297 000 बच्चों की जान बचाई जा सकती है। प्राकृतिक आपदा से प्रभावित क्षेत्रों में हाथ धोते रहने और साफ पानी की व्यवस्था बनाकर कई तरह के संक्रमण के खतरे को कम किया जा सकता है।

अन्य बाढ़ प्रभावित इलाकों में भी हो सकेगा उपयोगी
मौजूदा समय में बाढ़ प्रभावित असम के कछार में यूनिसेफ के इस प्रयास से प्रभावितों को बीमारियों से बचाने में सफलता मिल सकेगी। लेकिन साथ-साथ ही साथ यह भी ध्यान देने योग्य है कि सिर्फ असम के कछार में ही क्यों बल्कि उन सभी ईलाकों में जहां आगामी दिनों,पखवाड़े और माह में बाढ़ की विभिषिका का सामना करना है और उसके चपेट में बहुसंख्य आबादी विशेष रूप से ग्रामीण आबादी में विशेषकर बाढ़ प्रभावित हिस्सों में सुविधाओं की कमी, साफ पीने के पानी की अनुपलब्धता और स्वच्छता की कमी के कारण ऐसे हिस्सों में संक्रमण और बीमारियों के खतरा का सामना करना पड़ेगा और हजारों की संख्या में लोगों के मौत होने का खतरा होता है,उन इलाकों में असम के कछार में लगाए गए इन वाटर फिल्टरेशन यूनिट्स की तरह ही बड़ी संख्या में यदि ऐसे यूनिट्स लगें और साफ पीने का पानी पहुंचाने की व्यवस्था हो तो हम बाढ़ जनित बीमारियों के जोखिम को कम करने में कामयाब होंगे। जरूरत इस बात की है कि सरकारी,गैर सरकारी स्तर पर इस दिशा में समय रहते प्रयास शुरू हो ताकि लोगों स्वच्छ पेयजल मुहैया कराया जा सके और साफ सफाई का प्रबंध हो।


