टीकाकरण, जलवायु परिवर्तन पर गंभीर दिखे छात्र, क्विज के जरिए आयोजकों ने परखा ज्ञान

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  • यूनिसेफ और अमर उजाला फांउडेशन द्वारा आयोजित कार्यशाला का दूसरा दिन
  • एमिटी के छात्रों ने क्विज में मारी बाजी तो पराली की समस्या को रेखांकित करने वाले समूह को मिला प्रथम पुरस्कार

नोएडा: यूनिसेफ और अमर उजाला फाउंडेशन की तरफ से नोएडा में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला में पहले दिन भले ही विशेषज्ञों ने छात्रों से जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य और कोविड-19 टीकाकरण जैसे मुद्दों को लेकर अपनी बात रखी हो लेकिन कार्यशाला का दूसरा दिन पत्रकारिता के छात्रों के नाम रहा। दिल्ली एनसीआर के नामचीन पत्रकारिता संस्थानों से आये हुए छात्र-छात्राओं ने आयोजकों को ये जता दिया कि उनका ये प्रयास सार्थक साबित हुआ है। छात्रों का एक समूह जलवायु परिवर्तन से जुड़े मसले और पराली जैसी समस्या को लेकर अपना प्रजेन्टेशन पूरी तरह से तैयार कर सबके सामने रखने और बाजी मार ले जाने को तत्पर दिखा तो वहीं दूसरी ओर दूसरा समूह कोविड टीकाकरण से जुड़ी चुनौतियों,टीकाकरण को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों और टीकाकरण के फायदे बताकर बाजी मार ले जाने को तत्पर दिखा। बड़ी बात ये थी इन सभी संस्थानों के छात्र अपने-अपने प्रजेन्टेशन की तैयारी मोजो,पॉडकास्ट डिजिटल पत्रकारिता के विभिन्न आयामों के जरिए अपनी बात कहने का प्रयास कर रहे थे।

लेकिन पत्रकारिता सिर्फ तथ्यों का बेहतर प्रस्तुतीकरण मात्र नहीं है। यही कारण है कि आयोजकों द्वारा क्विज के जरिए इन छात्रों के बौद्धिक परीक्षण के साथ ही कोविड,पर्यावरण,विज्ञान व सामान्य ज्ञान आदि के जरिए इनकी रूची—अभिरूची को परखने का प्रयास ​भी किया गया। जाने माने टीवी पत्रकार श्रृजॉय चौधरी द्वारा विभिन्न समूह में बांटे गये इन पत्रकारिता संस्थानों के समक्ष विविध तरह के प्रश्न रखे गए। उन्होंने क्योटो प्रोटोकॉल, ग्रीन हाउस गैस, मीथेन उत्सर्जन, भारत के स्वच्छ व जलवायु अनुकूल शहर और केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत अभियान के बारे में सवाल छात्रों के समक्ष रखे। जिस रोचक तरीके से श्रृंजॉय क्विज के प्रश्नों को रख रहे थे, छात्रों को पूरा मौका दे रहे थे, जरूरत पड़ने पर कुछ हिंट भी दे रहे थे और साथ ही साथ छात्रों को जवाब देने को प्रोत्साहित भी कर रहे थे, इन सब से छात्रों की रूची इस कार्यशाला में बढ़ती हुई दिखाई दी और वे प्रश्नों के सही जवाब देकर क्विज जीतने के होड़ में शामिल दिखे। सात दौर में आयोजित क्विज में वैसे तो सबसे ज्यादा प्रश्नों का उत्तर देकर प्रथम स्थान पाने का गौर एमिटी यूनिवर्सिटी के छात्रों ने हासिल किया लेकिन एमिटी के साथ ही शारदा यूनिवर्सिटी और गलगोटिया यूनिवर्सिटी के छात्र-छात्राओं ने भी इस क्विज में हिस्सा लिया और बाजी को अपने पक्ष में करने का हर संभव प्रयास करते दिखे। प्रश्न मंच सात दौर में हुआ। एमिटी यूनिवर्सिटी ने सबसे ज्यादा अंक हासिल कर इसे जीता।

अब बारी थी छात्रों के कार्यशाला के पहले दिन दिए गये टास्क के परीक्षण की। कार्यशाला के पहले दिन अलग-अलग विश्वविद्यालयों से आए करीब 50 छात्र-छात्राओं ने डिजिटल-मोबाइल पत्रकारिता के गुर सीखे थे। इसी आधार पर उन्होंने अपने प्रस्तुतीकरण तैयार किए। सबसे पहले शारदा यूनिवर्सिटी के छात्रों के एक समूह ने पॉडकास्ट प्रस्तुत करते हुए जलवायु परिवर्तन और बच्चों पर उसके असर के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि बाढ़ जैसे हालात होने पर जब लोग पलायन करते हैं तो बच्चों की सेहत पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है। उन्होंने बताया कि पत्रकारिता में करियर बनाने पर वे मोबाइल जर्नलिज्म और सोशल मीडिया के जरिए इन मुद्दों पर जागरुक फैलाने का काम करेंगे।

बच्चों के टीकाकरण में मिली सफलता
कोविड-19 टीकाकरण के बारे में प्रस्तुतीकरण देते हुए एक समूह ने कहा कि शुरुआत में कोरोना के टीके की कमी थी। हमने कोरोना का वह दौर भी झेला, जब हमारे पास टीका नहीं था। जब टीका आया तो लोगों में भय और भ्रांति थी। वे टीका लगवाने के लिए आगे नहीं आ रहे थे। हालांकि, जब बच्चों की बारी आई तो जागरुकता की कोशिशें सफल हो गईं और टीके को लेकर डर खत्म हो गया। कई स्कूलों में सौ फीसदी टीकाकरण हुआ।

पराली  की समस्या से निपटने के क्या हैं उपाय?
बाकी बच्चों के समूहों ने अपने प्रस्तुतीकरण में बताया कि जलवायु परिवर्तन की वजह से महिलाओं और उनके स्वास्थ्य पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है। एक समूह ने पराली को जलाने की समस्या के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि पराली जलाने से वायु गुणवत्ता खराब होती है। दिल्ली-एनसीआर इससे सबसे ज्यादा प्रभावित रहा है। पराली खेत के लिए खाद का भी काम कर सकती है। रिवर्सिबल हल जैसे उपकरणों से पराली को खाद बनाने में मदद मिल सकती है। पूसा संस्थान की डिकम्पोजर कैप्सूल छिड़ककर भी पराली को खाद बनाया जा सकता है। एक और समूह ने पानी के संकट और स्कूलों में बच्चों को हाथ धोने की अहमियत बताने पर जोर दिया।

किसने जीता, किसने बेहतर तरीके से प्रजेन्टेशन दिया इन सारी बातों का परीक्षण तो कार्यशाला के आयोजकों को करना था लेकिन जो महत्वपूर्ण बात सामने आयी वो ये थी कि चाहे विशेषज्ञ हों या पत्रकारिता के छात्र दोनों ही दिन पूरी तरह से तल्लीन नजर आये। कोई सीख रहा था,कोई सिखा रहा था लेकिन इन सब के बीच जो महत्वपूर्ण बात रही वो ये थी कि छात्र मोबाईल पत्रकारिता और डिजिटल पत्रकारिता के गुर से रूबरू हो रहे थे। जहां तक प्रथम पुरस्कार पाने वाले समूह का सवाल है तो पराली की समस्या को रेखांकित करने वाले समूह को प्रथम पुरस्कार दिया गया। प्रथम पुरस्कार पुरस्कार पाने वाले समूह में ये प्रतिभागी थे- आकांक्षा सिंह, पूजा नेगी, हर्षित चौधरी, प्रेरणा सिंह, स्वास्तिक सरकार, अंजलि कुमारी, अक्षत, सतीश मिश्र, मोहम्मद रफीक पठान और साकिब शेख।

इस कार्यशाला में यूनिसेफ-इंडिया की ओर से कम्युनिकेशन स्पेशलिस्ट अल्का गुप्ता और कम्युनिकेशन ऑफिसर सोनिया सरकार तो मौजूद रही हीं साथ ही बड़ी संख्या में पत्रकार भी शामिल हुए जो देश के अलग-अलग हिस्सों से आए थे और भविष्य के पत्रकारिता के पौध को अपने अनुभव के खजाने से समृद्ध कर रहे थे।

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