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पैतृक गॉंव चमथा में बीते बचपन के दिन भी क्या दिन थे

वैसे तो मेरा जन्म 1958 में सीवान जिला के रघुनाथपुर के पुलिस क्वार्टर में हुआ लेकिन पूरा बचपन पैतृक गॉंव चमथा में बीता। पिताजी स्व. रामराज सिंह पुलिस अफसर थे और मेरे जन्म के समय रघुनाथ पुर में पोस्टेड थे। माँ शिवदुलारी देवी गृहिणी महिला थीं। मैं चार भाई और एक बहन में दूसरे नंबर …

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गांव से नगर बनने की यात्रा में खो गया गांव गजरौला

मेरा गांव गजरौला है जो उत्तर प्रदेश राज्य के अमरोहा ज़िले में स्थित एक नगर व नगर पालिका परिषद है। गजरौला गंगा नदी की पूर्वी ओर राष्ट्रीय राजमार्ग 24 व राष्ट्रीय राजमार्ग ९ पर स्थित है। यह राजमार्ग उसे पश्चिम दिशा में गंगा की दूसरी पार गढ़मुक्तेश्वर से जोड़ता है। बड़ी बात ये है कि …

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कथा बरास्ते विकास शहरीकरण की भेंट चढ़ते गांव की

अपने गांव को याद करने से पहले तो बनता है अपने आप से एक सवाल। क्या दशकों से किसी महानगर में रहते-रहते हमारा गांव हमारे अंदर कहीं बसता भी है या वह कहीं गुम हो चुका है ? तो जवाब तो यही बनता है कि मन के किसी कोने में वह बसता तो है लेकिन …

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गांव सिरिसिया…आर्थिक संपन्नता से पैदा हुए अभिमान ने गंवई स्वाभिमान को ढ़क दिया

भानु प्रताप सिंह मेरा गांव सिरिसिया बिहार राज्य के आरा जिला में बबुरा के नजदीक गंगा किनारे का गांव है। ग्रामीण जीवन का आधार सरकार मुक्त जीवन जीने की कला पूर्वजों द्वारा संस्कारित था। हर अपने से छोटों को आचार,विचार, व्यवहार निस्वार्थ भाव से न्योछावर कर देता था, जिससे गांव के युवक युवतियां समाज के …

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विस्थापन का दर्द दिल में लिए…गांव से जुड़ा ही रहा मेरा रिश्ता

अंजनी कुमार फिल्म /टी.वी निर्देशक मेरा जन्म मुंगेर जिले के सहूर गांव में हुआ। ये गांव पंडित कार्यानद शर्मा के गांव के रूप में जाना जाता है। यहीं उनका जन्म हुआ था। मेरी मां श्रीमती ज्योतसना शर्मा और पिता श्री धनंजय सिंह दोनो ही शिक्षक थे। बचपना के बाद मां के तबादले के हिसाब से …

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कितना बदला मेरा गांव

 डॉ अमरनाथ गांव तो मैने 1975 में ही छोड़ दिया था जब एम ए की शिक्षा लेने गोरखपुर जाना पड़ा। किन्तु 1977 के बाद जब नौकरी लग गई तो गांव आना कम हो गया। वैसे तो मां-बाबूजी के कारण प्राय: महीने में दो तीन बार गांव आ जाता किन्तु दो तीन दिन से अधिक न …

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” बहरवांसु ” होने के कारण गांव में नहीं थी ” हरमुठाह ” काम की इजाजत

मेरा गांव बिहार के छपरा सिवान की सीमा पर है। प्रशासनिक दृष्टि से या सिवान जिले का भाग है पर शिक्षा , स्वास्थ्य , बाजार आदि की जरूरतों के लिए ग्रामीण छपरा की ओर रुख करना अधिक पसंद करते हैं । क्योंकि यह पुराना जिला है और अब प्रमंडल का मुख्यालय भी । छपरा के …

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मेरा गांव आमी अर्थात अम्बिका स्थान

ब्रज किशोर सिंह बिहार के सारण जिले में मेरा गांव दिघवारा स्टेशन से चार किलोमीटर पश्चिम छपरा-सोनपुर राष्ट्रीय उच्च पथ पर स्थित है। पटना से इसकी दूरी 52 किलोमीटर एवं छपरा से 25 किलोमीटर है। यह गंगा के किनारे अवस्थित है जिसकी धाराएं कभी पास आती है एवं कभी दूर जाती है। आज से 70 …

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छ लाख गांव हमार ह,अपना गांव लागी बात करीं तो लोग का कही..जयप्रकाश नारायण

हरिवंश फिर धीरे-धीरे राजनीति ने आहट दी. तब कांग्रेस का जोर था, सोशलिस्ट पार्टी भी थी, कहीं-कहीं वामपंथियों की आवाज भी सुनाई देती थी. चुनाव तब एक साथ होते थे. कुछ वर्षों बाद बार-बार चुनाव की स्थिति बनने लगी. फिर विकास योजनाओं की चर्चा, ठेकेदारी की चर्चा, रिश्वत की बातें हवा में तैरने लगीं. गांव …

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गांधी के गांव का बदल गया समाजशास्त्र

विनोद कुमार मिश्र मुझे याद है बुजुर्ग फोचाय मरर का वह गीत कखन हरब दुख मोर हे भोलानाथ, इसी गीत से गांव की सुबह की शुरुआत होती थी। फोचाय मरर के इस गीत के साथ शुरू होती थी कई आवाजे….मवेशियों के गले मे बंधी घंटिया, किसानों की चहल पहल..दूर से आती धान कूटती ढेकी की …

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