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कितना बदला मेरा गांव

 डॉ अमरनाथ गांव तो मैने 1975 में ही छोड़ दिया था जब एम ए की शिक्षा लेने गोरखपुर जाना पड़ा। किन्तु 1977 के बाद जब नौकरी लग गई तो गांव आना कम हो गया। वैसे तो मां-बाबूजी के कारण प्राय: महीने में दो तीन बार गांव आ जाता किन्तु दो तीन दिन से अधिक न …

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” बहरवांसु ” होने के कारण गांव में नहीं थी ” हरमुठाह ” काम की इजाजत

मेरा गांव बिहार के छपरा सिवान की सीमा पर है। प्रशासनिक दृष्टि से या सिवान जिले का भाग है पर शिक्षा , स्वास्थ्य , बाजार आदि की जरूरतों के लिए ग्रामीण छपरा की ओर रुख करना अधिक पसंद करते हैं । क्योंकि यह पुराना जिला है और अब प्रमंडल का मुख्यालय भी । छपरा के …

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मेरा गांव आमी अर्थात अम्बिका स्थान

ब्रज किशोर सिंह बिहार के सारण जिले में मेरा गांव दिघवारा स्टेशन से चार किलोमीटर पश्चिम छपरा-सोनपुर राष्ट्रीय उच्च पथ पर स्थित है। पटना से इसकी दूरी 52 किलोमीटर एवं छपरा से 25 किलोमीटर है। यह गंगा के किनारे अवस्थित है जिसकी धाराएं कभी पास आती है एवं कभी दूर जाती है। आज से 70 …

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छ लाख गांव हमार ह,अपना गांव लागी बात करीं तो लोग का कही..जयप्रकाश नारायण

हरिवंश फिर धीरे-धीरे राजनीति ने आहट दी. तब कांग्रेस का जोर था, सोशलिस्ट पार्टी भी थी, कहीं-कहीं वामपंथियों की आवाज भी सुनाई देती थी. चुनाव तब एक साथ होते थे. कुछ वर्षों बाद बार-बार चुनाव की स्थिति बनने लगी. फिर विकास योजनाओं की चर्चा, ठेकेदारी की चर्चा, रिश्वत की बातें हवा में तैरने लगीं. गांव …

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गांधी के गांव का बदल गया समाजशास्त्र

विनोद कुमार मिश्र मुझे याद है बुजुर्ग फोचाय मरर का वह गीत कखन हरब दुख मोर हे भोलानाथ, इसी गीत से गांव की सुबह की शुरुआत होती थी। फोचाय मरर के इस गीत के साथ शुरू होती थी कई आवाजे….मवेशियों के गले मे बंधी घंटिया, किसानों की चहल पहल..दूर से आती धान कूटती ढेकी की …

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सांसद आदर्श ग्राम योजना के फलॉप होने का गवाह है जीरादेई

महात्मा भाई राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150 वीं वर्षगांठ के अवसर पर मुझे अपने गांव के बारे में कुछ लिखने का मौका मिला है तो मैं अपने को भाग्यशाली मानता हूं। देश के प्रथम राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद की जन्मभूमि होने से इस गांव को स्वाधीनता आंदोलन की गतिविधियों का साक्षी बनने का सौभाग्य मिला है। …

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विद्यापति…घुरी आउ बिस्फी गाम

प्रसून लतांत, वरिष्ठ पत्रकार बिहार में अंतरराष्ट्रीय ख्याति का एक गांव है बिस्फी। इस गांव को लोग महाकवि विद्यापति की जन्मस्थली के रूप में जानते हैं। यह गाव विद्यापति को उनके प्रतिभा के कारण उनके आश्रय दाता राजा ने पुरस्कार के रूप में राजा ने दिया था। पैसे और अन्य कारणों से लोग संपत्ति हासिल …

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कतहीं जियरा लागत नइखे…

महेन्द्र प्रसाद सिंह भोजपुर जिले के कोइलवर ब्लॉक में पड़ने वाला मेरा गांव चांदी है। इसे नरहीं के साथ जोड़कर पहचाना जाता है क्योंकि भोजपुर जिले में चांदी नाम के दो गांव हैं। इसके पूरब में बहियारा, उत्तर में नरबीरपुर, दक्खिन में हरदास टोला और ​पश्चिम में जमीरा, लक्ष्मणपुर गांव हैं। चांदी को जोड़ने वाली …

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अपने प्रयास से आगे बढ़ा दानियाल परसौना

प्रवेश कुमार मिश्र महात्मा गांधी की कर्मभूमि चम्पारण के साठी थाना में दानियाल परसौना गांव आज विकास की गति के साथ कदमताल करने को तैयार है। कभी शहर व बाजार से महरूम रहा यह गांव आज बड़े-बड़े शहरों से आने वाले धन पर इठला रहा है। लोग देश-विदेश तक अपनी पहुंच बना चुके हैं। कभी …

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‘कान्ना’ द्वारा बसाये गये गांव कानौंदा की रही है ऐतिहासिक पहचान

कपूर सिंह छिकारा हरियाणा में वर्षा की पहली बूंद को हरि कहा जाता है। इस ‘हरि’ से ही हरियाणा प्रान्त का नामकरण हुआ है। विभिन्न प्रकार की वर्षा को अलग-अलग नाम से पुकारा जाता हैं जैसे-मीह, भड़, दोगड़ा, क्यारी भर, दैशारी, मेधपुष्प, बरखा आदि। एक-एक बूंद का संचयन किया जाता था। प्राचीन वर्षा जल संचयन …

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