gandhi smriti

गांव से नगर बनने की यात्रा में खो गया गांव गजरौला

मेरा गांव गजरौला है जो उत्तर प्रदेश राज्य के अमरोहा ज़िले में स्थित एक नगर व नगर पालिका परिषद है। गजरौला गंगा नदी की पूर्वी ओर राष्ट्रीय राजमार्ग 24 व राष्ट्रीय राजमार्ग ९ पर स्थित है। यह राजमार्ग उसे पश्चिम दिशा में गंगा की दूसरी पार गढ़मुक्तेश्वर से जोड़ता है। बड़ी बात ये है कि …

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सोन नदी के कछार पर बसा मेरा गांव खंडोल

मेरा सौभाग्य है कि मेरा जन्म एक ऐसे गांव खंडोल में हुआ जहां लगभग महिलाएं भोजपुरी बोलती हैं और लगभग पुरुष मगही। इस नाते पुरुषों द्वारा बोली जाने वाली मगही पर भोजपुरी का और स्त्रियों द्वारा बोली जाने वाली भोजपुरी पर मगही का प्रभाव देखा जा सकता है। कुछ पुराने लोगों का मानना है कि यहां …

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लोक-गीतों व संस्कृतियों के मौलिक बोध से ही रहने लायक बनेंगे गांव

अमित राजपूत खड़कपुर। यही वह पहला गांव है, जिसका बोध मुझे मेरे जीवन व अनुभव-संसार में पहली बार हुआ। सोलह महा-जनपदों में से एक भगवान बुद्ध की तपोस्थली कौशाम्बी-जनपद (उत्तर प्रदेश) का एक छोटा सा गांव है खड़कपुर, जहाँ औसतन ग़रीब लोधी-राजपूतों की एकमुश्त आबादी है। गांव के निर्वासित-इलाक़े के दक्षिण-पश्चिमी कोने पर एक सम्पन्न …

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स्मृतियों में बसा है गांव रसलपुर

विभाष कुमार मिश्र मैथलिशरण गुप्त ने साकेत में , सीता के मन में उनके वास्तविक घर कौन है इस संदर्भ में एक मार्मिक प्रसंग लिखा है । जिसमें वे सीता के मन के द्वंद्व को इस प्रकार लिखते है “ मिथिला मेरा मूल है, आयोध्य मेरा फूल। चित्रकूट को क्या कहूं रहती हूं मैं भूल। …

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गांव सलेमपुर आज भी अपनी पुरातन परंपराओं को सहेजे हुए है…

प्रो बी एस वर्मा देश बदला, समाज बदला, संस्कार बदले, संस्कृतियां तक बदल गयीं। परंतु भारतीय ग्रामीण परंपराओं ने अपना परिवेश नहीं बदला। हमारा गांव सलेमपुर नहीं बदला। कई संस्कृतियां आईं और गयी, परंतु असली भारत वर्ष आज भी ग्रामीण परिवेश में देखने को मिल जायेगा। ऐसा ही एक गांव है सलेमपुर। जो उत्तर प्रदेश …

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विस्थापन का दर्द दिल में लिए…गांव से जुड़ा ही रहा मेरा रिश्ता

अंजनी कुमार फिल्म /टी.वी निर्देशक मेरा जन्म मुंगेर जिले के सहूर गांव में हुआ। ये गांव पंडित कार्यानद शर्मा के गांव के रूप में जाना जाता है। यहीं उनका जन्म हुआ था। मेरी मां श्रीमती ज्योतसना शर्मा और पिता श्री धनंजय सिंह दोनो ही शिक्षक थे। बचपना के बाद मां के तबादले के हिसाब से …

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गांव का नाम, बफापुर बांथू… जिला…लोकतंत्र की जननी वैशाली

मेरा गांव कब आबाद हुआ ये तो ठीक-ठीक कहीं दर्ज नहीं है। लेकिन मेरे गांव का नाम बहुत दिलचस्प है: बफापुर बांथू। बफापुर को लेकर गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि इस गांव से जो लगान वसूलते थे वो मुस्लिम थे। बहुत पहले की बात है। अगला शब्द है, बांथू। इसके लिए वो कहते हैं …

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डॉक्टर भैया के प्रयास से आदर्श गांव बनेगा छोटा सा गांव लोहानीपुर

मंगरूआ गया:सांसदों द्वारा गोद लिये आदर्श गांव की कथा और उसके हालात के विषय में आप अक्सर खबर पढ़ते ही होंगे लेकिन आईये आज आपको गांव लोहानीपुर में लिये चलते हैं जिसे एक प्रवासी भारतीय डॉक्टर ने गोद लेने की बात कही है। जी हां यह गांव लोहानीपुर  गया मुख्यालय से करीब 30 किमी दूर …

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मेरा गांव सजांव… पुरखों ने एक संसार रचा था, हम पूरी शिद्दत से उसे उजाड़ रहे हैं

शिवानंद द्विवेदी मेरा गांव सजांव बिहार सीमा से सटे पूर्वी उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में पड़ता है। मुझे गांव में रहने का ऐसा अवसर शायद बीस साल बाद मिला है। आजकल ‘आपदा में अवसर’ चलन में है। कोरोना नामक इस अदृश्य परिजिवी ने हमें आपदा के अंतहीन लगने वाले दौर में बांध दिया है। …

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सोहवलिया-मेरा गांव मेरा देश

विद्युत प्रकाश मौर्य सोहवलिया मतलब मेरा गांव मेरा देश। बिहार के रोहतास जिले के करगहर प्रखंड का एक गांव। वह गांव जिसमें मेरे बचपन के शुरुआती छह साल गुजरे। गांव से दूर हो गया हूं। दिल के एक कोने में हमेशा गांव की स्मृतियां जवां रहती हैं।                  …

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