किसानों को समझाते,किसान नेताओं को हड़काते, विपक्ष के अतीत का आईना दिखाते मोदी

मंगरूआ

नयी दिल्ली: अपने चिरपरिचित अंदाज में आज एक बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फिर से मुखर दिखे। निशाने पर किसान नेता और विपक्ष रहा। राज्यसभा में जब राष्ट्रपति के अभिभाषण पर जवाब देने आये तो वे दो माह से ज्यादा से चल रहे किसान आंदोलन को लेकर बचाव की मुद्रा में कदापी नहीं थे। उन्होंने इस आंदोलन के लिए किसान नेताओ पर तीखा हमला बोला साथ ही उनके निशाना पर विपक्षी दल भी थे। इस दौरान प्रधानमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्रियों के हवाले से चाहे लाल बहादुर शास्त्री हों, चौधरी चरण सिंह हों, एचडी देवगौड़ा हों या फिर मनमोहन सिंह इन सब की चर्चा करते हुए किसानों को यह भरोसा दिलाने का प्रयास किया कि जो कृषि कानून बनाये गये हैं वो किसानों के हित में हैं। यदि इसमें कोई कमियां होगीं भी तो ​सरकार बातचीत को तैयार है। उनका आशय था कि किसान विपक्षी दलों और आंदोलन जीवी किसान नेताओं के बहकावे में न आकर आंदोलन खत्म करें और बातचीत करें।


क्या कहा प्रधानमंत्री ने
आज राज्यसभा में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण पर जवाब देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सदन में किसान आंदोलन की भरपूर चर्चा हुई है। ज्यादा से ज्यादा समय जो बात बताई गईं वो आंदोलन के संबंध में बताई गई। किस बात को लेकर आंदोलन है? उस पर सब मौन रहे। जो मूलभूत बात है, अच्छा होता कि उस पर भी चर्चा होती। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन पर राजनीति हावी हो रही है। विपक्ष ने इस मुद्दे पर अचानक से यू-टर्न ले लिया है। पीएम मोदी ने किसानों से आंदोलन खत्म करने की अपील की।


बुर्जंगों का बैठना ठीक नहीं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों के आंदोलन के विषय में कहा कि किसान आंदोलन कर रहे हैं और यह उनका हक है लेकिन वहां बुजुर्ग बैठे हुए हैं, अच्छी बात नहीं है। उन्हें वापस ले जाइए. हम मिलकर बैठकर बात करेंगे. मैं बार-बार कह रहा हूं। हम सब मिल-बैठकर बात करने को तैयार हैं। मैं आज सदन से भी निमंत्रण देता हूं। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने एक बार फिर दुहराया कि ‘एमएसपी था, एमएसपी है और एमएसपी रहेगा। हमें भ्रम नहीं फैलाना चाहिए।’
खेती ​को खुशहाल बनाने के लिए जरूरी है फैसला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि ‘हमें समझना होगा कि हमारी खेती को खुशहाल बनाने के लिए फैसले लेने का समय है। यही समय है। इस सुधार को आगे ले जाना चाहिए। हमें एक बार देखना चाहिए कि कृषि परिवर्तन से बदलाव होता है कि नहीं। कोई कमी हो तो उसे ठीक करेंगे, कोई ढिलाई हो तो उसे कसेंगे। मैं विश्वास दिलाता हूं कि मंडियां और अधिक आधुनिक बनेंगी।’ सरकार के तीन नए कृषि कानूनों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए पीएम ने कहा कि ‘हर कानून में अच्छे सुझावों के बाद कुछ समय के बाद बदलाव होते हैं, इसलिए अच्छा करने के लिए अच्छे सुझावों के साथ, अच्छे सुधारों की तैयारी के साथ हमें आगे बढ़ना होगा।’
पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को किया याद
प्रधानमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की चर्चा की और कहा कि ‘चौधरी चरण सिंह हमेशा किसानों का सेंसस का जिक्र करते थे जिसमें यह बात सामने आई थी कि देश में 33 फ़ीसदी किसानों के पास 2 बीघा से कम जमीन है और 18 फ़ीसदी के पास 2 से 4 बीघे की जमीन है चौधरी चरण सिंह मानते थे कि छोटे किसानों के लिए हालात मुश्किल हैं।’ पीएम ने आगे कहा, ‘1971 में 1 हेक्टेयर से कम जमीन वाले किसानों की संख्या 51 फीसदी थी जो आज बढ़कर 68% हो गई है।
यानी उन किसानों की संख्या बढ़ रही है जिनके पास बहुत कम जमीन है। आज देश में 86 फ़ीसदी ऐसे किसान हैं जिनके पास 2 हेक्टेयर से भी कम जमीन है। ऐसे 12 करोड़ किसान हैं। क्या इनके प्रति हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं है? हमें चौधरी चरण सिंह को सच्ची श्रद्धांजलि देने के लिए इस दिशा में कुछ करना होगा।’

शास्त्री को भी करना पड़ा था विरोध का सामना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जब लाल बहादुर शास्त्री जी को जब कृषि सुधारों को करना पड़ा, तब भी उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। लेकिन वो पीछे नहीं हटे थे। तब लेफ्ट वाले कांग्रेस को अमेरिका का एजेंट बताते थे, आज मुझे ही वो गाली दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी कानून आया हो, कुछ वक्त के बाद सुधार होते ही हैं।
पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के कथन को दोहराया
नरेंद्र मोदी ने सदन में पूर्व पीएम मनमोहन सिंह की उपस्थिती में उनका बातें दुहराई, ‘हमारी सोच है कि बड़ी मार्केट को लाने में जो अड़चने हैं, हमारी कोशिश है कि किसान को उपज बेचने की इजाजत हो’। पीएम मोदी ने कहा कि जो मनमोहन सिंह ने कहा वो मोदी को करना पड़ रहा है, आप गर्व कीजिए। उन्होंने कहा कि दूध का काम करने वाले, पशुपालन वाले, सफल का काम करने वालों के पास खुली छूट है। लेकिन किसानों को ये छूट नहीं है।
2014 से ही किया जा रहा सुधार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 2014 के बाद हमने कई परिवर्तन किए और फसल बीमा के दायरे को बढ़ा दिया। उन्होंने कहा कि फसल बीमा योजना के तहत 90 हजार करोड़ रुपये दिए गए। हमने करीब पौने दो करोड़ लोगों तक किसान क्रेडिट कार्ड को पहुंचाया।
किसान सम्मान निधि योजना से हुआ लाभ
पीएम मोदी बोले कि हमने किसान सम्मान निधि योजना लागू की, दस करोड़ परिवारों इसका लाभ मिला और 1.15 लाख करोड़ किसानों के खाते में गया है। बंगाल में राजनीति आड़े में ना आती, तो वहां के लाखों किसानों को लाभ मिलता। हमने सौ फीसदी किसानों को सॉयल हेल्थ कार्ड पेश किया।


राकेश टिकैत ने दिया जवाब

किसान नेता राकेश टिकैत ने प्रधानमंत्री द्वारा यह कहे जाने पर कि एमएसपी कभी खत्म नहीं होगा के जवाब में कहा कि हमने कब कहा कि एमएसपी खत्म हो जाएगा। एमएसपी को अनिवार्य बनाने के लिए कानून बनाया चाहिए। टिकैत ने कहा यदि प्रधानमंत्री मोदी किसानों से बातचीत करना चाहते हैं को उनका किसान मोर्चा उनसे बात करेगा।
जाट आंदोलन बताने पर खफा दिखे टिकैत
किसान के आंदोलन को जाट आंदोलन बताए जाने पर जवाब में राकेश टिकैत ने कहा कि ये मसला पहले पंजाब का और हरियाणा का था। फिर जाटों का बना। अब यह आंदोलन छोटे बड़े किसानों का हो गया है। सभी किसान एक हैं, छोटा बड़ा क्या है। राकेश टिकैत ने कहा कि देश मे भूख पर व्यापार नही होगा। अनाज की कीमत भूख पर तय नही होगी। देश मे पानी से सस्ता दूध बिकता है। उसका भी रेट तय होगा।

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