जोर लगा के हईशा…बद्री विशाल की…………जय

आलोक रंजन

देहरादून: ‘जाको राखे साइयां, मार सके न कोय’। ये कहावत आपने कई बार सुनी होगी। लेकिन जब कुदरत का कहर टूटता है तो आशंका होती है साईं यानी भगवान का कहर है। कुछ ऐसा ही नजारा आज उत्तराखंड के चमोली जिले के जोशीमठ में ग्लेशियर टूटने के दौरान दिखा। जहां देखों वहीं जल सैलाब। मानो सबकुछ अपने साथ बहा ले जाने को आतुर। क्या मकान,क्या दुकान,क्या इंसान। । आपदा के दौरान तपोवन विष्णुगाड जल विद्युत परियोजना को भी भारी नुकसान पहुंचा। तपोवन विष्णुगाड जल विद्युत परियोजना का इन दिनों सुरंग निर्माण कार्य जोरों पर चल रहा था। रविवार को भी सुरंग निर्माण कार्य में सैकड़ों मजदूर जुटे हुए थे। ऐसे में सैलाब के कारण फंसे लोगों को सेना, आईटीबीपी और एनडीआरएफ की टीमों की मदद से बचाये जाने का काम शुरू हुआ। और इस बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसमें आईटीबीपी के जवानों ने एक टनल से लगभग 16 लोगों को जिंदा रेस्कयू किया और जो लोग आईटीबीपी के रेस्क्यू में बचा लिये गये उनके खुशी का ठिकाना न था। देश भर के लोगों के जुबान पर मौत को मात देते जिंदगी के इस तस्वीर को देखकर एक ही भाव रहा होगा ‘जाको राखे साइयां, मार सके न कोय’।

आईटीबीपी और एनडीआरएफ के जवान इन लोगों के लिए देवदूत बन कर आये थे। जब ITBP के जवान गहरी अंधेरी सुरंग से मजदूर को बाहर निकालतेतो वो खुशी से नाचने लगते। उन्हें सहसा भरोसा नहीं होता कि वो मौत को मात देकर बाहर निकल आये है। . उसे विश्वास नहीं होता कि साल 2013 में केदारनाथ में आई आपदा से भी भयंकर स्थिति में वो जीवित बच गया है। जैसे—जैसे वे बचाव के बाद जिंदा बाहर आते बद्री विशाल की जय का जयकारा लगता। जैसे—जैसे यह वीडियो सोशल मीडिया के जरिए आम लोगों तक लाइक करते हुए ITBP के जवानों की तारीफ करते नहीं थक रहे। तपोवन-रेणी पनबिजली परियोजना में काम कर रहे 150 से ज्यादा मजदूरों के लापता होने और मारे जाने की आशंका के बीच सेना के जवान भी युद्धस्तर पर बचाव कार्य में लग गए हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा जानें बचाई जा सकें। चमोली जिले के रैणी में रविवार सुबह ग्लेशियर फट गया था। इसके बाद वहां एक बांध भी क्षतिग्रस्त हो गया जिससे धौली नदी में बाढ़ आ गई। आपदा में अभी तक करीब दस लोगों की मौत की सूचना है। आईटीबीपी के अधिकारियों के अनुसार, 200 से अधिक जवान स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। स्थिति का आंकलन करने के लिए एक टीम मौके पर मौजूद है। लोगों को जागरूक करने और बाहर निकालने के लिए जोशीमठ के पास एक और टीम तैनात की गई है। स्थिति नियंत्रण में है। 12 गांव का संपर्क टूट गया है। इन गांवो में कितने लोग फंसे हुए हैं इसको लेकर अभी सही आकलन नहीं किया जा सका है।


सारे देश की है नजर


उत्तराखंड के चमोली में ग्लेशियर टूटने की इस घटना के बाद चारों तरफ से प्रतिक्रिया आनी शुरू हुई। क्या विपक्ष,क्या सत्ता पक्ष सभी ने इस घटना पर उत्तराखंड के लोगों के साथ खड़ा होने का भरोसा दिया। केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकार तक, अन्य राज्य सरकारों ने इस कार्य में उत्तराखंड के साथ इस आपदा की घड़ी में साथ होने का भरोसा दिया।
बंगाल में एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मैं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, देश के गृहमंत्री अमित शाह जी, एनडीआरएफ के अफसरों के निरंतर संपर्क में हूं। वहां पर राहत और बचाव का कार्य चल रहा है। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जा रहा है। उन्होंने कहा, आज हम मां गंगा के एक छोर पर हैं, लेकिन जो मां गंगा का उद्गम स्थल है, वो राज्य उत्तराखंड इस समय आपदा का सामना कर रहा है। एक ग्लेशियर टूटने की वजह से वहां नदी का जलस्तर बढ़ गया है। नुकसान की खबर है। उत्तराखंड में ऐसे परिवार मुश्किल से मिलते हैं जिनका कोई न कोई सदस्य फौज में न हो। यानि वहां के लोगों का हौसला, किसी भी आपदा को मात दे सकता है। उत्तराखंड के साहसी लोग के लिए मैं प्रार्थना कर रहा हूं, बंगाल प्रार्थना कर रहा है, देश प्रार्थना कर रहा है।


राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा, उत्तराखंड के जोशीमठ के पास ग्लेशियर टूटने से उस क्षेत्र में हुए भारी नुकसान के समाचारों से बहुत चिंता हुई है। मैं लोगों की सुरक्षा और सेहत के लिए प्रार्थना करता हूं। मुझे विश्वास है कि मौके पर राहत एवं बचाव कार्य पूरी तैयारी से चलाए जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री ने ​पूरे दिन में चार बार फोन कर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से राहत व बचाव कार्य की जानकारी ली और हर संभव मदद का भरोसा दिलाया।
उत्तराखंड में ग्लेशियर टूटने की घटना पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा, घटना में जिन लोगों की मृत्यु हुई है, उन सभी को 4-4 लाख रुपये का मुआवजा राज्य सरकार देगी। इसके साथ केंद्र सरकार ने भी 2 लाख रूपये मुआवजा की घोषणा की है।
त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा, हमने वहां का हवाई सर्वे किया, इसके बाद रेणी गांव जहां तक जाया जा सकता है, वहां तक रोड से जाकर जायजा लिया.
उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा, आईटीबीपी के जवान रस्सी से सुरंग के अंदर पहुंचे। अभी 1 घंटे पहले तक वो लगभग 150 मीटर अंदर तक पहुंच पाए थे। ये सुरंग लगभग 250 मीटर लंबी है। उन्होंने कहा कि हमारी सेना के लोग वहां पहुंच गए हैं। एनडीआरएफ की एक टीम दिल्ली से यहां पहुंची है। मेडिकल सुविधा की दृष्टि से वहां सेना के, पैरामिलिट्री फोर्सेज के और हमारे राज्य के डॉक्टर के वहां कैंप किए गए हैं।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उत्तराखंड आपदा के संदर्भ में वहां के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से टेलीफोन पर बातचीत की और वस्तुस्थिति की जानकारी ली। बिहार के मुख्यमंत्री ने रावत से कहा, ”मुझे उम्मीद है कि आप जल्द ही स्थिति पर नियंत्रण पाने में सफल होंगे और उत्तराखण्ड इस त्रासदी से शीघ्र उबर जायेगा। आपदा की इस घड़ी में हमलोग आपके साथ हैं।”
कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एक बयान में कहा, “उत्तराखंड में ‘ग्लेशियर टूटने’, बाढ़ और विनाश की परेशान करने वाली खबरों के बारे जानकर चिंतित हूं।” उन्होंने कहा, “मैं लोगों की सुरक्षा के लिए प्रार्थना करती हूं और कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों से अनुरोध करती हूं कि वे लोगों और अधिकारियों को राहत और बचाव के प्रयासों में मदद करें। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस उत्तराखंड के लोगों के साथ इस दुखद और संकट की घड़ी में खड़ा है।” कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी उत्तराखंड के कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने राहत और बचाव कार्य में भागीदारी करने की अपील की।

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