बिहार पंचायत चुनावों में ईवीएम का पेंच

अमरनाथ झा

पटना: बिहार में पंचायत चुनाव ईवीएम से कराने का फैसला तो हो गया, पर आवश्यक संख्या में ईवीएम मशीनों की खरीद नहीं हुई। इसे लेकर राज्य चुनाव आयोग और पंचायती राज विभाग के बीच फाइल घूम रही है। इन मशीनों की खरीद के बाद उनके संचालन के संबंध में पहले चुनाव कराने वाले सरकारी कर्मचारियों और फिर आम मतदाताओं को प्रशिक्षण देना होगा।


उल्लेखनीय है कि पंचायत चुनाव में एकसाथ छह पदों के लिए मतदान होगे। इसलिए इन चुनावों में उस मशीन से काम नहीं चलेगा जिनका इस्तेमाल लोकसभा और विधानसभा चुनावों में होता है। इसलिए मल्टी पोस्ट मशीन की जरूरत होगी। इसे भारतीय निर्वाचन आयोग से अधिकृत ईसीआइएल से खरीदा जाना है। इसके लिए निर्वाचन आयोग ने अभी तक ईसीआइएल को अनापत्ति पत्र नहीं दिया। राज्य चुनाव आयोग के सचिव योगेन्द राम ने बताया कि आयोग ईवीएम से चुनाव कराने की तैयारी में है, पर समय पर एनओसी नहीं मिलने से ईवीएम मशीन की खरीद में अड़चन आ गई है। राज्य सरकार ने इसके लिए 27 जनवरी 2021 को ही चुनाव आयोग से अनापत्ति पत्र देने का अनुरोध किया था। पर राज्य निर्वाचन आयोग को अभीतक इसका इंतजार है।
राज्य चुनाव आयोग ने पंचायत चुनाव प्रमंडलवार और नौ चरणों में कराने की तैयारी की है ताकि आचार-संहिता की वजह से स्थानीय स्तर पर विकास काम में रुकावट नहीं आए। इसलिए पूरे जिले में एक ही मतदान कराया जाएगा। नौ चरणों में चुनाव कराने से यह लाभ भी है कि एक ही ईंवीएम मशीन का कई जगहों पर इस्तेमाल हो सकेगा। फिरभी चुनाव में लगभग 15 हजार कंट्रोल यूनिट और 90 हजार बैलेट यूनिट का इस्तेमाल होगा। पंचायती राज व्यवस्था के अंतर्गत राज्य में 2 लाख 58 हजार पदों के चुनाव कराए जाने हैं। राज्य में 8386 पंचायत और एक लाख 14 हजार वार्ड हैं।
लोकसभा और विधानसभा चुनावों की तरह ही पंचायत चुनावों की तैयारी भी छह महीने आरंभ हो जाना चाहिए। इस तैयारी का पहला चरण पंचायतों का गठन होता है। इसबार नगर निकायों का पुनर्गठन होने से कई पंचायतों का विलोपन हो गया है। वे नगर निकाय में शामिल हो गए हैं। कुछ पंचायतों के कुछ इलाके नगर निकाय में चले गए हैं। राज्य की 237 ग्रांम पंचायत पूरीतरह विलोप हो गया है। जिन पंचायतों के कुछ इलाके नगर निकाय में शामिल किए गए हैं, ऐसे ग्राम-पंचायतों की संख्या 194 है। इन पंचायतों का नए सिरे से गठन किया जाएगा। अभी राज्य में 8386 ग्राम पंचायतें थी, अब करीब 300 कम हो जाएगी। लेकिन परिसीमन के पहले पक्के तौर पर कुछ नहीं कहा जाएगा क्योंकि जिन पंचायतों का कुछ इलाका नगर निकायों में गया है, उनमें अगर बचे इलाके में चार हजार से अधिक आबादी होगी, तब तो ग्राम-पंचायत का दर्जा बरकरार रहेगा अन्यथा उन्हें दूसरे पंचायत में मिला दिया जाएगा। हालाकिं इसके लिए पंचायत कानून में संशोधन करना होगा। अभी सात हजार की जनसंख्या पर पंचायत के गठन का प्रावधान है। पंचायती राज विभाग के सूत्रों के अनुसार विभाग ने तीन हजार से अधिक आबादी वाले इलाके के पंचायत का दर्जा देने का प्रावधान करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसे मंत्रीमंडल की मंजूरी के बाद विधानसभा में पेश किया जाएगा।


पंचायतों के गठन के बाद मतदाता सूचियों का पंचायत व वार्डवार विखंडन किया जाता है। यह काम जनवरी से ही चल रहा है। इसके पूरा हो जाने पर 19 फरवरी तक अंतिम प्रकाशन की तैयारी थी। हालांकि मतदाता सूची में संशोधन के लिए आई शिकायतों का निपटारा होने में देरी होने से यह काम पूरा नहीं हो सका है। इसके होने के बाद ईवीएम मशीनों की जांच और प्रशिक्षण का काम आरंभ होगा। मतदाताओं के प्रशिक्षण के लिए डमी ईवीएम भी बनाए जाते हैं, लेकिन अभी मशीनें ही नहीं खरीदी जा सके हैं तो डमी तैयार कराने का सवाल ही नहीं है। वैसे ईवीएम की फर्स्ट लेवल चेकिंग में ही दो महीने का समय लगता है। जाहिर है कि ईवीएम के पेंच की वजह से पंचायत चुनाव में देर होने की पूरी संभावना है।

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